फुलवारीशरीफ का नोहसा गांव विकास से कोसों दूर
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 06 Feb 2019 5:03 AM
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फुलवारीशरीफ : आपको सुनकर बड़ा ही अजीब और अटपटा लगा होगा अपार्टमेंट वाला गांव. यह कैसा गांव है भला. फुलवारीशरीफ शहर के बाद इसी नोहसा गांव से ग्रामीण इलाकों की शुरुआत होती है. छह- सात साल पूर्व नोहसा गांव भी ठीक वैसा ही दिखता था जैसा सारे गांव दिखते हैं, लेकिन हाल के कुछ वर्षों […]
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फुलवारीशरीफ : आपको सुनकर बड़ा ही अजीब और अटपटा लगा होगा अपार्टमेंट वाला गांव. यह कैसा गांव है भला. फुलवारीशरीफ शहर के बाद इसी नोहसा गांव से ग्रामीण इलाकों की शुरुआत होती है. छह- सात साल पूर्व नोहसा गांव भी ठीक वैसा ही दिखता था जैसा सारे गांव दिखते हैं, लेकिन हाल के कुछ वर्षों में इस गांव में बनने वाले एक के बाद एक लगातार दर्जनों अपार्टमेंट की झड़ी लग गयी, जो अनवरत जारी है.
नोहसा गांव अब अपार्टमेंट वाला गांव कहलाने लगा है. यहां इन अपार्टमेंट्स में रहने वाले लोगों के लक्जरी वाहनों और डिजायनर कपड़ों की चमक- दमक के बावजूद यहां की सड़कें उबड़- खाबड़ हैं. लोग बताते हैं कि स्थानीय जन प्रतिनिधियों ने अपार्टमेंट बनाने वाले लोगों के सिर ही इन खराब सड़क की बदहाली का ठीकरा फोड़ दिया है. गांव अपार्टमेंट वाला है इतना ही नहीं इस गांव के चारों ओर रिहायशी कॉलोनियां भी हैं.
अपार्टमेंट्स और कॉलोनियों में रहने वालों में बड़े- बड़े हाकिम व व्यापारी भी हैं, लेकिन किसी को भी इस गांव के विकास से कोई मतलब नहीं रह गया है. इन बड़े- बड़े लोंगो के पास दिग्गज नेताओं का बराबर आना- जाना भी लगा रहता है. गांव की बदहाली की चर्चा भी होती है, लेकिन विकास की बातें सिर्फ चाय- पकौड़े तक ही सीमित रह जाती हैं.
सांसद आदर्श ग्राम योजना में अली अनवर ने गोद लिया था
इस गांव में न ही पक्की सड़क है और न ही जल निकासी के लिए कोई बड़ा नाला. नोहसा गांव में बड़ी-बड़ी इमारतें देखने को मिलती हैं, लेकिन सड़क नाम का कोई चीज नहीं.
देखा जाए, तो वर्तमान सरकार या पूर्व सरकार सरकार का इस गांव पर कभी कोई ध्यान नहीं गया. सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत इस गांव को अली अनवर ने गोद लिया था, परंतु यहां के लोगों का कहना है कि वे आज तक इस गांव में कभी झांकने भी नहीं आए.
स्थानीय विधायक ने भी नोहसा की ओर ज्यादा ध्यान नहीं दिया. स्थानीय सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री रामकृपाल यादव भी इस गांव में आए थे. उन्होंने इस गांव की सड़क को देख कर लोगों को आश्वासन दिया था कि यहां की सड़कों के जल्द- से- जल्द पक्कीकरण के लिए वे सरकार से बात करेंगे. इस गांव की सड़कें नाले में तब्दील हो गयी हैं.
गलियों में नाले का पानी बहता रहता है, तो लोगों ने ईंट रखकर उसी के सहारे पार हो जाते हैं. इसी गंदे रास्ते से चलने को लोग विवश हैं. लोगों का कहना है कि इलेक्शन के समय मंत्री विधायक बड़े-बड़े वादे करते हैं और इलेक्शन के बाद कोई पूछने भी नहीं आता.
वहीं लोगों का कहना है कि हमें पवित्र महीने रमजान में भी इसी गंदे रास्ते से आना-जाना पड़ता है. स्थानीय पंचायत नोहसा पंचायत का नाम भी इसी नोहसा गांव के नाम पर ही है फिर भी मुखिया जी इधर झांकने नहीं आते.
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