पटना : चुनाव खर्च बढ़ा, पर नहीं बढ़े वोटर, जानें क्यों बढ़ता है प्रति मतदाता खर्च
Updated at : 26 Apr 2019 7:43 AM (IST)
विज्ञापन

पटना : राज्य में लोकसभा चुनाव के पिछले 67 वर्ष के आंकड़े बताते हैं कि मतदाताओं को जागरूक करने से लेकर उन्हें बूथ तक लाने का खर्च बढ़ा है, लेकिन वोटरों की संख्या में अपेक्षाकृत बढ़ोतरी नहीं सकी. 1951-52 के लोकसभा चुनाव में 1951-52 से लेकर 1971-72 तक हुए पहले पांच लोकसभा चुनावों में प्रति […]
विज्ञापन
पटना : राज्य में लोकसभा चुनाव के पिछले 67 वर्ष के आंकड़े बताते हैं कि मतदाताओं को जागरूक करने से लेकर उन्हें बूथ तक लाने का खर्च बढ़ा है, लेकिन वोटरों की संख्या में अपेक्षाकृत बढ़ोतरी नहीं सकी. 1951-52 के लोकसभा चुनाव में 1951-52 से लेकर 1971-72 तक हुए पहले पांच लोकसभा चुनावों में प्रति मतदाता खर्च एक रुपया भी नहीं था.
1977 में प्रति मतदाता पर होने वाला खर्च बढ़कर डेढ़ रुपया हो गया. 1971 में यह खर्च महज प्रति मतदाता 40 पैसे था. इसके बाद से चुनावी खर्च में वृद्धि होती रही. 1984-85 के लोकसभा चुनाव में यह खर्च बढ़कर प्रति मतदाता दो रुपये, 1991-92 में सात रुपये, 1996 में 10 रुपये, 1999 में 15 रुपये और 2014 में 17 रुपये प्रति वोटर हो गया. इस खर्च में राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों के खर्च शामिल नहीं हैं.आंकड़ों की बात करें तो संयुक्त बिहार में (झारखंड सहित) 1999 में और 1998 में 64% और 1999 में 61.48% वोट पड़े थे.
बिहार में मतदान प्रतिशत : झारखंड से बिहार के अलग होने के बाद पहली बार 2004 में लोकसभा चुनाव हुआ. इसमें राज्य में 59% वोट पड़े. 2009 में 44.27% और 2014 में 56% वोट पड़े. 2019 में पहले चरण की चार सीटों पर 53.06% वोटिंग हुई. 2019 के दूसरे चरण में औसतन 62.34% वोट पड़े.
क्यों बढ़ता है प्रति मतदाता खर्च
विशेषज्ञों का कहना है कि मतदाताओं की संख्या बढ़ने के साथ ही चुनाव आयोग को ज्यादा मतदान और मतगणना केंद्र स्थापित बनाने पड़ते हैं. अधिक वोटिंग मशीनें व स्याही खरीदनी पड़ती है.
ऐसे में चुनाव आयोग पर खर्च बढ़ता है. इन खर्चों को कुल मतदाताओं में बांटने पर प्रति मतदाता खर्च आता है. बिहार इलेक्शन वाच के संयोजक राजीव कहते हैं कि जनता और सरकार के बीच की महत्वपूर्ण कड़ी राजनीतिक दल हैं. राजनीतिक दलों में आंतरिक लोकतंत्र की कमी देखी जा रही है. सुप्रीमो कल्चर हावी है. इससे मतदाता उदासीन हो रहे हैं और मतदान करने वालों की संख्या में अपेक्षाकृत बढ़ोतरी नहीं हो रही है. ऐसे में चुनाव आयोग को भी मतदाताओं को जागरूक करने के लिए चलाये जाने वाले कार्यक्रमों को लेकर सोचना होगा.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Tags
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




