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छात्रवृत्ति ऋण लेकर भूल गये पूर्ववर्ती छात्र, पीयू ने जारी की 1934-1969 के बीच छात्रवृत्ति लेने वाले छात्रों की सूची

Updated at : 27 May 2019 4:04 AM (IST)
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छात्रवृत्ति ऋण लेकर भूल गये पूर्ववर्ती छात्र, पीयू ने जारी की 1934-1969 के बीच छात्रवृत्ति लेने वाले छात्रों की सूची

अमित कुमार, पटना : पटना विश्वविद्यालय के कई पूर्ववर्ती छात्रों ने अपने पढ़ाई काल में विवि से लोन तो लिया, लेकिन उसे लेकर भूल गये और आज तक कभी चुकता ही नहीं किया. लोन लेने वाले पूर्ववर्ती छात्र कई सम्मानित पदों पर रह चुके हैं, कुछ तो इसी विवि में शिक्षक रह चुके हैं. कुछ […]

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अमित कुमार, पटना : पटना विश्वविद्यालय के कई पूर्ववर्ती छात्रों ने अपने पढ़ाई काल में विवि से लोन तो लिया, लेकिन उसे लेकर भूल गये और आज तक कभी चुकता ही नहीं किया. लोन लेने वाले पूर्ववर्ती छात्र कई सम्मानित पदों पर रह चुके हैं, कुछ तो इसी विवि में शिक्षक रह चुके हैं. कुछ अब जीवित भी नहीं हैं.

यही वजह है कि विवि उक्त मामले में सम्मान पूर्वक स्वेच्छा से सहयोग मांग रही है ताकि वर्तमान में छात्रों की मदद की जा सके और उक्त छात्रवृत्ति को पुन: शुरू किया जा सके. विवि द्वारा 1934 से 1969 के बीच 42 ऐसे पूर्ववर्ती छात्रों को दी गयी छात्रवृत्ति ऋण की सूची जारी की गयी है.
विवि ने लोन के एवज में मांगा सहयोग : यही नहीं ज्यादातर छात्रवृत्ति योजनाएं धीरे-धीरे बंद हो गयीं. प्रभात खबर ने विवि में सभी स्कॉलशिप को बंद किये जाने की खबर को प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया था. इसके बाद वर्तमान कुलपति प्रो रास बिहारी सिंह ने उक्त मामले का संज्ञान लिया.
इसी के तहत सर गणेश दत्त स्कॉलशिप को पुन: शुरू कर दिया गया है. वहीं अब सर गणेश दत्त ऋण छात्रवृत्ति लेने वाले पूर्ववर्ती छात्रों से विवि के लिए सहयोग मांगा जा रहा है. चूंकि उस समय जो राशि ली गयी थी वह काफी कम थी और देखा जाये तो उसका ब्याज आज के समय में बहुत ही अधिक हो जायेगा.
वहीं कई लोग ऐसे भी जिन्होंने काफी कम राशि ली थी. जैसे एक व्यक्ति ने सिर्फ दो सौ रुपये लिये थे. इसलिए अधिक जोड़-घटाव नहीं कर उनसे हरसंभव मदद की अपील की गयी है और स्वेच्छा से वे जितनी राशि अपनी क्षमता के अनुसार देना चाहते हैं, देने की मांग की गयी है. विवि ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया चौहट्टा ब्रांच का खाता संख्या भी जारी किया है. वे चाहें तो इसे जमा कर स्टूडेंट्स वेलफेयर डीन को सूचित कर सकते हैं.
कई बड़े पदों पर तो कुछ विवि में ही शिक्षक रह चुके हैं, अब कुछ इस दुनिया में भी नहीं
उन पूववर्ती छात्रों से स्वेच्छा से राशि सहयोग की अपील विवि ने की है ताकि फिर से उक्त ऋण को शुरू किया जा सके
1970 से बंद हो गयी थी सर गणेश दत्त ऋण छात्रवृत्ति
विवि के द्वारा उस समय सर गणेश दत्त ऋण छात्रवृत्ति दी जाती थी लेकिन अफसोस यह हुआ कि उक्त ऋण लेने के बाद छात्र लौटाते ही नहीं थे. इसका परिणाम यह हुआ कि 1969 में उक्त छात्रवृत्ति को बंद करना पड़ा और तब से लेकर आज तक फिर दोबारा इसे शुरू नहीं किया जा सका.
विवि ने इसको लेकर एक कमेटी बनायी. पुराने अभिलेखों को खंगाला गया. इसमें 43 लोगों के नाम निकलकर आये जिन्होंने ऋण वापस नहीं किया. साथ ही जिन्होंने राशि लौटायी उनकी भी सूची जारी की गयी है. ऐसे 9 लोग हैं जिन्होंने राशि को लौटाया है.
इनमें से सिर्फ एक पूर्ववर्ती छात्र डॉ केदार प्रसाद सिंह ने छह हजार का ऋण लिया था जिसे बाद में सबसे अधिक 20 हजार रुपये स्वेच्छा से चेक के माध्यम से वापस किया था. बाकी नौ लोगों ने जितनी राशि ली थी उतनी ही लौटायी. उक्त सूची पीयू के वेबसाइट पर उपलब्ध है. इसमें कई प्रख्यात चिकित्सक, प्राध्यापक, साहित्यकार, सर्जन व अन्य-अन्य पेशों में रह चुके हैं.
1934 से 1969 के बीच कई पूर्ववर्ती छात्रों ने सर गणेश दत्त छात्रवृत्ति लिया था लेकिन वापस नहीं किया था. उनकी सूची जारी की गयी है. जो पूर्ववर्ती छात्र जो जिवित हों या उनके परिजन स्वेच्छा से उक्त ऋण राशि के एवज में विवि को कुछ सहयोग करना चाहते हैं तो वे वर्तमान में गरीब छात्रों की सहायता के लिए कुछ मदद कर सकते हैं. विवि उनका ऐसे लोगों का तहे दिल से स्वागत करेगी. साथ ही ऋण वसूली की सूची में उनका नाम अंकित किया जायेगा.
प्रो एनके झा, स्टूडेंट्स वेलफेयर डीन, पीयू
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