फर्जी डॉक्टर ने खोल रखी थी युवाओं को नशे की लत लगाने की क्लिनिक

Updated at : 11 Nov 2019 5:17 AM (IST)
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फर्जी डॉक्टर ने खोल रखी थी युवाओं को नशे की लत लगाने की क्लिनिक

पटना : पाटलिपुत्र थाने के इंदिरा नगर नाले पर इलाके में छात्रों और युवकों को नशे का इंजेक्शन देने का गोरखधंधा चल रहा था. उन्हें ड्रग एडिक्ट बना कर मुंहमांगी कीमत वसूली जा रही थी. इसका खुलासा उस समय हुआ, जब पाटलिपुत्र पुलिस को नशा दिये जाने का एक वीडियो किसी ने दे दिया. इसके […]

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पटना : पाटलिपुत्र थाने के इंदिरा नगर नाले पर इलाके में छात्रों और युवकों को नशे का इंजेक्शन देने का गोरखधंधा चल रहा था. उन्हें ड्रग एडिक्ट बना कर मुंहमांगी कीमत वसूली जा रही थी.

इसका खुलासा उस समय हुआ, जब पाटलिपुत्र पुलिस को नशा दिये जाने का एक वीडियो किसी ने दे दिया. इसके बाद पुलिस ने औषधि नियंत्रक विभाग की टीम की मदद ली और खुद को डॉक्टर होने का दावा करने वाले शख्स शैलेंद्र कुमार के इंदिरा नगर नाले पर स्थित क्लिनिक में छापेमारी की. यहां से पुलिस ने बुप्रनॉरफीन इंजेक्शन, एमरॉक्स-एल व अन्य दवाओं को बरामद करने के साथ ही शैलेंद्र कुमार को पकड़ लिया.
शैलेंद्र कुमार कई दिनों से अशोक सिंह के मकान में कमरा लेेकर क्लिनिक चला रहा था और डॉक्टर होने का बोर्ड भी लगा रखा था. वह मसौढ़ी के नदौल के बैरमचक का मूल निवासी है. शैलेंद्र के खिलाफ औषधि निरीक्षक रंजन कमार ने लिखित शिकायत दी है और उसके आधार पर ही प्राथमिकी दर्ज की गयी है. पाटलिपुत्र थानाध्यक्ष केपी सिंह ने बताया कि आरोपित को जेल भेज दिया गया है.
यह फर्जी डॉक्टर है और छात्रों व युवकों को नशे का इंजेक्शन देने का धंधा अपने क्लिनिक पर कर रहा था. औषधि निरीक्षक रंजन कुमार ने बताया कि शैलेंद्र कुमार ने अपने क्लिनिक में बीएमएस होने का बोर्ड भी लगा रखा रखा था. लेकिन, उसने फिलहाल कोई डिग्री प्रस्तुत नहीं की है.
शैलेंद्र पहले नशा विमुक्ति केंद्र का स्टाफ था : जानकारी के अनुसार शैलेंद्र कुमार एक नशा विमुक्ति केंद्र में स्टाफ था.
वहां उसने काफी दिनों तक काम किया और फिर अपनी क्लिनिक खोल ली. अगर अचानक अगर किसी नशेड़ी को नशा नहीं मिलेगा, तो उनकी जान भी जा सकती है. शैलेंद्र कुमार ने यह सारी ट्रिक सीख ली और नौकरी छोड़ने के बाद केंद्र पर रखे जाने वाले नशे के इंजेक्शन की व्यवस्था करके छात्रों, युवकों, टेंपो चालको आदि को देकर मुंहमांगी कीमत वसूलना शुरू कर दिया.
नहीं मिली डिग्री और न ही लाइसेंस
इस पूरे मामले की जांच औषधि नियंत्रक विभाग के ड्रग इंस्पेक्टर रंजन कुमार और पंकज कुमार वर्मा की टीम ने की. इस टीम ने शैलेंद्र से पूछताछ की और साथ ही उसके क्लिनिक को भी खंगाला. अब तक की जांच में टीम को न तो शैलेंद्र के डॉक्टर होने की कोई डिग्री मिली और न ही क्लिनिक से बरामद दवाओं को बेचने का लाइसेंस मिला. इधर, पुलिस टीम इसके कनेक्शन को खंगाल रही है. नशे वाला इंजेक्शन यह कहां से लाता था, इसकी जांच की जा रही है.
चार से पांच सौ रुपये लेता था
बताया जाता है कि एक नशे के इंजेक्शन की कीमत मात्र 20-30 रुपये होती है. लेकिन इस इंजेक्शन को देने के लिए शैलेंद्र कुमार चार-पांच सौ रुपये लेता था. कई लोग इन नशे के इंजेक्शन के एडिक्ट हो चुके थे और पैसे देकर हमेशा नशे का इंजेक्शन लेते थे.
जिससे शैलेंद्र कुमार की अच्छी कमाई हो जाती थी. इसी बीच पाटलिपुत्र पुलिस को एक वीडियो मिला, जिसमें एक टेंपो चालक खुद ही इंजेक्शन ले रहा था. इसके बाद पुलिस ने जब जांच की, तो शैलेंद्र कुमार का नाम सामने आ गया और फिर औषधि नियंत्रक विभाग की टीम की मदद से उसके क्लिनिक में छापेमारी की गयी.
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