बिहार में हर रोज निकल रहा 30 हजार किलो मेडिकल वेस्ट
Updated at : 18 Mar 2019 9:38 AM (IST)
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सावधान! बायो मेडिकल वेस्ट वातावरण के लिए सबसे खतरनाक पटना : बिहार में रोजाना 30 हजार किलोग्राम से अधिक बायो मेडिकल वेस्ट (चिकित्सीय कचरा) निकल रहे हैं. इसमें पटना शहर की भागीदारी संभवत: 10 से 12 फीसदी की है. यह मेडिकल वेस्ट आबोहवा के लिए खतरा है. मेडिकल वेस्ट की ये मात्रा भी बेहतर पर्यावरण […]
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सावधान! बायो मेडिकल वेस्ट वातावरण के लिए सबसे खतरनाक
पटना : बिहार में रोजाना 30 हजार किलोग्राम से अधिक बायो मेडिकल वेस्ट (चिकित्सीय कचरा) निकल रहे हैं. इसमें पटना शहर की भागीदारी संभवत: 10 से 12 फीसदी की है. यह मेडिकल वेस्ट आबोहवा के लिए खतरा है. मेडिकल वेस्ट की ये मात्रा भी बेहतर पर्यावरण के लिए चिंताजनक मानी जा रही है.
जांच के लिए सैंपल लिये
मेडिकल वेस्ट में सबसे ज्यादा खतरनाक रक्त और यूरिन जांच के लिए लिये गये सैंपल हैं. इसके अलावा तरल और धातु से बने मेडिकल उपकरण जिनके अपघटन या विनिष्टीकरण के कोई खास उपाय अभी तक नहीं किये गये हैं.
हालांकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ऐसे मेडिकल संस्थानों पर लगातार शिकंजा कस रहा है. इससे मेडिकल कचरा पिछले एक साल में काफी कम हुआ है. गौरतलब है कि दो साल पहले तक समूचे प्रदेश में रोजाना 48 हजार किलोग्राम मेडिकल वेस्ट निकलता था. जानकारी हो कि मेडिकल वेस्ट रेड, ब्लू और येलो कलर में वर्गीकृत हैं.
मनुष्यों में मेडिकल वेस्ट में रक्त, ऊतक और यूरिन सैंपल सबसे ज्यादा खतरनाक होते हैं. यह वातावरण में फैलने वाली बीमारियों को और जटिल बनाते हैं, क्योंकि ये स्वतंत्र रूप से वातावरण में हानिकारक रासायनिक अभिक्रिया करते हैं. इससे बीमारियां तेजी से विस्तार पाती हैं.
जानवरों एवं पक्षियों मेंखुले में फेंकने पर मेडिकल कचरे सबसे ज्यादा जानवर व पक्षियों के संपर्क में आते हैं. शहर में इसी वजह से जानवर असामान्य तौर पर मरते देखे जा सकते हैं.
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक चिकित्सा संस्थानों से निकलने वाले जैव-चिकित्सीय कचरा संक्रामक प्रकृति का होता है. जिनके व्यवस्थित निबटान नहीं करने से कई प्रकार के संक्रामक रोग फैलने की संभावना रहती है. जीव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली में ऐसे जैव चिकित्सा अपशिष्ट का निपटान ‘सामूहिक उपचार केंद्र’ में किया जाना जरूरी है. राज्य में वर्तमान में तीन सामूहिक उपचार केंद्र पटना, भागलपुर और मुजफ्फरपुर में स्थापित हैं.
नियमों का पालन नहीं करने वालों को नोटिस
चिकित्सीय कचरे पर
पाबंदी के लिए नियम बने हुए
हैं. उनका पालन कराया जा रहा है. ऐसे मेडिकल इंस्टीट्यूट इसका पालन नहीं कर रहे हैं, उन्हें बंद करने के नोटिस दिये जा रहे हैं. चिकित्सीय कचरा मानव स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित करता है.
– नवीन कुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक, मेडिकल वेस्ट, बिहार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पटना
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