पटना : टूटी बाउंड्री व कम शिक्षकों के सहारे आस

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 20 Jan 2020 9:36 AM

विज्ञापन

अमित कुमार बीएन कॉलेज ने नैक की मान्यता के लिए एसएसआर कर दिया है अपलोड पटना : बीएन कॉलेज ने नैक की मान्यता के लिए एसएसआर अपलोड कर दिया है और संभवत: कुछ दिनों में नैक की टीम विजिट के लिए आ सकती है. लेकिन, टूटी बाउंड्री और कम शिक्षकों के साथ सीमित संसाधनों में […]

विज्ञापन
अमित कुमार
बीएन कॉलेज ने नैक की मान्यता के लिए एसएसआर कर दिया है अपलोड
पटना : बीएन कॉलेज ने नैक की मान्यता के लिए एसएसआर अपलोड कर दिया है और संभवत: कुछ दिनों में नैक की टीम विजिट के लिए आ सकती है. लेकिन, टूटी बाउंड्री और कम शिक्षकों के साथ सीमित संसाधनों में उक्त कॉलेज को भी क्या ग्रेड मिलेगा, इस पर संशय की है. कॉलेज को सरकार की ओर से नैक को लेकर फंड देने की बात कहीं गयी थी, लेकिन एक पैसा भी कॉलेज को इसके लिए नहीं मिला.
चूंकिनैक कराना बाध्यता है और इसके बिना आगे विकास करना और भी संभव नहीं होगा. गौरतलब है कि पटना विवि समेत किसी भी कॉलेज को नेशनल एसेस्मेंट एंड एक्रेडिएशन काउंसिल (नैक) में ‘ए प्लस’ या ‘ए’ ग्रेड नहीं मिला है. पीयू को ‘बी प्लस’ मिला और साइंस कॉलेज व लॉ कॉलेज को बी ग्रेड मिला है. मगध महिला कॉलेज को भी बी प्लस मिला है. पटना कॉलेज को सी ग्रेड मिला.
शिक्षकों की भारी कमी : बीएन काॅलेज में शिक्षकों की काफी कमी है. यही वजह है कि रिसर्च का अभाव है. कॉलेज में 80 शिक्षकों के पद हैं. लेकिन, सिर्फ 43 शिक्षक ही मौजूद हैं. गेस्ट फैकल्टी से काम चलता है. वह भी पर्याप्त नहीं है. छात्रों की संख्या लगातार बढ़ी है और शिक्षकों के पद सृजित नहीं हुए हैं. कर्मचारियों की भी भारी कमी है. 50 प्रतिशत कर्मचारी से ही काम चल रहा है.
फंड का है घोर अभाव
बीएन कॉलेज में फंड का घोर अभाव है, जो पैसे नामांकन और फॉर्म की बिक्री से आते हैं, वह इतने कम होते हैं कि उससे कॉलेज की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना ही मुश्किल होता है. लेकिन, इसके बावजूद कॉलेज की ओर से लगातार कई तरह के प्रयास कर, कई जगहों से सहयोग लेकर विकास कार्यों को कराया जा रहा है.
सरकार की ओर से इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में कॉलेज के भवन को ठीक करने की दिशा में काफी काम कराया गया है. हालांकि, हॉस्टल का काम अब तक शुरू नहीं हुआ है. यह नैक में निगेटिव जा सकता है. कॉलेज में नयी सड़क बनी है. इंटर्नल लाइटिंग हुई है. साइंस ब्लॉक में भी काफी काम हुए हैं. लेकिन, लेबोरेटरी की स्थिति अभी भी बेहतर नहीं है. चारों ओर से बाउंड्री टूटी हुई है.
शिक्षकों की सीटें
विषय सीटें शिक्षकों की संख्या
राजनीति शास्त्र 7 1
इतिहास 7 1
साइकोलॉजी 4 2
अंग्रेजी 5 2
हिंदी 6 1
संस्कृत 6 2
अर्थशास्त्र 6 2
सोशोलॉजी 6 2
फिलॉसफी 3 2
उर्दू 3 1
भूगोल 5 1
जियोलॉजी 6 4
जूलोजी 6 3
केमेस्ट्री 8 6
फिजिक्स 8 3
कॉलेज प्रशासन की ओर से सीमित संसाधनों में जो किया जाना चाहिए किया जा रहा है. नैक के लिए फंड देने की बात हुई थी. लेकिन, वह नहीं मिली. कॉलेज की बाउंड्री टूटी है और उसका खर्च दो करोड़ से अधिक है. इतनी राशि अगर बाउंड्री में ही खर्च कर दी जायेगी, तो दूसरे काम कैसे होंगे. वह भी तब जब कॉलेज में फंड की काफी कमी है. हॉस्टल के लिए तो राशि भी स्वीकृत हो चुकी है. लेकिन, बिहार इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन की ओर से काम शुरू नहीं हुआ है.
प्रो राजकिशोर प्रसाद, प्राचार्य, बीएन कॉलेज
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन