पटना : रेरा ने कहा निर्माणाधीन अपार्टमेंट के बीमा का पैसा ग्राहक को लौटाएं, जानें क्या है मामला ?

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 29 Jul 2019 7:49 AM

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सुमित कुमार पटना : बिहार रियल इस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने कहा है कि निर्माणाधीन अपार्टमेंटों के मामले में फ्लैटों के बीमा की पूरी जिम्मेदारी बिल्डरों की है. यह राशि फ्लैट खरीदार से नहीं वसूली जा सकती. ऐसे एक मामले में रेरा की बेंच ने बीमा देने वाले बैंक को ग्राहक से लिया गया बीमा […]

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सुमित कुमार
पटना : बिहार रियल इस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने कहा है कि निर्माणाधीन अपार्टमेंटों के मामले में फ्लैटों के बीमा की पूरी जिम्मेदारी बिल्डरों की है. यह राशि फ्लैट खरीदार से नहीं वसूली जा सकती. ऐसे एक मामले में रेरा की बेंच ने बीमा देने वाले बैंक को ग्राहक से लिया गया बीमा का पूरा पैसा तत्काल लौटाने का निर्देश दिया. रेरा के इस आदेश का फायदा सूबे में फ्लैट खरीद करने वाले हजारों ग्राहकों को होगा.
रेरा की बेंच के मुताबिक दानापुर में चल रहे रियलाइज रियलकॉन कंपनी के जी प्लस 12 फ्लोर प्रोजेक्ट को लेकर पटना की निवासी व पुणे में आइटी प्रोफेशनल एक 27 वर्षीया महिला ने शिकायत की थी. महिला का आरोप था कि चार साल पहले शुरू हुए इस प्रोजेक्ट में एक फ्लैट के लिए उससे कुल लागत की 75% राशि ले ली गयी, लेकिन अब तक ग्राउंड फ्लोर का निर्माण भी नहीं हुआ. यही नहीं, उससे फ्लैट के बीमा के नाम पर अलग से सालाना राशि ली गयी.
निर्माणाधीन अपार्टमेंटों के मामले में फ्लैटों के बीमा की जिम्मेदारी बिल्डरों की
राष्ट्रीयकृत बैंक को लगायी फटकार
मामले में रेरा की बेंच ने संबंधित राष्ट्रीयकृत बैंक की होम लोन व बीमा इकाई को तलब किया. बेंच ने पूछा कि जब अपार्टमेंट बना ही नहीं, तो किस आधार पर ग्राहक से उसके बीमा के एवज में राशि ली जा रही है. वह भी तब, जब प्रोजेक्ट के ग्राउंड फ्लोर की छत की ढलाई भी नहीं हुई है.
बैंक इसका कोई जवाब नहीं दे सका. फटकार के बाद बैंक ने ग्राहक की पूरी प्रीमियम राशि लौटाने का आश्वासन दिया. बेंच ने निर्देश दिया कि संबंधित बैंक का मुख्यालय यह सुनिश्चित करे कि इस तरह के मामलों में ग्राहक पर प्रीमियम का बोझ न लादा जाये. यह जिम्मेदारी मूल रूप से बिल्डर व प्रमोटर की है. बेंच ने अन्य ग्राहकों से इस एवज में ली गयी पूरी राशि लौटाने का आदेश भी बिल्डर को दिया.
निर्माणाधीन अपार्टमेंट के फ्लैटों के बीमा की पूरी जिम्मेदारी बिल्डर की है. यह राशि ग्राहक से नहीं ली जा सकती. जी प्लस 12 के इस प्रोजेक्ट में बैंक ने ग्राउंड फ्लोर की छत का निर्माण पूरा हुए बिना ही फ्लैटों का बीमा कर लिया. इसकी प्रीमियम की राशि भी ग्राहकों से ली. अब यह पूरी राशि ग्राहकों को लौटायी जायेगी.
-राजीव भूषण सिन्हा, सदस्य, रेरा
पटना : को-ऑपरेटिव की अनुमति बिना चल रहीं अधिकतर व्यावसायिक गतिविधियां, होंगी बंद
पटना : पाटलिपुत्र कॉलोनी के भूखंडों का किसी भी स्तर पर बदलाव कर उपयोग करने से पहले पाटलिपुत्र को-ऑपरेटिव हाउस कंस्ट्रक्शन सोसाइटी से एनओसी अनिवार्य है. लेकिन, गैर आवासीय गतिविधि के रूप में चिह्नित 244 प्लॉटों में से अधिकतर ऐसे हैं, जिनके आवंटियों ने एनओसी नहीं ली है. इसका खुलासा सोसाइटी द्वारा जिला प्रशासन को सौंपी गयी जांच रिपोर्ट में भी हुआ है. न्यायालय निबंधक सहयोग समिति के नये आदेश के बाद इन आवंटियों पर कार्रवाई संभव है.
पाटलिपुत्र को-ऑपरेटिव हाउस कंस्ट्रक्शन सोसाइटी के अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह ने बताया कि कोर्ट के आदेश का हम सम्मान करते हैं. संबंधित सभी 244 सदस्यों को आदेश की कॉपी भेजते हुए इसका अनुपालन करने का निर्देश दिया है. नोटिस बोर्ड पर भी इसकी सूचना दे दी गयी है. बहुमंजिली इमारतों के संबंध में डीएम को हटाने के लिए कहा गया है. उन्होंने कहा कि अब किसी भी नयी व्यावसायिक गतिविधि के आवेदन पर विचार नहीं किया जायेगा.
पुराने एनओसी को लेकर परेशानी
एनओसी लेकर संचालित हो रही गैर आवसीय गतिविधियों के मामलों में सोसाइटी के अध्यक्ष ने कहा कि ये मामले वार्षिक आम सभा (एजीएम) में स्वीकृत किये गये हैं. सोसाइटी के बाइलॉज में भी अस्पताल, बैंक व मार्केट को लेकर प्रावधान हैं. उन्होंने कहा कि कॉ-ऑपरेटिव सोसाइटी में सरकार का कोई अनुदान या अंशदान नहीं है. हमलोगों ने खुद जमीन खरीद कर को-ऑपरेटिव डेवलप किया और आधारभूत संरचना तैयार की. इसलिए इसमें बाहरी हस्तक्षेप नहीं हो सकता.
बाइलॉज के अनुरूप नहीं व्यावसायिक गतिविधियां
वहीं, इस मामले में पिटिशनर रहे मो नसीम ने कहा कि पाटलिपुत्र कॉलोनी में चल रही गैर आवासीय व व्यावसायिक गतिविधयां को-ऑपरेटिव बाइलॉज के अनुकूल नहीं हैं.
सरकारी सेवकों को आवासीय उपयोग के लिए वर्ष 1956 में मात्र 500 रुपये प्रति कट्ठा पर प्लॉट आवंटित किये गये. लेकिन, इनकी पीढ़ियां इन प्लॉटों का व्यावसायिक इस्तेमाल करने लगी हैं. इसमें को-ऑपरेटिव के पुराने पदधारियों की बड़ी भूमिका रही है. को-ऑपरेटिव द्वारा कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं किये जाने पर राज्य सरकार व स्थानीय प्रशासन को कार्रवाई का अधिकार है.
क्या है मामला ?
पाटलिपुत्र कॉलोनी के 689 भूखंडों में 244 पर गैर आवासीय गतिविधियां चर रही हैं. न्यायालय निबंधक सहयोग समिति ने इन सभी गैर आवासीय संरचना को अवैध घोषित करते हुए पाटलिपुत्र को-ऑपरेटिव हाउस कंस्ट्रक्शन सोसाइटी को कार्रवाई का निर्देश दिया है. सोसाइटी द्वारा कार्रवाई नहीं करने पर उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी.
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