जातिवाद से लड़ने के लिए गांधीजी ने अपने जीवन में किये क्रांतिकारी परिवर्तन: प्रो आनंद
Updated at : 06 Jul 2019 5:28 AM (IST)
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पटना : गांधी जी ने अपने जीवन में जातिवाद से लड़ने के लिए क्रांतिकारी परिवर्तन किये. गांधी और दलित विषय पर विमर्श के दौरान शुक्रवार को विद्यापति भवन में प्रख्यात सामाजिक चिंतक प्रो आनंद कुमार ने गांधीजी के कार्यशैली पर प्रकाश डालते हुए उनके जीवन से जुड़ी कई प्रेरक कहानियां सुनायीं. उन्होंने कहा कि गांधीजी […]
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पटना : गांधी जी ने अपने जीवन में जातिवाद से लड़ने के लिए क्रांतिकारी परिवर्तन किये. गांधी और दलित विषय पर विमर्श के दौरान शुक्रवार को विद्यापति भवन में प्रख्यात सामाजिक चिंतक प्रो आनंद कुमार ने गांधीजी के कार्यशैली पर प्रकाश डालते हुए उनके जीवन से जुड़ी कई प्रेरक कहानियां सुनायीं. उन्होंने कहा कि गांधीजी ने लिखा है कि वे बचपन में जिसके साथ खेलते थे, वो एक दलित बच्चा था.
हर दिन खेल कर आने के बाद उनकी माता अछूत के साथ खेलने के लिए उन्हें डांटती थीं और घर में प्रवेश से पहले नहलाती थी. गांधीजी समझ नहीं पाते थे कि जो बच्चा हर तरह से उन्हीं की तरह है बल्कि कई मायनों में तो उनसे बेहतर है, वह अछूत कैसे हो गया. उन्होंने बाद में लिखा भी कि छुआछूत पूरी तरह अधार्मिक है.
कोई भी अछूत पैदा नहीं हो सकता क्योंकि हम सभी उसी अग्नि के एक कण हैं. व्याख्यान के दौरान प्रो आनंद ने यह भी कहा कि जाति का अपना समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र है. यह एक राजनीति है जिसे पहले अंग्रेजों ने चलाया, अब यहां के लोग कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि जातिवाद का प्राचीन भारतीय परंपरा और वेद, उपनिषद जैसे ग्रंथो में दार्शनिक आधार नहीं मिलता हैं क्योंकि भारतीय दर्शन अद्वैतवाद का समर्थक है जिसमें सभी स्त्री पुरूष को एक आत्मा की किरण माना गया है. बौद्ध और जैन धर्मों में तो अन्य जीवित प्राणियों को भी मानव जैसा मान कर उनके प्रति भी करूणा का उपदेश दिया गया है.
ऐसे में मानव मानव में भेदभाव वाली व्यवस्था का आधार नहीं दिखता है. जातिवाद पर अब तक कई शोध (थीसिस) भी हुए हैं. लेकिन स्पष्ट नहीं हो सका कि फिर भारतीय समाज में इसकी जड़ कैसे इतनी गहरी हो गयी.
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