पटना : सीएए-एनआरसी के लिए देश तैयार नहीं
Updated at : 23 Dec 2019 6:51 AM (IST)
विज्ञापन

‘सीएए-एनआरसी दावे, साजिश और चुनौतियां’ विषय पर वक्ताओं के विचार पटना : जनशक्ति प्रेस में आज ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन द्वारा सीएए-एनआरसी मसले पर चर्चा का आयोजन किया गया. ‘सीएए-एनआरसी दावे, साजिश और चुनौतियां’ विषय पर आयोजित इस चर्चा में मुख्य वक्ता प्रसिद्ध अर्थशास्त्री व एएन सिन्हा समाज अध्ययन संस्थान के पूर्व निदेशक प्रो डीएम […]
विज्ञापन
‘सीएए-एनआरसी दावे, साजिश और चुनौतियां’ विषय पर वक्ताओं के विचार
पटना : जनशक्ति प्रेस में आज ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन द्वारा सीएए-एनआरसी मसले पर चर्चा का आयोजन किया गया. ‘सीएए-एनआरसी दावे, साजिश और चुनौतियां’ विषय पर आयोजित इस चर्चा में मुख्य वक्ता प्रसिद्ध अर्थशास्त्री व एएन सिन्हा समाज अध्ययन संस्थान के पूर्व निदेशक प्रो डीएम दिवाकर ने कहा कि लोकतंत्र में जनता सबसे ऊपर है.
जनता को ध्यान में रख कर ही कोई अधिनियम बनाया जाना चाहिए. मौजूदा सीएए को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि यह कानून भारत के संविधान की मूल आत्मा को आघात पहुंचाता है. उन्होंने कहा कि भारत का संविधान किसी भी धर्म के साथ भेदभाव कर कानून बनाने की इजाजत नहीं देता. सीएए और एनआरसी को जोड़ कर देखने पर पूरा परिदृश्य साफ समझ आता है.
आसाम में तीन करोड़ लोगों का एनआरसी हुआ, जिसमें 19 लाख लोग उस लिस्ट से बाहर हो गये. इनमें अधिकांश बहुसंख्यक ही हैं. प्रो दिवाकर ने कहा कि मौजूदा केंद्र सरकार ने नोटबंदी के वक्त भी बड़ी-बड़ी बातें कहीं थी, लेकिन परिणाम सबको पता है. खास कर ऐसे वक्त में जब अर्थव्यवस्था की हालत काफी खस्ता है. बीपीसीएल, बीएसएनएल, एयर इंडिया जैसे 28 बड़ी कंपनियों को बेचने की तैयारी है. 50 रेलवे स्टेशन व 150 ट्रेनों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी है. एनआरसी कराने के लिए सरकार इतना पैसा कहां से लायेगी.
उन्होंने कहा कि एक लाख, 76 हजार करोड़ रिजर्व फंड रिजर्व बैंक से निकाल कॉरपोरेट घरानों को सरकार ने दे दिया है. अर्थव्यवस्था को सुधार के हर प्रयास फेल हो रहे हैं. देश की अवाम का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे मुद्दे को ला रही है ताकि इसमें अवाम फंसी रहे और उसकी विफलताओं की तरफ ध्यान नहीं जाये. पूरे मसले को उन्होंने गांव से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक एक साथ देखने की अपील छात्रों से करते हुए कहा कि राष्ट्रभक्त सरकार ने रक्षा में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का निर्णय लिया है.
इन्होंने ने भी रखे विचार : हाइकोर्ट के वरीय अधिवक्ता मदन प्रसाद सिंह, पटना यूनिवर्सिटी एलएलएम के छात्र अमित कुमार सिंह, गोपाल कृष्ण, विजय नारायण मिश्रा, एआइएसएफ के राष्ट्रीय सचिव सुशील कुमार, पूर्व महासचिव विश्वजीत कुमार, इरफान अहमद,डीपी यादव, कारू प्रसाद, आइसा के राज्य अध्यक्ष मोख्तार, एसएफआइ के राज्य सचिव मंडल सदस्य पंकज वर्मा, अनीश अंकुर, भाग्य भारती, प्रिया कुमारी,मुश्ताक राहत, जन्मेजय कुमार,अक्षय कुमार, महेश कुमार,मनीष कुमार, कुंदन कुमार, तौसीक आलम,गौरव, आनंद, रामजी यादव, रश्मि, अदनान इमरान, निशि, विपिन कुमार आदि ने भी अपने विचार रखे.
पटना : निजी स्वार्थों को लेकर हो रहा विरोध : मुरलीधर
पटना : भारतीय नृत्य कला मंदिर पटना में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर संगोष्ठी का आयोजन किया गया. चित्ति की ओर से आयोजित संगोष्ठी में सीमा जागरण मंच के राष्ट्रीय सह संयोजक सी मुरलीधर ने कहा कि एनआरसी व सीएए पर विरोध अनायास नहीं है, बल्कि एक साजिश के तहत और स्वार्थों की पूर्ति के लिए देश को अस्थिर करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है. भारत की आजादी के साथ जो दुर्भाग्य अपने से जुड़ा हुआ था, 72 वर्षों के बाद अब दूर हो रहा है. केंद्र सरकार द्वारा लिए जा रहे निर्णय का भी कुछ लोग अपने स्वार्थों के लिए विरोध कर रहे हैं.
प्रदर्शन की आड़ में हो रहे हमले : कृष्णकांत ओझा : इससे पूर्व चित्ति के प्रांत संयोजक कृष्ण कांत ओझा ने विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का हवाला देकर सरकारी संपत्तियों को नुकसान किया जा रहा है.
पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला किया जा रहा है. कार्यक्रम की अध्यक्षता इस्लामिक विद्वान मौलाना तुफैल अहमद कादरी ने की. मंच पर दलित महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बबन रावत, साहित्यकार डॉ शत्रुघ्न प्रसाद, सरदार मनप्रीत सिंह, मौलाना शमीम रिजवी और अल्तमस बिहारी भी उपस्थित थे.
भाजपा शासित प्रदेशों में ही विरोध क्यों
प्रज्ञा प्रवाह के क्षेत्र संयोजक रामाशीष सिंह ने नागरिकता संशोधन कानून व एनआरसी के संदर्भ ने कहा कि विरोध सिर्फ भाजपा शासित राज्यों में क्यों हो रहा है?
छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में नहीं किया जा रहा है, जबकि वहां भी बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक रहते हैं. लेकिन, वहां इस तरह की कोई हिंसा नहीं हो रही है. इस हिंसा को कांग्रेस के अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा दो-दो हाथ कर लेने के बयान के संदर्भ में देखने की बात भी उन्होंने कही.
इससे तस्वीर स्पष्ट हो जाती है कि इस हिंसा का खुला समर्थन देने वाले कौन लोग हैं? उन्होंने कहा कि हाल ही में पाकिस्तान के पीएम द्वारा भारतीय मुसलमानों को लेकर दिये गये बयान को पढ़ना चाहिए. इससे वहां के लोगों को जो एनआरसी और सीएए का विरोध कर रहे हैं, उनकी आंखें खुल जायेंगी.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




