उदासीनता: दुष्कर्म पीड़िताओं को तीन माह में न्याय दिलाना बिहार में चुनौती
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 24 Nov 2019 1:29 AM
पटना: बालिग या नाबालिग महिलाओं से संबंधित अपराधों खासकर दुष्कर्म से जुड़े मामलों में बिहार का देश में भले ही 23वां स्थान है. परंतु राज्य में पिछले पांच सालों में इस तरह की घटनाओं में दुष्कर्म पीड़ित बालिग या नाबालिग लड़कियों या महिलाओं को तीन महीने में न्याय नहीं मिलता है. जबकि नियम है कि […]
पटना: बालिग या नाबालिग महिलाओं से संबंधित अपराधों खासकर दुष्कर्म से जुड़े मामलों में बिहार का देश में भले ही 23वां स्थान है. परंतु राज्य में पिछले पांच सालों में इस तरह की घटनाओं में दुष्कर्म पीड़ित बालिग या नाबालिग लड़कियों या महिलाओं को तीन महीने में न्याय नहीं मिलता है. जबकि नियम है कि इस तरह के किसी मामले में खासकर नाबालिग से जुड़े मामलों में पॉक्सो (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस) एक्ट के तहत तीन महीने में स्पीडी ट्रायल चलाकर आरोपी को सजा देनी है. अभी राज्य में लंबित पड़े मामलों की संख्या करीब डेढ़ लाख है. इसमें रेप से जुड़े मामलों की संख्या छह से सात प्रतिशत है. कुछ मामले तो कई साल से लंबित हैं. सिर्फ पॉक्सो से जुड़े मामलों की बात करें, तो 2018 से अगस्त, 2019 तक राज्य में 3,369 मामले दर्ज किये गये. इसमें लंबित मामलों की संख्या 2,194 है.
समय पर चार्जशीट नहीं देने से मिल रही जमानत
पॉक्सो मामलों में चार्जशीट दायर करने की बात करें, तो 2018 में राज्य में दो हजार 94 मामले पॉक्सो के तहत दर्ज किये गये, जिसमें सिर्फ 924 में ही चार्जशीट जमा किये गये. इसी तरह 2019 में जनवरी से अगस्त तक एक हजार 275 मामले दर्ज किये गये हैं, जिसमें सिर्फ 515 में ही चार्जशीट दायर किये गये हैं. पुलिस की तरफ से समय पर चार्जशीट दायर नहीं करने के कारण बड़ी संख्या में इसके आरोपितों को जमानत मिल जा रही है. सिर्फ निर्धारित समयसीमा में चार्जशीट दायर नहीं करने की वजह से पॉक्सो जैसे बेहद सख्त कानून में भी अधिकतम 90 दिन में आरोपित को जमानत मिल जा रही है.
समय पर नहीं मिलता न्याय
बाल कानून मामलों के विशेषज्ञ केडी मिश्रा के अनुसार, पॉक्सो जैसे सख्त कानून में भी अपराधियों को बेल मिलने के कारण भी बच्चियों के प्रति रेप जैसे अपराध की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है. इसके मुख्य कारणों में 90 दिन के अंदर चार्जशीट दायर नहीं होना है. र्जशीट दायर होने के बाद प्राथमिकता के आधार पर स्पीडी ट्रायल का नहीं होना है. चिल्ड्रेन या पॉक्सो कोर्ट के जज के पास दूसरे अन्य कोर्ट का प्रभार होने के कारण भी इन मामलों की सुनवाई समय पर नहीं हो पाती है. मसलन पटना में ही पॉक्सो मामलों की सुनवाई करने वाले एडीजी-1 के पास निगरानी कोर्ट का भी अतिरिक्त प्रभार है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










