नीतीश ने जेटली को लिखा पत्र, कहा बिहार को विशेष पैकेज नहीं, दें विशेष दर्जा

Updated at : 09 Sep 2015 6:14 AM (IST)
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नीतीश ने जेटली को लिखा पत्र, कहा बिहार को विशेष पैकेज नहीं, दें विशेष दर्जा

पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को पत्र लिखा है. मंगलवार को लिखे इस पत्र में सीएम ने फिर से बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग की है. लेकिन, इस बार उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा घोषित 1.25 लाख करोड़ के पैकेज और 14वें वित्त आयोग में बिहार की […]

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पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को पत्र लिखा है. मंगलवार को लिखे इस पत्र में सीएम ने फिर से बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग की है. लेकिन, इस बार उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा घोषित 1.25 लाख करोड़ के पैकेज और 14वें वित्त आयोग में बिहार की हिस्सेदारी में की गयी कटौती को आधार बनाया है.
उन्होंने बिहार के साथ किये गये भेदभाव को अपने पत्र में विस्तार से बताते हुए विशेष राज्य के दर्जा की मांग की है.सीएम ने लिखा है कि अगर चुनाव के पहले बिहार के लिए पैकेज ही घोषणा करनी थी, तो पहले से बकाये दो पैकेजों को ही दे देते. पहला, झारखंड बंटवारा के समय बने बिहार पुर्नगठन विधेयक, 2000 के तहत बकाये विशेष पैकेज को दे देते. इस मामले को लेकर सभी पार्टियों के साथ बैठक करके (जिसमें भाजपा शामिल नहीं हुई थी) एक ज्ञापन भी केंद्र को सौंपा जा चुका है.
दूसरा, राज्य में चल रहे विशेष योजना को पूरी करने के लिए 8282 करोड़ रुपये की जरूरत है, जिसकी घोषणा पहले भी की जा चुकी है. इसमें बांका में तैयार हो रहा 20 हजार करोड़ की लागत से पॉवर प्रोजेक्ट भी शामिल है.
बिहार की इस तरह की गयी हकमारी
पत्र में 14 वित्त आयोग के दौरान बिहार को उसके वाजिब हक से मिले 45 हजार करोड़ कम मिलने की विस्तार से चर्चा की गयी है. लिखा कि इस मसले को लेकर प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री से दो बार मिलकर सकारात्मक रुख अपनाने की चर्चा भी कर चुके हैं, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा.
केंद्रीय पुल से टैक्स की जो हिस्सेदारी बिहार को मिलनी चाहिए, उतनी ही देने की पहल कर दी जाये. 13वें वित्त आयोग में केंद्र करों में राज्य की हिस्सेदारी 10.9 प्रतिशत थी, जो 14वें वित्त आयोग में घट कर 9.66 प्रतिशत हो गयी. अगर 13वें वित्त आयोग के आधार पर राज्य को हिस्सेदारी मिलती, तो उसे 45 हजार करोड़ अधिक मिलते, जो बिहार जैसे पिछड़े राज्य के विकास के लिए काफी था.
सीएम ने 14वें वित्त आयोग की अनुशंसा पर 25 हजार 637 करोड़ वित्त आयोग से पंचायती राज संस्थानों के लिए भी मिलने चाहिए थे, जो नहीं मिले. इससे पंचायत समिति और जिला पर्षद को फंड नहीं मिल पाया है. इन द्विस्तरीय संस्थानों का विकास करने के लिए यह फंड जरूरी है.
पैकेज पर उठाये सवाल
पैकेज का वास्तविक आकार क्या है? 1.08 लाख करोड़ (87 %) पुरानी व मौजूदा योजनाओं का फंड है. एनएच की 54 713 करोड़ के जिन 41 प्रोजेक्टों का जिक्र है, उनमें 47553 करोड़ की 37 योजनाओं की मंजूरी 2007 व 2015 में ही हो चुकी है. सिर्फ 7160 करोड़ के चार नये हैं.
कई योजनाओं में राज्य सरकार की भूमिका का जिक्र नहीं है. चौसा थर्मल पॉवर प्लांट के लिए 10 हजार करोड़ दिये गये हैं. पर यह नहीं बताया गया है कि राज्य सरकार की भूमिका जमीन अधिग्रहण व अन्य कार्यों में क्या होगी. किसी पब्लिक सेक्टर से भी इसमें निवेश को लेकर कोई बात नहीं की गयी है. क्या केंद्र सरकार अकेले ही पूरा निवेश करने जा रही है?पैकेज का फायदा राज्य को कितने वर्षों में मिलेगा? पूरे पैसे एक, पांच या अधिक वर्षों में मिलेंगे?
जो पैसे दिये जायेंगे, क्या वे सीधे राज्य सरकार को मिलेंगे या केंद्र सीधे खर्च करेगा या किसी थर्ड पार्टी के माध्यम से इन्हें खर्च कराया जायेगा?
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