पटना :जागरूकता बढ़ी तो घट गये पटाखों से जलने के मामले

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 29 Oct 2019 9:27 AM

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पटना : जागरूकता बढ़ने के कारण पटाखों से जलने के मामलों में काफी कमी आयी है. पिछले साल की तुलना में मरीजों की संख्या में पचास फीसदी से ज्यादा की कमी आयी है. राज्य के सबसे बड़े अस्पताल पीएमसीएच और आइजीआइएमएस से लेकर निजी अस्पतालों में पटाखे से जलने के बेहद कम मामले आये. पीएमसीएच […]

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पटना : जागरूकता बढ़ने के कारण पटाखों से जलने के मामलों में काफी कमी आयी है. पिछले साल की तुलना में मरीजों की संख्या में पचास फीसदी से ज्यादा की कमी आयी है. राज्य के सबसे बड़े अस्पताल पीएमसीएच और आइजीआइएमएस से लेकर निजी अस्पतालों में पटाखे से जलने के बेहद कम मामले आये. पीएमसीएच में जहां इमरजेंसी में एक भी मरीज बर्न के कारण नहीं भर्ती हुआ, वहीं ओपीडी में 32 मामले मामूली जलने के सामने आये. जबकि पिछले साल पटाखों से झुलसने वाले 10 मरीज पीएमसीएच के बर्न वार्ड में भर्ती हुए थे.
आइजीआइएमएस की बात करें तो वहां भी केवल दो माइनर मामले ही इमरजेंसी में पहुंचे जबकि पिछले साल एक दर्जन मरीज पटाखों से जलकर आये थे. आइजीआइएमएस के इमरजेंसी और ट्रॉमा की असिस्टेंड प्रोफेसर डॉ रितु सिंह ने बताया कि बर्न के बड़े मामले को तो हम वैसे भी पीएमसीएच ही ट्रांसफर करते हैं, लेकिन एक भी मरीज वैसे नहीं आये जो पटाखों से जलने के कारण गंभीर हों.
दो माइनर मामले आये, जिसे कुछ मिनटों में ही ठीक कर वापस घर भेज दिया गया. बड़े अस्पतालों की राह पर छोटे शहरी अस्पताल भी रहे. न्यू गार्डिनर और गर्दनीबाग अस्पताल में इमरजेंसी में बर्न के मेजर केस नहीं मिले. न्यू गार्डिनर अस्पताल के वरीय चिकित्सक डॉ एससी झा ने बताया कि रविवार की रात एक मामला आया था, गर्दनीबाग अस्पताल में ओपीडी में एक मामला पटाखे से जलने के कारण सामने आया.
प्राइवेट अस्पतालों में भी पटाखों से जलने के केस काफी कम आये. अपोलो बर्न अस्पताल में रविवार की रात से सोमवार की दोपहर तक कुल 14 केस आये. राजेश्वर अस्पताल में एक भी मामला नहीं दर्ज हुआ और सहयोग अस्पताल में केवल दो मरीज भर्ती हुए थे.
पटाखों से जलने के मामलों में काफी कमी आयी है, एक भी मरीज पीएमसीएच की इमरजेंसी में जलने के कारण नहीं भर्ती हुआ . यह स्पष्ट है कि लोगों में जागरूकता के बाद यह बदलाव देखने को मिला है. ऐसे ही जागरूकता का प्रसार होता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब एक भी मामला पटाखों से जलने का सामने नहीं आ सकेगा.
-डॉ अभिजीत सिंह, इमरजेंसी इंचार्ज, पीएमसीएच.
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