अब खेल में भी माहिर बनेगी बिहार की पुलिस

Updated at : 10 Jun 2019 7:25 AM (IST)
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अब खेल में भी माहिर बनेगी बिहार की पुलिस

ट्रायल के बाद गठित की जायेंगी अखिल भारतीय खेल प्रतियोगिताओं के लिए 15 टीमें पटना : बिहार पुलिस अब खेलों पर भी ध्यान देगी. अखिल भारतीय खेल प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़कर भाग लेगी. पुलिस मुख्यालय ने विभिन्न खेलों की 15 टीमों के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है. टीमों का नये सिरे से गठन किया […]

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ट्रायल के बाद गठित की जायेंगी अखिल भारतीय खेल प्रतियोगिताओं के लिए 15 टीमें
पटना : बिहार पुलिस अब खेलों पर भी ध्यान देगी. अखिल भारतीय खेल प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़कर भाग लेगी. पुलिस मुख्यालय ने विभिन्न खेलों की 15 टीमों के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है. टीमों का नये सिरे से गठन किया जा रहा है. डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय की ओर से एडीजी मुख्यालय कुंदन कृष्णन ने राज्य के जोनल आइजी, रेल आइजी और विभिन्न इकाइयों के आइजी को निर्देश दिया है. सभी को अपने-अपने प्रक्षेत्र से खेल के अनुभवी अथवा खेल में रुचि रखने वाले पुलिस पदाधिकारी, कर्मियों काे ट्रायल के लिए भेजना है.
खेलकूद चयन ट्रायल में शामिल होने वाले पुलिस कर्मियों को 12 जून को पूर्वाह्न में बीएमपी पांच पटना स्थित खेल कार्यालय में खेल से संबंधित प्रमाण पत्र के साथ रिपोर्ट करने के निर्देश हैं. बीएमपी पांच के समादेष्टा को ट्रायल के दौरान होने वाले व्यय के साथ ही ट्रायल में शामिल होने वाले खिलाड़ियों के रुकने के लिए दो बैरक खाली कराने का आदेश दिया गया है. बीएमपी दस के समादेष्टा को भी दो बैरक उपलब्ध कराने के निर्देश दिये गये हैं.
अफसरों के पुलिसिया रंग ने बिहार पुलिस को खेल में पीछे किया
पुलिस गेम्स में बिहार की स्थिति नीचे के पायदान पर है. कई खेलों में पुरुष टीम भी नहीं थीं. महिला टीम तो किसी भी खेल में नहीं बनी थी. सुधीर सिंह और रनंजय सिंह एथलेटिक्स के इंटनेशनल खिलाड़ी रहे हैं. शीतला बख्श सिंह (हडल), युसुफ खान (जैवलिन) नेशनल खिलाड़ी रहे हैं. इनकी सेवाएं खेल की जगह थानों में ली जा रही हैं.
फिजियो थेरेपिस्ट की भी नियुक्ति नहीं हैं. लंबे समय से डीएसपी स्पोर्ट्स के पद पर नॉन खिलाड़ी की तैनाती है. पूर्व में इस पद पर खेल में महारथ रखने वाले डीएसपी को ही तैनाती दी गयी थी. एक अन्य महिला इंस्पेक्टर को खेल से दूर कर दिया गया है, जबकि वह अपने समय की नामचीन खिलाड़ी रही हैं.
मेडल दिलाने वालों का भी नहीं रखा जा रहा था ध्यान
पुलिस के लिए मेडल लाने वाले खिलाड़ियों को भी अब तक मानक सुविधाएं नहीं मिल रही थीं. साउथ एशियन चैंपिनयनशिप (हैंडबाल) में गोल्ड ले चुकी खुशबू को हाॅस्टल नहीं मिला है. वह जनरल बैरक में ही रह रही थीं.
कुछ माह पहले उनको बीएमपी स्थित खेल कार्यालय में कमरा मिला है. इसमें वह नौ खिलाड़ियों साथ रह रही थीं. नेशनल खिलाड़ी अर्चना वाला (थ्रोवर) को भी विधि व्यवस्था में ड्यूटी देनी पड़ी. इसके कारण कई-कई महीने तक पुलिस के खिलाड़ी रुटीन प्रैक्टिस नहीं कर पाते.
13 व 14 जून को ट्रायल
पुलिस की विभिन्न खेलों की 15 टीम के गठन के लिए दो दिन ट्रायल लिये जायेंगे. वाॅलीबाॅल, हैंडबॉल, बास्केटबॉल, योगा के लिए 13 जून को ट्रायल होगा. कुश्ती, कबड्डी, भारोत्तोलन, मुक्केबाजी, जुडो, बुशू, ताइक्वांडो, एथलेटिक्स, फुटबाल, अर्चरी, हॉकी के लिए 14 जून को ट्रायल लिये जायेंगे.
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