बिहार और उड़ीसा के विश्वविद्यालय आएं आगे
Updated at : 06 Apr 2019 4:56 AM (IST)
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पटना : राजभवन में नैक विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के समापन समारोह में कहा गया कि उच्च शिक्षा क्षेत्र में शोध एवं अनुसंधान पर कुछ खास विश्वविद्यालयों के एकाधिकार को तोड़ने के लिए बिहार व उड़ीसा जैसे राज्यों के विश्वविद्यालयों को आगे आना चाहिए. समापन सत्र में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद्, नई […]
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पटना : राजभवन में नैक विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के समापन समारोह में कहा गया कि उच्च शिक्षा क्षेत्र में शोध एवं अनुसंधान पर कुछ खास विश्वविद्यालयों के एकाधिकार को तोड़ने के लिए बिहार व उड़ीसा जैसे राज्यों के विश्वविद्यालयों को आगे आना चाहिए.
समापन सत्र में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली के अध्यक्ष डाॅ बीबी कुमार ने कहा कि केंद्रीय एजेंसियों से सहयोग प्राप्त किये बिना उच्च शिक्षा संस्थानों का समग्र विकास संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि बिहार के छात्र एवं शिक्षकों में असीम प्रतिभाएं है. यहां के विद्यार्थी बाहर के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर बेहतर प्रदर्शन करते हैं.
आधारभूत संरचना मुहैया कराएं
आवश्यकता है कि इन्हें अपने राज्य के विश्वविद्यालयों में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिये पुस्तकालय एवं प्रयोगशाला आदि आधारभूत संरचना मुहैया करायी जाये. नैक प्रत्ययन आज सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के लिए प्राथमिक एवं मूलभूत जरूरत बन गया है. इसी आधार पर यूजीसी ‘रूसा’ एवं अन्य केंद्रीय शैक्षणिक एजेंसियों से वित्तीय सहयोग प्राप्त होता है.
समापन कार्यक्रम में राज्यपाल के प्रधान सचिव विवेक कुमार सिंह, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो एसके सिंह,ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के प्रतिकुलपति डॉ जयगोपाल सहित अन्य वक्ताओं ने अपनी बात रखी.
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