पटना : भूजल 20-25 मीटर तक नीचे उतरा

Updated at : 19 Jun 2019 9:19 AM (IST)
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पटना : भूजल 20-25 मीटर तक नीचे उतरा

गंगा नदी के किनारे भूजल में गिरावट पटना : बक्सर से भागलपुर तक गंगा नदी के किनारे भूजल में लगातार गिरावट आ रही है. इस साल इस नदी के किनारे रिकॉर्ड गिरावट दर्ज हुई है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक बक्सर में 25 मीटर तो भागलपुर में 20 मीटर तक भूगर्भीय जल उतर गया है. केंद्रीय […]

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गंगा नदी के किनारे भूजल में गिरावट

पटना : बक्सर से भागलपुर तक गंगा नदी के किनारे भूजल में लगातार गिरावट आ रही है. इस साल इस नदी के किनारे रिकॉर्ड गिरावट दर्ज हुई है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक बक्सर में 25 मीटर तो भागलपुर में 20 मीटर तक भूगर्भीय जल उतर गया है. केंद्रीय भूजल बोर्ड की आधिकारिक रिपोर्ट ‘बिहार के भूजलीय दृष्टिकोण’ के मुताबिक वर्ष 2014 तक गंगा नदी के कछारीय क्षेत्र में मॉनसून पूर्व जल स्तर एक मीटर से 11 मीटर तक था.

मॉनसून के बाद का आदर्श भूजल स्तर 0़ 85 मीटर से 9 मीटर तक था. अब हालात ये हैं कि इस क्षेत्र में भूजल स्तर की अधिकतम मौजूदगी 20 मीटर पर है. बात साफ है कि चार साल में गंगा किनारे अर्थात कछार क्षेत्र में भूजल में आयी गिरावट चौंकाने वाली है.

बहाव क्षेत्र भी हुआ कमजोर : भूजल में आयी गिरावट के चलते गंगा नदी का बेस फ्लो भी कम हुआ है. बेस फ्लो से आशय नदी का वह बहाव, जो उसके किनारे के भूगर्भीय जल से नियंत्रित होता है. इस तरह गंगा नदी का बहाव क्षेत्र भी निरंतर कमजोर हो रहा है. देखा जा रहा है कि इस साल ग्लेशियर पिघलने के बाद भी नदी में अपेक्षित जल स्तर नहीं बढ़ा है.

पिछले 10 वर्षों से बारिश में लगातार गिरावट चिंता का विषय बन गयी है. लघु सिंचाई विभाग के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक उसके ट्यूबवेल संचालन में अभी कोई दिक्कत तो नहीं है, लेकिन उससे राज्य के भूगर्भीय जल स्तर के आंकड़े जरूर मिल रहे हैं, जाे बताते हैं कि किस कदर भूगर्भीय जल का दोहन हो रहा है.

दक्षिणी बिहार में औसत से ज्यादा गिरावट

उत्तरी बिहार में है बेहतर स्थिति : उत्तरी बिहार में भूजल केवल 5-6 मीटर पर उपलब्ध है. दरअसल इस इलाके में अभी दोहन तुलनात्मक रूप में कमजोर है. वहीं, दक्षिणी बिहार में औसतन 15-25 मीटर, मध्य बिहार में 10-15 मीटर, पूर्वी बिहार में 10-12 मीटर पर पानी मिल रहा है. बात साफ है कि भूजल स्तर में गिरावट लगातार जारी है.

हालांकि नदी किनारे स्थिति असाधारण तौर पर चिंताजनक है. यहां दोहन भी चरम पर है. लघु सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता रवींद्र सिंह ने बताया कि स्थिति अभी अलार्मिंग नहीं है, लेकिन भूजल लगातार नीचे जा रहा है. नदियों के दोनों किनारों पर भूजल में गिरावट उल्लेखनीय है. लेकिन बरसात में भूजल स्तर मेंटेन हो जायेगा.

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