बिहार में अब तक 80 प्रतिशत से अधिक क्षेत्रों में हुई धान की रोपनी

Updated at : 23 Aug 2019 8:17 AM (IST)
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बिहार में अब तक 80 प्रतिशत से अधिक क्षेत्रों में हुई धान की रोपनी

सूखे का खतरा अब भी है प्रदेश में बरकरार पटना : राज्य में अब तक 80 प्रतिशत से ज्यादा क्षेत्रों में धान की रोपनी हुई है. वहीं, मक्का की खेती 91.48 प्रतिशत क्षेत्र में की गयी है. इसके अलावा राज्य में धान रोपनी का लक्ष्य 33 लाख हेक्टेयर क्षेत्र निर्धारित है, जिसके विरुद्ध 26,56,252 हेक्टेयर […]

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सूखे का खतरा अब भी है प्रदेश में बरकरार
पटना : राज्य में अब तक 80 प्रतिशत से ज्यादा क्षेत्रों में धान की रोपनी हुई है. वहीं, मक्का की खेती 91.48 प्रतिशत क्षेत्र में की गयी है. इसके अलावा राज्य में धान रोपनी का लक्ष्य 33 लाख हेक्टेयर क्षेत्र निर्धारित है, जिसके विरुद्ध 26,56,252 हेक्टेयर क्षेत्रों में ही धान की रोपनी हो पायी है.
इसी प्रकार किसानों द्वारा 4,24,500 हेक्टेयर में निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध मक्का 3,88,317 हेक्टेयर क्षेत्रों में लगाया गया है. गुरुवार को कृषि मंत्री डॉ प्रेम कुमार ने इसकी जानकारी साझा की. वहीं दूसरी तरफ रोपनी 80 फीसदी होने के बाद भी राज्य में सूखे का खतरा कम नहीं हो रहा है. कृषि विभाग के अधिकारिक सूत्र बताते हैं िक रोपनी के बाद अगर बारिश नहीं हुई, तो कई जिलों में धान के फसल सूख जायेंगे.
कहां कितनी हुई है धान की रोपाई राज्य के कुल 12 जिलों मसलन भोजपुर, रोहतास, भभुआ, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, खगड़िया, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, किशनगंज, अररिया तथा कटिहार में 90 प्रतिशत से ज्यादा क्षेत्रों में धान की रोपनी हुई है. नौ िजलों यानी बक्सर, अरवल, सारण, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, समस्तीपुर तथा पूर्णिया में 80-90 प्रतिशत क्षेत्रों में धान की रोपनी हुई है.
जबकि औरंगाबाद, सीवान, पश्चिमी चंपारण तथा दरभंगा सहित कुल 4 जिलों में 70-80 प्रतिशत तक ही रोपनी हो पायी है. इसके अलावा राज्य के 11 जिलों पटना, नालंदा, गया, जहानाबाद, वैशाली, बेगूसराय, लखीसराय, जमुई, भागलपुर, शेखपुरा और बांका जिले में 50-70 प्रतिशत धान की रोपनी की गयी है. राज्य के मात्र 2 जिलों नवादा तथा मुंगेर में 50 प्रतिशत से कम धान की रोपनी हो पायी है.
कब सूखा घोषित होता है क्षेत्र
किसी भी क्षेत्र को सूखा घोषित करने के लिए वहां की पैदावार 33 फीसदी या उससे कम होनी चाहिए. जब भी ऐसी स्थिति होती है तो विभाग के अधिकारियों की टीम वैज्ञानिकों के साथ उस क्षेत्र का दौरा करती. इसके बाद ही अगस्त के अंत या सितंबर माह में सूखा घोषित किया जाता है. गौरतलब है कि बीते वर्ष राज्य के 25 जिलों के 280 प्रखंडों को सूखा ग्रस्त घोषित किया गया था.
खरीफ फसल डीजल अनुदान का मामला
25 दिनों मेेें किसानों के खाते में अनुदान की राशि
खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए डीजल अनुदान का लाभ 25 दिनों में किसानों के खाते में देने की व्यवस्था की गयी है. सुखाड़ वाले संभावित जिलों में कुल्थी के 2230 क्विंटल, तोरिया के दो हजार क्विंटल, उड़द के आठ सौ क्विंटल, अरहर के तीन हजार क्विंटल, मक्का के 3180 क्विंटल तथा मटर के हजार क्विंटल बीज तत्काल उपलब्ध कराये जा रहे हैं. वहीं जहां धान की रोपनी कम हुई है, वहां वैकल्पिक फसलों की खेती की जा सकती है.
आकस्मिक फसल के लिए 20 करोड़: खरीफ डीजल अनुदान की 280 करोड़ रुपये की स्वीकृति के अलावा आकस्मिक फसल अनुदान के लिए भी 20 करोड़ रुपये का बजट है. कैबिनेट की मुहर के बाद आगे की कार्रवाई शुरू होगी.
बिचड़े के लिए दो व अन्य के लिए तीन सिंचाई का मिलेगा पैसा
विभाग में पीपीएम (प्रोजेक्ट प्लानिंग एंड मॉनिटरिंग)के निदेशक गणेश कुमार बताते हैं कि डीजल अनुदान में किसानों को दो तरह की सिंचाई के लिए राशि दी जायेगी. इसमें धान बिचड़ा के लिए दो सिंचाई और धान रोपनी, मक्का, दलहन, तेलहन के लिए के लिए तीन सिंचाई के लिए राशि दी जायेगी. इसके अलावा विभाग का हिसाब है कि एक एकड़ में पटवन के लिए दस लीटर डीजल की आवश्यकता होती है. ऐसे में उसी दर से किसानों को अनुदान मिलेगा.
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