सुविधाओं के अभाव में कट रही जिंदगी, विकास के नाम पर देंगे वोट
Updated at : 13 Apr 2019 4:34 AM (IST)
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दियारा लाइव : बिंद टोली , समय शाम के पांच बजे हैं. कुर्जी बिंद टोली के चाय नाश्ता की दुकान वाली जगह. लोग गरम समोसे खाने का मजा ले रहे हैं और बात सीधे पीएम मोदी के काम की समीक्षा पर हो रही है. कोई कर रहा है कि कुछ भी हो देश के लिए […]
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दियारा लाइव : बिंद टोली , समय शाम के पांच बजे हैं. कुर्जी बिंद टोली के चाय नाश्ता की दुकान वाली जगह. लोग गरम समोसे खाने का मजा ले रहे हैं और बात सीधे पीएम मोदी के काम की समीक्षा पर हो रही है.
कोई कर रहा है कि कुछ भी हो देश के लिए काम तो हो रहा है. कम से कम घोटाला नहीं नहीं हुआ. मगर, हमारे सांसद शत्रुघ्न सिन्हा कभी क्षेत्र में नहीं आये. केवल टिकट के लिए पार्टी बदलने का काम कर रहे हैं.
जवाब में सामने वाले ने कहा देखिए, हम लोगों को तो कुछ नहीं मिला न, आज भी वही समस्या है. हम लोग सूबे की राजधानी के पास रहते हैं, लेकिन स्थिति गांव से भी बदतर है. हमारी बोरिंग ठप है. हमारी समस्या हो सुनने कोई नहीं आता, तो वोट क्यों दिया जाये.
पलायन का दर्द क्या होता है, कोई बिंद टोली के निवासियों से पूछे. पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र के दीघा विस क्षेत्र में आने वाले इस क्षेत्र को तीन वर्ष पहले विकास के नाम पर विस्थापित किया गया.
पुश्तैनी जमीन ले ली गयी. मगर, जहां बसाया गया, वहां आज तक कोई बुनियादी सुविधा नहीं मिली. इस क्षेत्र में आज भी लोग खुले में शौच जाने को मजबूर हैं.
तीन साल पहले क्षेत्र में सरकार की ओर से कुछ शौचालयों का निर्माण कराया गया था, लेकिन काम इतना खराब हुआ कि लोग एक दिन भी उपयोग नहीं कर सके. पीने के पानी के लिए गंगा पाथ-वे निर्माण का काम कर रही कंपनी की बोरिंग के चलने का इंतजार करना पड़ता है. प्रधानमंत्री आवास योजना का भी लाभ नहीं मिला.
हर साल बाढ़ की चपेट में आने की समस्या रहती है. हम बात कर रहे हैं नकटा दियारा के लगभग एक हजार से अधिक परिवारों की, जहां लगभग पांच हजार लोग रहते हैं. यहां आज भी बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है, लेकिन वहां के लोग इतने जिंदादिल हैं कि चुनावी हवा के सवाल पर मुस्कुराते हुए जवाब देते हैं, वोट तो हम लोग विकास के नाम पर ही देंगे, जातिवाद पर नहीं.
1. राजधानी के पास रहते हैं, लेकिन स्थिति गांव से भी बदतर
2. इस क्षेत्र को आज तक कोई बुनियादी सुविधा नहीं मिली
अगर एक समस्या होती, तो बात करते. सरकारी काम के नाम पर कुछ नहीं हुआ. एक विधायक कोटे से भवन का निर्माण का निर्माण हुआ, इसमें पानी से लेकर शौचालय की सुविधा खराब है. गंगा पाथ-वे निर्माण के लिए एजेंसी के लिए हुई बोरिंग से पानी लाना होता है. ऐसे में सरकारों के अाने-जाने से हमें कोई फर्क नहीं पड़ता.
– धर्मदेव राय, स्थानीय निवासी
2016 के कुछ शौचालय का निर्माण किया गया था. काम की गुणवत्ता बेहद खराब थी. दरवाजा तक नहीं लगा था. उस समय ही शौचालय खराब हो गये. एक बोरिंग के भरोसे पांच हजार की आबादी बसर करती है. कई हैंडपंप खराब पड़ हैं. हमारी समस्याओं को सुनने ही कोई नहीं आता. सांसद को हम लोगों ने देखा ही नहीं है.
– अशोक महतो, स्थानीय निवासी
रेलवे ने हम लोगों को बसाने के लिए करोड़ रुपये दिये थे. किसी सुरक्षित स्थान पर हमें घर दिया जाये. इसके लिए 96 करोड़ से अधिक राशि राज्य सरकार को भुगतान की गयी थी, लेकिन अाज हम लोगों की स्थिति देख लीजिए. बाढ़ का दंश हम लोगों का पीछा नहीं छोड़ रहा है.
– बैजनाथ, स्थानीय निवासी
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