पालीगंज : प्राथमिक विद्यालय लक्ष्मी टोला में न शौचालय, न पीने को पानी

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 23 Jan 2020 9:23 AM

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पालीगंज : एक तरफ सरकार जहां शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही वहीं दूसरी तरफ प्रखंड के स्कूलों की स्थिति ऐसी है जहां बुनियादी शिक्षा का ही घोर अभाव है. हम बात रहे हैं पालीगंज की जहां प्रखंड में प्राथमिक और मिडिल स्कूल मिलाकर कुल 199 है. इन विद्यालयों में 1228 […]

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पालीगंज : एक तरफ सरकार जहां शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही वहीं दूसरी तरफ प्रखंड के स्कूलों की स्थिति ऐसी है जहां बुनियादी शिक्षा का ही घोर अभाव है. हम बात रहे हैं पालीगंज की जहां प्रखंड में प्राथमिक और मिडिल स्कूल मिलाकर कुल 199 है. इन विद्यालयों में 1228 शिक्षकों की आवश्यकता है लेकिन मौजूदा समय में मात्र 824 शिक्षक ही मौजूद हैं. अगर हम मानक की बात करें तो 35 छात्र पर एक शिक्षक होना चाहिए. अब आप ही सोचिए की कैसे हमारे नौनिहाल पढ़ेंगे और आगे बढ़ेंगे.
वैसे प्रखंड में कुछ ही विद्यालय हैं जहां बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है. जहां शिक्षकों की लापरवाही सीधी तौर पर देखने को मिल रही है. ऐसा ही एक विद्यालय है प्राथमिक विद्यालय लक्ष्मी टोला. जो सेहरा-जरखा पथ पर लक्ष्मीटोला गांव के मुख्य पथ से 400 मीटर की दूरी पर पूरब में स्थित है. जहां जाने का कोई रास्ता नहीं है. शिक्षक, छात्र ग्रामीण पगडंडी पकड़कर स्कूल तक जाते हैं.
गर्मी के दिनों में तो छात्र किसी तरह स्कूल में पहुंच जाते हैं लेकिन बरसात के दिनों में स्कूल पहुंच पाना बहुत मुश्किल होता है. या यू कहें कि स्कूल पहुंच ही नहीं पाते बच्चे. क्योंकि स्कूल बीच खेत में स्थित है. और चारों तरफ आने जाने का कोई रास्ता नहीं है. विद्यालय में सुविधाओं की बात करें तो दो चापाकल तो लगे हैं लेकिन दोनों ही बेकार पड़े हैं. किसी में से पानी नहीं निकलता. बच्चों को जब प्यास लगती है तो वह घर पानी पीने जाते हैं. शौचालय की स्थिति उससे भी भयावह है. विद्यालय परिसर में पांच शौचालय हैं.
लेकिन सब मिट्टी और और पत्थर से भरे हुए हैं. और तो और शौचालय में तो दरवाजा तक नहीं है. छात्र-छात्राओं को शौचालय महसूस होने पर सभी अपने-अपने घर की ओर रुख करते हैं. विद्यालय में जहां मध्याह्न भोजन बनता है वहां की छत क्षतिग्रस्त है. किस समय कौन बड़ी घटना घट जाये कोई नहीं जानता. सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इस विद्यालय का नाम कहीं भी विद्यालय परिसर में लिखा हुआ नहीं है जिससे यह पता चल सके की यह कौन सा विद्यालय है.
मिलाजुला कर शिक्षा के नाम पर इस विद्यालय में खानापूर्ति हो रही है. बुधवार को जब प्रभात खबर की टीम दोपहर 2:20 बजे विद्यालय पहुंची तो पाया मास्टर साहब स्कूल बंद कर चले गये. ग्रामीण कृष्णा यादव, रमेश कुमार, रामप्रवेश यादव, राम निवास कुमार समेत कई ग्रामीणों ने बताया कि हमने कई बार शौचालय, चापाकल के लिए हेड मास्टर साहब से बोला लेकिन वह किसी की बात नहीं सुनते अक्सर वह लेट आते हैं और दो बजे तक स्कूल बंद कर चले जाते हैं. इस बाबत बीडीओ चिरंजीव पांडे ने बताया कि इसकी जांच कर कार्रवाई की जायेगी.
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