पटना : छह साल में भी डायल-112 के लिए नहीं मिल पायी है जगह
Updated at : 30 Dec 2019 8:42 AM (IST)
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कौशिक रंजन सिर्फ बिहार में ही अब तक शुरू नहीं हो पायी यह योजना पटना : पूरे देश को झकझोर देने वाला निर्भया कांड नयी दिल्ली में 2012 में घटा था. इसके बाद पूरे देश में महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक समेकित इमरजेंसी हेल्प लाइन नंबर डायल-112 शुरू करने की योजना तैयार की गयी […]
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कौशिक रंजन
सिर्फ बिहार में ही अब तक शुरू नहीं हो पायी यह योजना
पटना : पूरे देश को झकझोर देने वाला निर्भया कांड नयी दिल्ली में 2012 में घटा था. इसके बाद पूरे देश में महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक समेकित इमरजेंसी हेल्प लाइन नंबर डायल-112 शुरू करने की योजना तैयार की गयी थी.
बिहार समेत सभी राज्यों में 2013 से इसकी कवायद शुरू की गयी, परंतु पूरे देश में बिहार ही एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां अब तक इसकी कोई पहल तक नहीं हुई है. केंद्र ने निर्भया फंड से करीब 13 करोड़ रुपये भी दिये थे, जो खर्च नहीं होने के कारण आगे का आवंटन नहीं मिला. छह साल में सूबे का गृह विभाग और पुलिस महकमा जमीन तक नहीं खोज पायी है. इसके लिए आठ हजार 640 वर्गफुट जगह की जरूरत है. डायल-112 को स्थापित और मॉनीटरिंग करने के लिए एडीजी (आधुनिकीकरण) को नोडल नियुक्त किया गया है.
जमीन खोजने के लिए कई स्थानों को देखा गया, लेकिन इतनी जगह नहीं मिली. कुछ महीने पहले नवनिर्मित पुलिस मुख्यालय के बी-ब्लॉक के पांचवें तल पर दो बड़े हॉल का चयन किया गया था. यह जगह तो पर्याप्त थी, लेकिन यहां इसके कॉल सेंटर को खोलने की अनुमति नहीं दी गयी. राजीव नगर में इसके लिए अलग भवन बनाने को 35 हजार वर्गफुट जमीन चिह्नित की गयी है, लेकिन हॉउसिंग बोर्ड की इस जमीन पर अभी तक बोर्ड ने अंतिम स्तर पर अनुमति नहीं दी है. इसके बाद अब विकल्प के रूप में बिस्कोमान तथा कुछ अन्य स्थानों में जगह की तलाश की जा रही है. बिस्कोमान में इसके लिए अच्छा खासा रेंट भी लगेगा.
इस तरह से काम करेगी यह सेवा
किसी समय यहां आने वाली किसी कॉल से परिस्थिति का जायजा लेने के बाद इसे तुरंत पास के थाने या सबसे नजदीकी पुलिस पेट्रोलिंग वैन में डायवर्ट हो जायेगा. कॉल मिलने के बाद घटनास्थल तक पुलिस शहरी इलाकों में 15 मिनट और ग्रामीण इलाकों में 20 मिनट में पहुंच जायेगी. इसके बाद संबंधित व्यक्ति को उसके पास पहुंचने वाले पुलिसकर्मी का मोबाइल और गाड़ी का नंबर एसएमएस से मिल जायेगा. पूरे कॉल और इस पर होने वाली कार्रवाई का रिकॉर्ड केस रिकॉर्ड मैनेजमेंट के तौर पर रखा जायेगा.
तीन शिफ्टों में यहां करेंगे 90 लोग काम
डायल-112 में चौबीस घंटे काम करने के लिए 90 लोगों की टीम तीन टीम तीन शिफ्टों में काम करेगी. यहां 24 घंटे काम होने के कारण कॉल सेंटर के अलावा यहां कैंटीन, क्रेच, चेंजिंग रूम व पार्किंग समेत अन्य सभी सुविधाएं बहाल की जायेंगी. इसलिए काफी पर्याप्त जगह की आवश्यकता है.
यह सेवा राज्य में शुरू हो जायेगी
सरकार इसे लेकर पूरी तरह से प्रयासरत है. जल्द ही यह सेवा राज्य में शुरू हो जायेगी.
आमिर सुबहानी, अपर मुख्य सचिव, गृह विभाग
इसके कॉल सेंटर में 90 लोगों को बैठने के लिए आठ हजार 640 वर्गफुट जगह की है जरूरत
2012 में निर्भया कांड के बाद 2013 में केंद्र सरकार ने सभी राज्यों में इसे स्थापित करने का लिया था निर्णय
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