पटना : आवेदन करते समय कागजात के साथ संबंधित खेसरा-रकबा का साक्ष्य भी अपलोड करें आवेदक
Updated at : 09 Jul 2019 9:23 AM (IST)
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11 व 25 जुलाई को अंचलों में फिर लगेंगे राजस्व शिविर पटना : ऑनलाइन दाखिल-खारिज संबंधित मामलों के निबटारे में सुस्ती को देखते हुए डीएम कुमार रवि ने आवेदकों को आवेदन करते समय जमीन कागजात के साथ संबंधित खेसरा-रकबा का साक्ष्य भी अपलोड करने की सलाह दी है. उन्होंने कहा कि खतियान की प्रति या […]
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11 व 25 जुलाई को अंचलों में फिर लगेंगे राजस्व शिविर
पटना : ऑनलाइन दाखिल-खारिज संबंधित मामलों के निबटारे में सुस्ती को देखते हुए डीएम कुमार रवि ने आवेदकों को आवेदन करते समय जमीन कागजात के साथ संबंधित खेसरा-रकबा का साक्ष्य भी अपलोड करने की सलाह दी है.
उन्होंने कहा कि खतियान की प्रति या कार्यपालक दंडाधिकारी का शपथ पत्र बतौर साक्ष्य दिया जा सकता है. बिक्री पत्र में भी खाता के साथ खेसरा एवं रकबा का जिक्र किया जाना चाहिए. समीक्षा करते हुए डीएम ने बताया कि अंचलाधिकारी के एक ही डोंगल से दाखिल-खारिज व आरटीपीएस कार्यों का निबटारा किये जाने की वजह से हो रही समस्या को देखते हुए अलग से डोंगल की व्यवस्था करायी जायेगी. साथ ही हल्कावार कर्मचारी का पदस्थापन कराते हुए अतिरिक्त आॅपरेटर की व्यवस्था करने का प्रयास भी किया जायेगा. मामले के जल्द निबटारे को लेकर डीएम ने सभी अंचलाधिकारियों को 11 जुलाई व 25 जुलाई को राजस्व शिविर लगा कर अधिक से अधिक लंबित वादों के निपटारे का निर्देश दिया है.
हल्का कर्मचारी की कमी बन रही बाधा
हल्का कर्मचारी की कमी भी ऑनलाइन दाखिल-खारिज में बाधा बन रही है. अपर समाहर्त्ता (राजस्व) ने खुद स्वीकार किया कि पालीगंज अनुमंडल स्थित बिक्रम अंचल के 74 राजस्व ग्राम 17 हल्का में समेकित हैं.
लेकिन, वर्तमान में हल्का कर्मचारी के 17 स्वीकृत बल के विरुद्ध मात्र 03 हल्का कर्मचारी पदस्थापित हैं. इस अंचल की कुल 41,780 जमाबंदी के मुकाबले पिछले दस महीने में आॅनलाइन दाखिल खारिज के लिए कुल 2369 आवेदन मिले, जिनमें 853 का ही निबटारा किया जा सका. प्राय: सभी अंचलों में ऐसी ही समस्या है.
विलंब होने के मुख्य कारण
कर्मचारी के प्रतिवेदन में ऑब्जेक्शन रहने पर आवेदक से खेसरा-रकवा का साक्ष्य मिलने पर रिपोर्ट एप्रूव नहीं लेना तथा पुनः डिक्लाइन होते हुए कर्मचारी के पोर्टल पर चला जाना n आवेदक या उनके परिवारिक सदस्य के नाम जमाबंदी का नहीं होना. n बिक्रय पत्र में जमाबंदी का जिक्र नहीं होना तथा आवेदक के द्वारा बार-बार सूचना के बाद जमाबंदी संबंधी साक्ष्य का नहीं देना n बिक्रय पत्र में जमीन का मिलाजुला रकवा रहना, जिससे एप्रूव करने पर निष्पादित नहीं होना n बिक्रय पत्र में खेसरा रकवा अगल-अलग दर्ज नहीं होना. n सीओ के डोंगल से ही इडिट करने के पश्चात ही कर्मचारी रिपोर्ट होने की वजह से अधिक समय लगना n सर्वर प्रायः धीमा रहने से दाखिल-खारिज में बाधा होना n अंचल में कर्मचारी का स्वीकृत बल के विरुद्ध कम होना. एक ही ऑपरेटर से दाखिल-खारिज का कार्य होना.
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