मैं सीएम की रेस में नहीं, सेवक की रेस में हूं-विजय सिन्हा का बयान

Updated at : 06 Apr 2026 10:00 AM (IST)
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Bihar Politics 6 April 2026.

उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा

Bihar Politics: बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही चर्चा पर कहा कि वे “सीएम की रेस में नहीं, बल्कि सेवक की रेस में हैं” और उसी भूमिका में रहना चाहते हैं.

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Bihar Politics: बिहार की सियासत में मुख्यमंत्री पद को लेकर जारी चर्चा के बीच उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने एक ऐसी लकीर खींच दी है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है. लखीसराय में अपने आवास पर आयोजित जन संवाद कार्यक्रम के दौरान उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा कि वे सीएम बनने की किसी दौड़ का हिस्सा नहीं हैं. उनका लक्ष्य पद की प्राप्ति नहीं, बल्कि जनता की सेवा है.

विजय सिन्हा का यह बयान उस समय आया है जब राज्य में एनडीए के भीतर नेतृत्व और ‘बड़े भाई-छोटे भाई’ की भूमिका को लेकर अक्सर कयास लगाए जाते रहते हैं.

JDU-BJP दोनों सगे भाई के तरह

उपमुख्यमंत्री ने भाजपा और जदयू के रिश्तों पर जमी बर्फ को पिघलाते हुए स्पष्ट किया कि गठबंधन में कोई भी दल ‘बड़ा भाई’ या ‘छोटा भाई’ नहीं है. उन्होंने कहा कि दोनों दल सगे भाइयों की तरह हैं और भाइयों के बीच ऊंच-नीच या छोटा-बड़ा नहीं होता.

उन्होंने गठबंधन के भीतर किसी भी प्रकार के संघर्ष की खबरों को सिरे से नकार दिया है.

लखीसराय में विकास योजनाओं की सौगात

राजनीतिक संदेशों के साथ-साथ विजय सिन्हा ने अपने गृह क्षेत्र लखीसराय के विकास के लिए खजाना भी खोला. उन्होंने नगर परिषद क्षेत्र में करीब 4.35 करोड़ रुपये की लागत वाली विभिन्न विकास योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया.

इसमें 2.85 करोड़ रुपये की तैयार योजनाओं को जनता को समर्पित किया गया, जबकि 1.50 करोड़ रुपये की नई परियोजनाओं की नींव रखी गई. उन्होंने जोर देकर कहा कि बुनियादी सुविधाओं में सुधार ही असली जनसेवा है और सरकार का प्राथमिकता क्रम इसी आधार पर तय होता है.

कार्यकर्ताओं को दिया संदेश

सूर्यगढ़ा के रामपुर में आयोजित पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण अभियान के दौरान उपमुख्यमंत्री ने भाजपा कार्यकर्ताओं को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि राजनीति जनसेवा का माध्यम होनी चाहिए, न कि आजीविका का.

उन्होंने कार्यकर्ताओं को प्रेरित किया कि वे अपनी जीविका स्वयं अर्जित करें ताकि निष्पक्ष भाव से समाज की सेवा कर सकें. विजय सिन्हा के अनुसार, जब कार्यकर्ता स्वावलंबी होगा, तभी वह बिना किसी दबाव के जनता की आवाज बन पाएगा और ‘सेवक’ की उस रेस में टिका रह पाएगा.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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