पटना : अब पुलिस से बच नहीं सकेंगे अपराधी, लंबित केसों को निबटाने के लिए बनाया गया सेंट्रल इन्वेस्टिगेशन रूम
Updated at : 05 Sep 2019 8:45 AM (IST)
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पटना : अपराधियों को चार्जशीट समय पर नहीं जमा होने पर जो लाभ मिलता था, अब वह नहीं मिलेगा. केसों के फाइलों से दबे अनुसंधानकर्ता समय पर अनुसंधान रिपोर्ट या चार्जशीट नहीं जमा कर पाते थे और इसका लाभ उठाते हुए अपराधी न्यायालय से जमानत ले लेते थे. लंबित केसों के त्वरित निष्पादन के लिए […]
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पटना : अपराधियों को चार्जशीट समय पर नहीं जमा होने पर जो लाभ मिलता था, अब वह नहीं मिलेगा. केसों के फाइलों से दबे अनुसंधानकर्ता समय पर अनुसंधान रिपोर्ट या चार्जशीट नहीं जमा कर पाते थे और इसका लाभ उठाते हुए अपराधी न्यायालय से जमानत ले लेते थे.
लंबित केसों के त्वरित निष्पादन के लिए सिटी एसपी मध्य विनय कुमार तिवारी ने एक नया तरीका निकाला है. यह फिलहाल बिहार में पहला प्रयोग है. सिटी एसपी ने अपने कार्यालय के बगल में ही बने हॉल में सेंट्रल इन्वेस्टिगेशन टीम (सीआइआर) का गठन कर दिया है.
इस हॉल में एक बार में एक थाने के अनुसंधानकर्ताओं के साथ ही डीएसपी व थानाध्यक्ष के बैठने की व्यवस्था की गयी है. उन्हें केसों की तमाम फाइलों, साक्ष्य व अभिलेखों को वहां लेकर उपस्थित होने को कहा गया है.
ताकि वे अपने केस का अनुसंधान कर सके और वहां मौजूद थानाध्यक्ष व डीएसपी भी अपनी कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए फाइल को चार्जशीट तक पहुंचा दें. यह व्यवस्था शुरू हो गयी है और सुबह में शास्त्रीनगर थाना और दिन में गांधी मैदान थाना पुलिस की पूरी टीम को बुलाया कर केसों का निष्पादन कराया गया. इसके साथ ही सिटी एसपी ने डीएसपी, थानाध्यक्ष व अनुसंधानकर्ताओं की टाइमिंग भी फिक्स कर दी है. डीएसपी को कम से कम दो घंटे, थानाध्यक्ष को चार घंटे व अनुसंधानकर्ताओं को छह घंटे रह कर लंबित मामलों का निष्पादन करने का निर्देश दिया गया है. खास बात यह है कि सिटी एसपी मध्य भी एक घंटे वहां मौजूद रहेंगे. इसके साथ ही यह कार्यकलाप 24 घंटे चलेगा.
तीन तरह के रजिस्टर इन्वेस्टिगेशन रूम में : इंवेस्टिगेशन रूम में तीन तरह के रजिस्टर होंगे. जिसमें बेसिक अटेंडेंस रजिस्टर, इंवेस्टिगेशन डायरी व वर्क रजिस्टर शामिल हैं. इंवेस्टिगेशन डायरी में अनुसंधानकर्ता अपने-अपने केस, की गयी कार्रवाई और आने वाले दिनों की कार्रवाई का जिक्र करेंगे. जबकि वर्क रजिस्टर में सहायक थानाध्यक्ष अनुसंधानकर्ताओं की किसी भी केस में की गयी कार्रवाई को विस्तार से अंकित करेंगे.
समय पर जमा होगा केस का चार्जशीट, अपराधियों को नहीं मिल पायेगी जमानत
क्या कहते हैं सिटी एसपी मध्य
लोग उनसे इस बात की शिकायत करने आते हैं कि उनके केस में अनुसंधान नहीं हुआ है और न ही किसी की गिरफ्तारी हुई है. इस पर वे संबंधित थानाध्यक्ष को केस की जानकारी दे देते थे. लेकिन किसी में कार्रवाई होती थी तो किसी में नहीं. वे खुद भी भूल जाते थे. लेकिन अब सब व्यवस्थित तरीके से कराया जा रहा है, ताकि केस में कार्रवाई हो सके.
इसके साथ ही यह व्यवस्था कर दी गयी है कि उन्हें हर केस के लिए रजिस्टर में इंट्री करनी है और उसमें क्या कार्रवाई की गयी, उसे भी अंकित करना है. इससे कोई भी पुलिस पदाधिकारी मुकर नहीं सकते हैं.
विनय कुमार तिवारी, सिटी एसपी मध्य
केसों के बोझ से मिलेगी निजात
इस व्यवस्था के दौरान पुलिस टीम के अधिकारी एक साथ रहेंगे और अनुसंधानकर्ता अपनी जांच रिपोर्ट लिखेंगे. इससे यह फायदा होगा कि अगर कहीं कुछ कमी पायी जायेगी तो वे वरीय अधिकारियों से जानकारी भी तुरंत ले सकेंगे.
अगर कोई केस बड़ा होगा और कई आरोपित होंगे तो उन्हें पकड़ने के लिए तुरंत ही विशेष टीम का गठन कर दिया जायेगा ताकि आरोपितों को पकड़ने में आसानी होगी. यह व्यवस्था इसलिए की गयी है ताकि अनुसंधानकर्ता को कम परेशानी हो. इसके साथ ही इस बात के भी जांच की व्यवस्था की गयी है कि अनुसंधानकर्ता किसी अभिलेख को छुपा नहीं लें. इसके लिए सादे वेश में पुलिस टीम उनके घर का भी किसी समय निरीक्षण कर सकती है. बताया जाता है कि सिटी एसपी मध्य के अंतर्गत पड़ने वाले थानों में करीब आठ हजार से अधिक केस लंबित हैं.
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