नाले की सफाई में बहाये छह करोड़, अब कर रहे मशक्कत

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 03 Oct 2019 7:16 AM

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पटना : नगर निगम में अंचलों की संख्या छह है. इन अंचलों के बड़े-छोटे और भूगर्भ नालों की सफाई पर एक-एक करोड़ रुपये आवंटित किये गये. अंचल अधिकारियों ने नाले की सफाई पर पानी की तरह पैसा बहाया गया. वहीं, बुडको प्रशासन ने संप हाउसों के मेंटेनेंस पर करोड़ों रुपये खर्च किये. लेकिन, झमाझम बारिश […]

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पटना : नगर निगम में अंचलों की संख्या छह है. इन अंचलों के बड़े-छोटे और भूगर्भ नालों की सफाई पर एक-एक करोड़ रुपये आवंटित किये गये. अंचल अधिकारियों ने नाले की सफाई पर पानी की तरह पैसा बहाया गया. वहीं, बुडको प्रशासन ने संप हाउसों के मेंटेनेंस पर करोड़ों रुपये खर्च किये. लेकिन, झमाझम बारिश हुई, तो भयंकर जलजमाव हो गया. सिर्फ नाले की सफाई में छह करोड़ रुपये गटकने के बाद अब अधिकारी पानी निकालने में मशक्कत कर रहे हैं.

नाला जाम व संप फेल होने से बनी समस्या : कंकड़बाग अंचल में न्यू बाइपास नाला की लंबाई करीब पांच किलोमीटर है. सफाई पर 90 लाख रुपये खर्च हुए. मैनहोल की सफाई ठीक से नहीं हुई. मोटर की जांच नहीं की गयी. खराब मोटर व ट्रांसफॉर्मर को बनाने के लिए कोलकाता से तकनीशियन आये. मंगलवार शाम से मोटर चालू किये गये.
नाले की सफाई में की गयी कोताही : बांकीपुर अंचल में बड़ा नाला सिर्फ सैदपुर नहर है, जिसकी लंबाई करीब साढ़े पांच किमी है. सफाई पर एक करोड़ रुपये खर्च हुए. सफाई में कोताही की गयी. ध्वस्त बाउंड्री ठीक नहीं की गयी. पानी उल्टा मुहल्ले में पहुंचने लगा. संप हाउस के भीतर पानी घुस गया. बिजली आपूर्ति ठप हो गयी. चार दिनों तक मोटर चली ही नहीं. इससे राजेंद्र नगर सहित दर्जनों मुहल्लों में जल स्तर बढ़ता चला गया.
सफाई पर किया खर्च, पर नाला नहीं हुआ दुरुस्त : पाटलिपुत्र अंचल में कुर्जी, राजीव नगर और आनंदपुरी बड़े नाले हैं, जिनकी लंबाई करीब 20 किलोमीटर है. वहीं, छोटे व भूगर्भ नाले की लंबाई 50 किलोमीटर है. सफाई पर एक करोड़ खर्च किये गये. लेकिन, आर ब्लॉक-दीघा फोर लेन सड़क बनने से बंद नालों को दुरुस्त नहीं किया. इससे नाले का बहाव अवरुद्ध हो गया.
क्या जिम्मेदार पर होगी कार्रवाई
नाले की सफाई की जिम्मेदारी अंचल स्तर पर कार्यपालक पदाधिकारियों व सिटी मैनेजरों की है. वहीं, मुख्यालय स्तर पर निगरानी की जिम्मेदारी अपर नगर आयुक्त(सफाई) की है. लेकिन, किसी अधिकारी ने अपनी जिम्मेदारी सही से नहीं निभायी. पीड़ित सवाल उठा रहे हैं कि अंचल से लेकर मुख्यालय स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी.
नाला उड़ाही पर पांच वर्षों में खर्च
2019 ‍ 6 करोड़
2018 7.5 करोड़
2017 7.13 करोड़
2016 4.5 करोड़
2015 4 करोड़
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