पटना जीपीओ घोटाले की सीबीआइ जांच संभव, 50 लाख रुपये से अधिक का है घोटाला

By Prabhat Khabar Digital Desk
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पटना : पटना जीपीओ में 50 लाख रुपये से अधिक के घोटाले की जांच सीबीआइ को सौंपे जाने की पूरी संभावना है. घोटाले के बढ़ते दायरे को देखते हुए डाक विभाग प्रशासन इसकी उच्च स्तरीय जांच के लिए सीबीआइ से आग्रह कर सकता है.
इस बीच सोमवार को भी पटना जीपीओ में वाउचर को सीज करने का काम देर रात तक जारी रहा. अधिकारियों का कहना है कि घोटाले में शामिल कर्मचारी इसे नष्ट करने का प्रयास कर सकते हैं, इसलिए वाउचर सहित अन्य कागजात को सीज करने का काम जल्द पूरा करने की कोशिश में जुटे हैं. जांच पूरी होने के बाद ही कर्मचारियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज होगी. घोटाले में शामिल एक डाक सहायक मुन्ना कुमार को तो निलंबित कर दिया गया है.
वहीं, दो अन्य कर्मचारी सहायक डाकपाल राजेश कुमार शर्मा और सुजय तिवारी ड्यूटी पर आये, लेकिन उनको कोई जिम्मेदारी नहीं दी गयी. अधिकारियों ने कहा कि अगले दो-तीन दिन बाद उन्हें दूसरी कोई जिम्मेदारी सौंपी जायेगी. वहीं, काउंटर क्लर्क की जिम्मेदारी सुनील कुमार को सौंपी गयी है.
सहायक डाकपाल पर थी लेनदेन की जिम्मेदारी : अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार सहायक डाकपाल राजेश कुमार शर्मा और सुजय तिवारी पर ही काउंटर से हुए लेन-देन जांच करनी की जिम्मेदारी थी.
इन दोनों की सहायता से मुन्ना कुमार ने बारी-बारी से घोटाला किया. सेविंग बैंक कंट्रोल आर्गेनाइजेशन के नियम के अनुसार काउंटर के सहायक कर्मचारी की जिम्मेदारी हर दिन के लेन-देन को चेक करने की होती है. मामले में सहायक डाकपाल ने अनदेखी की है. घोटाला इसी तीन-चार माह के अंदर किया गया है.
माइग्रेशन का लाभ उठाया : घोटाले में शामिल कर्मचारियों ने माइग्रेशन का लाभ उठाया है. साइलेंट खाते को सही तरीके से बंद नहीं
किया गया. मैनुअल से सीबीएस में ट्रांसफर के दौरान बंद खाते को भी एक्टिव कर दिया गया और उन खातों से अवैध निकासी की.सर्किल स्तर पर जांच कमेटी गठित : मिली जानकारी के अनुसार सर्किलस्तर पर पांच सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गयी है. इस कमेटी में डाक विभाग बिहार सर्किल के अलावा रिटायर अधिकारी को रखा गया है.
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