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शराब का विकल्प बनीं बादाम, मासी व फोर्ड, दिल्ली व झारखंड से आ रहीं ये नशीली दवाएं

Updated at : 20 Jan 2020 6:37 AM (IST)
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शराब का विकल्प बनीं बादाम, मासी व फोर्ड, दिल्ली व झारखंड से आ रहीं ये नशीली दवाएं

आनंद तिवारी शहर में कोड वर्ड से बिक रहीं नशीली दवाएं, दो केन बियर के बराबर नशा देती है 100 एमएल की एक शीशी पटना : शराब के विकल्प के तौर पर युवा इन दिनों नशीली दवाओं का खूब इस्तेमाल कर रहे हैं. पटना इन दवाइयों की तस्करी का मुख्य केंद्र बन गया है. इस […]

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आनंद तिवारी
शहर में कोड वर्ड से बिक रहीं नशीली दवाएं, दो केन बियर के बराबर नशा देती है 100 एमएल की एक शीशी
पटना : शराब के विकल्प के तौर पर युवा इन दिनों नशीली दवाओं का खूब इस्तेमाल कर रहे हैं. पटना इन दवाइयों की तस्करी का मुख्य केंद्र बन गया है. इस कारोबार में शहर के कई लोग शामिल हैं, जिन्होंने माल सप्लाइ के लिए भाड़े पर युवकों को लगा रखा है. यही वजह है कि बड़े कारोबारी बच जाते हैं और पकड़ में सिर्फ दवाओं का सैंपल व माल सप्लाइ करने वाले लोग ही आते हैं. प्रभात खबर की टीम ने शहर के गोविंद मित्रा दवा मंडी, छापेमारी करने वाले सदस्यों, विक्रेताओं व थाने से बातचीत की तो कई बातें सामने आयीं.
गिरफ्तार अभियुक्तों से पूछताछ में पुलिस व छापेमारी टीम को पता चला है कि एक कोरेक्स की शीशी दो केन बियर के बराबर नशा देती है, इसलिए इसकी डिमांड अधिक है. वहीं, मोबाइल फोन पर बातचीत की रिकॉर्डिंग व ट्रेस से बचने के लिए खरीदार व नशेड़ी युवक नशीली दवाओं को कोड के नाम से मांगते हैं. जैसे कि अगर कैप्सूल लेना हो, तो उसे बादाम कहा जाता है. अगर कोरेक्स की शीशी लेनी हो तो मासी व फेंसाडील को फोर्ड के कोड नाम से बेचा व खरीदा जाता है. महंगी कीमत पर युवाओं को बेचा जाता है. कई बार पुलिस ने निजी वाहनों से भी नशीली दवाओं की खेप बरामद की है.
दिल्ली व झारखंड से आ रहीं दवाएं
पटना में नशीली दवाएं दिल्ली व झारखंड से मंगायी जा रही हैं. इसका खुलासा पीरबहोर थाना क्षेत्र की सात दुकानों में 21 नवंबर व नौबतपुर के मोतीपुर गांव स्थित ब्रह्मदेव साव की दुकान में छापेमारी के दौरान हुआ. जानकारों की मानें, तो कुछ ड्रग इंस्पेक्टरों की मिलीभगत से बड़े कारोबारी यह धंधा कर रहे हैं और बाहर रहकर अपने आदमी को छुड़वाने के प्रयास में लगे रहते हैं.
इन्होंने लगाया थाने में आरोप : ब्रांड प्रोटेक्शन सर्विसेज लिमिटेड के निदेशक मुस्तफा हुसैन ने बताया कि शराब के विकल्प के रूप में युवा नशे के लिए प्रतिबंधित दवाइयों का इस्तेमाल कर रहे हैं. औषधि विभाग के कुछ ड्रग इंस्पेक्टरों की मिलीभगत से दिल्ली, झारखंड व कोलकाता से नशीली दवाएं बिहार में पहुंच रही हैं.
एसएसपी ने कहा
नकली व नशीली दवाओं के कई कारोबारियों को पटना पुलिस पकड़ चुकी है. कुछ बड़े दवा माफिया टारगेट पर हैं, जिनकी तलाशी की जा रही है. प्रतिबंधित दवाएं मार्केट में नहीं पहुंचे, इसके लिए सभी थानों को अलर्ट किया गया है. फरार अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए अभियान चलाया जा रहा है, जल्द हीमुख्य आरोपित पुलिस के शिकंजे में होगा.
उपेंद्र शर्मा, एसएसपी पटना
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