पटना : उद्यमी बनने को एससी-एसटी युवा नहीं आ रहे हैं आगे

पटना : सरकारी स्तर से अनुसूचित जाति व जन जाति के लोगों को उद्यमी बनाने के लिए प्रयास हो रहे हैं, फिर भी लोग आगे नहीं आ रहे हैं. पिछले वित्तीय वर्ष में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम में मात्र 407 लोगों को ही ऋण मिला. इसमें अनुसूचित जाति के 339 और अनुसूचित जन जाति के […]
पटना : सरकारी स्तर से अनुसूचित जाति व जन जाति के लोगों को उद्यमी बनाने के लिए प्रयास हो रहे हैं, फिर भी लोग आगे नहीं आ रहे हैं. पिछले वित्तीय वर्ष में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम में मात्र 407 लोगों को ही ऋण मिला.
इसमें अनुसूचित जाति के 339 और अनुसूचित जन जाति के 68 लोग शामिल हैं. 12 जिलों में तो एक भी एसटी को लोन नहीं मिला. राज्य सरकार द्वारा शुरू की गयी मुख्यमंत्री एनसी-एसटी उद्यमी योजना सरकार लालफीताशाही में फंस कर रह गयी है. पिछले दिनों राज्य के उद्योग मंत्री श्याम रजक ने इसकी समीक्षा कर इसमें तेजी लाने का निर्देश दिया था. पिछले वित्तीय वर्ष 2018-19 में पीएमइजीपी में 3238 लोगों को ऋण मिला, इसमें सामान्य कोटि के 689 लाभार्थी थे. 1918 ओबीसी के और 224 अल्पसंख्यक लाभार्थी को ऋण मिला. 339 एससी और 68 एसटी लाभार्थी को ऋण मिला. सबसे अधिक एससी वर्ग के 26 लाभार्थी को नवादा में ऋण मिला.
कैमूर में तो मात्र एक एससी वर्ग के लाभार्थी को ऋण मिला. अररिया, बांका, बेगूसराय और भागलपुर में एक भी एसटी लाभार्थी को ऋण नहीं मिला जबकि इन जिलों में एसटी का आबादी अच्छी है. खगड़िया, किशनगंज, लखीसराय, पटना, पूर्णिया रोहतास और सुपौल जिले में एक भी एसटी लाभार्थी को ऋण नहीं मिला. पिछले वित्तीय वर्ष में पीएमइजीपी में सबसे अधिक 206 लोगों को पटना में ऋण मिला. वैशाली, सीवान, बक्सर, दरभंगा, किशनगंज, मधेपुरा, मधुबनी और रोहतास जिले में तीन अंक में पीएमइजीपी के लाभार्थी रहे.
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