बिहार में पुलों के रखरखाव के लिए जल्द बनेगी नीति

Updated at : 15 Jun 2019 6:08 AM (IST)
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बिहार में पुलों के रखरखाव के लिए जल्द बनेगी नीति

पटना : पथ निर्माण विभाग के मंत्री नंदकिशोर यादव ने कहा है कि राज्य में सड़कों की तर्ज पर ही पुलों के रखरखाव की जल्द नयी नीति बनेगी. अब कम समय में, कम लागत से गुणवत्ता पूर्ण निर्माण करने की जरूरत है. पथ निर्माण मंत्री शुक्रवार को ब्रिज-2019 सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. इसका […]

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पटना : पथ निर्माण विभाग के मंत्री नंदकिशोर यादव ने कहा है कि राज्य में सड़कों की तर्ज पर ही पुलों के रखरखाव की जल्द नयी नीति बनेगी. अब कम समय में, कम लागत से गुणवत्ता पूर्ण निर्माण करने की जरूरत है. पथ निर्माण मंत्री शुक्रवार को ब्रिज-2019 सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे.

इसका आयोजन ज्ञान भवन में इंडियन इंस्‍टीट्यूशन ऑफ ब्रिज इंजीनियर (आइआइबीइ) और बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड ने मिलकर किया था. इसमें मुख्य अतिथि के रूप में उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी शामिल नहीं हो सके, लेकिन उन्होंने वीडियो रिकॉर्डिंग से सम्मेलन के सफलता की शुभकामना दी.
मंत्री नंदकिशोर यादव ने कहा है कि हम पांच साल के िलए चुनकर आते हैं. इस दौरान जिन योजनाओं का शिलान्यास करते हैं उनका उद्घाटन भी करना चाहते हैं. सीएम के निर्देश पर राज्य के किसी भी कोने से पांच घंटे में पटना पहुंचने का लक्ष्य मिला है.
झारखंड से अलग होने पर बिहार के लिए तत्कालीन पीएम अटल जी ने योजना आयोग से कहकर प्रति वर्ष एक हजार करोड़ रुपये की व्यवस्था करवा दी, लेकिन तत्कालीन सरकार ने काम नहीं किया और पैसा जमा रहा. बिहार में 2005 में एनडीए सरकार बनने पर करीब पांच हजार करोड़ रुपये अलग से मिला जो यहां विकास के कार्य में खर्च हुए. अब बिहार सरकार हर टोले, और गांव की गली व नली को सड़क से जोड़ने की योजना बना रही है.
ये रहे मौजूद : इस कार्यक्रम में पुल निर्माण निगम के अध्यक्ष जितेंद्र श्रीवास्तव, परिवहन सचिव संजय अग्रवाल, विभाग के इंजीनियर इन चीफ लक्ष्मी नारायण दास, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के एमडी उमेश कुमार, पूमरे के जीएम ललित चंद्र त्रिवेदी और आइआइबीइ के अध्यक्ष विनय गुप्ता सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे.
15 सालों में पांच हजार छोटे-बड़े पुल बने
पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव अमृत लाल मीणा ने कहा कि सीएम नीतीश कुमार के निर्देश पर राज्य में पिछले 15 सालों में करीब पांच हजार छोटे-बड़े पुल बने. इनके रखरखाव का डाटा जुटाने के लिए एजेंसी का चयन किया जा रहा है. इसके लिए सेतु प्रबंधन कोषांग बनाया जा रहा है. इसकी देखरेख चीफ इंजीनियर स्तर के पदाधिकारी के नेतृत्व में 50 इंजीनियरों की टीम करेगी. राज्य में आरओबी बनाने में आधा हिस्सा केंद्र और आधा राज्य सरकार खर्च करेगी. ऐसे 60 आरओबी का चयन हुआ है. डीपीआर बनायी जा रही है. सम्राट अशोक कन्वेंशन केंद्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इंजीनियरिंग का नायाब नमूना बताया. उन्होंने आइआइबीइ से कहा कि राज्य सरकार से वे पुलों के रखरखाव संबंधी करार करें. साथ ही कुछ बिंदुओं पर मदद की मांग की. इसमें शहरी क्षेत्रों से गुजरने का विकल्प, पुलों को समयसीमा में पूरा करना, कम लागत पर पुलों का निर्माण, पुलों का रखरखाव शामिल हैं.
पटना सहित चार जिलों की 11 योजनाओं के लिए 323.66 करोड़ रुपये हुए मंजूर
पटना. पटना सहित चार जिलों की 11 योजनाओं के लिए तीन अरब 23 करोड़ 66 लाख रुपये की मंजूरी पथ निर्माण विभाग की निविदा समिति ने दी है. यह जानकारी विभाग के मंत्री नंदकिशोर यादव ने दी. उन्होंने कहा कि पटना में पाटलिपुत्र गोलंबर से वेस्ट बोरिंग कैनाल रोड भाया वन विभाग कार्यालय और आनंदपुरी नाला गोसाईं टोला रोड के साथ सड़क के लिए 29 करोड़ 69 लाख रुपये की मंजूरी दी गयी है.
वहीं, पाली से अकबरपुर रोड के लिए 21 करोड़ 77 लाख, पाली से खानपुर–झुनाठी–बहादुरपुर–अतौला सड़क के लिए 29 करोड़ 56 लाख रुपये की मंजूरी दी गयी है. मंत्री ने बताया कि पश्चिम चंपारण जिले के लिए एक योजना के िलए 36 करोड़ 65 लाख व दूसरी योजना के िलए एक अरब 16 करोड़ आठ लाख, गया जिले एक योजना के िलए 20 करोड़ आठ लाख, ूदसरी योजना के लिए 18 करोड़ 75 लाख, तीसरी योजना के िलए 12 करोड़ 32 लाख, भागलपुर के एक योजना के िलए 13.1 करोड़ व दूसरी योजना के लिए 25. 69 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गयी है.
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