सरकार बताये कब तक कर ली जायेगी फार्मासिस्ट की बहाली : हाइकोर्ट
Author Prabhat khabar digital desk
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पटना : पटना हाइकोर्ट ने राज्य सरकार को कहा कि वह 24 जुलाई तक यह बताये फार्मासिस्ट के रिक्त पदों पर कब तक बहाली कर ली जायेगी. साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार से यह भी जानना चाहा कि पटना के प्रतिष्ठित पीएमसीएच में डायलिसिस और वेंटिलेटर मशीन कब से चालू हो जायेगी. न्यायाधीश ज्योति […]
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पटना : पटना हाइकोर्ट ने राज्य सरकार को कहा कि वह 24 जुलाई तक यह बताये फार्मासिस्ट के रिक्त पदों पर कब तक बहाली कर ली जायेगी. साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार से यह भी जानना चाहा कि पटना के प्रतिष्ठित पीएमसीएच में डायलिसिस और वेंटिलेटर मशीन कब से चालू हो जायेगी.
न्यायाधीश ज्योति शरण और न्यायाधीश पार्थ सार्थी की खंडपीठ ने लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया. याचिकाकर्ता द्वारा अदालत को बताया गया कि राज्य में फार्मासिस्ट की कमी है. अभी तक इन पदों पर राज्य सरकार द्वारा बहाली नहीं की गयी है.
साथ ही अदालत को यह भी बताया गया कि पटना के प्रतिष्ठित पीएमसीएच में वेंटिलेटर और डायलिसिस मशीन काम नहीं कर रही है. इस पर महाधिवक्ता ने कोर्ट से एक सप्ताह का समय लेते हुए कहा कि वे अगली सुनवाई पर इस संबंध में पूरी जानकारी अदालत को उपलब्ध करा देंगे. इस मामले की अगली सुनवाई 24 जुलाई को की जायेगी.
अधिवक्ता हत्याकांड : अभियुक्त की जमानत याचिका खारिज
पटना. पटना हाइकोर्ट ने वकील हत्याकांड के दो अभियुक्तों की अग्रिम जमानत अर्जी को खारिज कर दी. न्यायमूर्ति विनोद कुमार सिन्हा की एकलपीठ ने दोनों अभियुक्तों द्वारा दायर जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए अभियुक्त धर्मेंद्र उर्फ नेताजी तथा सुप्रिया देवी की अग्रिम जमानत अर्जी को खारिज कर दिया.
गत वर्ष पांच दिसंबर को हाइकोर्ट के वकील जीतेंद्र कुमार की हत्या कोर्ट आने के दौरान कर दी गयी थी. हत्या के बाद हाइकोर्ट सहित पटना सिविल कोर्ट के वकीलों ने घटना के विरोध में उग्र प्रदर्शन किया था, जिसके बाद हाइकोर्ट के निर्देश पर सरकार ने एसआइटी का गठन किया था.
बीएसएनएल के मुख्य महाप्रबंधक कोर्ट में हुए हाजिर
पटना. करीब एक दर्जन दैनिक वेतन भोगी मजदूरों को तब नियमित किया गया, जब दिल्ली के बीएसएनएल के मुख्य प्रबंधक (सीएमडी) अनुपम श्रीवास्तव एवं पटना के प्रबंधक गिरीश चंद्र श्रीवास्तव को कोर्ट ने कड़ी फटकार लगायी.
इससे पहले की इन दोनों अधिकारियों के खिलाफ अवमानना का मामला शुरू किया जाता, इन पदाधिकारियों द्वारा कोर्ट को अदालती आदेश के पालन कर देने की जानकारी अदालत को दे दी गयी. करीब आधा दर्जन मजदूर 1985 से लेकर 1995 तक कार्यरत थे.
उन्हें नियमित करने का मामला मुख्य न्यायाधीश एपी शाही एवं न्यायाधीश राजीव रंजन प्रसाद की खंडपीठ में लंबित था. बार-बार के आदेश के बाद भी इन कर्मचारियों को नियमित नहीं किया जा रहा था. इस संबंध में सुनील कुमार सिंह एवं अन्य लोगों ने याचिका दायर की थी.
आवेदकों की ओर से कोर्ट को बताया गया कि हाइकोर्ट का आदेश इन मजदूरों के पक्ष में हुआ था. लेकिन आदेश का पालन नहीं कर मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी गयी. सुप्रीम कोर्ट ने भी बीएसएनएल की अपील को खारिज कर दिया है. हाइकोर्ट के आदेश का पालन नहीं होने पर नाराज कोर्ट ने पदाधिकारियों को हाजिर होने का निर्देश दिया था.
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