बिहार में महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर बढ़ रहा है विवाद, राजद 22 सीटों से कम पर नहीं मान रहा
Updated at : 29 Jan 2019 6:55 AM (IST)
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नयी दिल्ली : बिहार में महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है. महागठबंधन में शामिल दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर अब तक सहमति नहीं बन पायी है. बिहार में लोकसभा की 40 सीटें हैं और राजद 22 सीटों से कम पर चुनाव लड़ने को तैयार नहीं है. वहीं, कांग्रेस […]
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नयी दिल्ली : बिहार में महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है. महागठबंधन में शामिल दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर अब तक सहमति नहीं बन पायी है. बिहार में लोकसभा की 40 सीटें हैं और राजद 22 सीटों से कम पर चुनाव लड़ने को तैयार नहीं है. वहीं, कांग्रेस कम से कम 12 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है.
जबकि राष्ट्रीय लोक समता पार्टी 5, माकपा और भाकपा दो-दो, भाकपा-माले तीन, जीतन राम मांझी की पार्टी हम दो और मुकेश सहनी की पार्टी दो सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा पेश कर रही है. कई दौर की बातचीत के बावजूद महागठबंधन दलों के बीच सीटों को लेकर समझौता नहीं हो पाया है. कांग्रेस के सूत्रों का कहना है कि पहले ही राजद को बता दिया गया है कि कांग्रेस 12 सीटों से कम पर चुनाव नहीं लड़ेगी.
बिना राजद के भी छोटे सहयोगी दलों के साथ चुनाव मैदान में उतर सकती है कांग्रेस
कांग्रेस के फाॅर्मूले के अनुसार राजद 18, कांग्रेस 12, रोलोसपा 4, वामपंथी दलों के एक-एक और मांझी की पार्टी के लिए एक और शरद यादव के लिए दो सीटें दी जा सकती हैं. लेकिन राजद किसी भी कीमत पर 20 सीटों से कम पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार नहीं है.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता का कहना है कि पार्टी राजद के दवाब में नहीं झुकेगी. कांग्रेस बिना राजद के भी छोटे सहयोगी दलों के साथ चुनाव मैदान में उतर सकती है. प्रियंका गांधी के सक्रिय राजनीति में कदम रखने के बाद कांग्रेस आक्रामक रवैया अपना सकती है.
पार्टी का मानना है कि प्रियंका के आने से पूरे देश में कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनेगा और इससे अल्पसंख्यक और दलित वर्ग का झुकाव कांग्रेस की ओर हो सकता है. ऐसे में कांग्रेस की बजाय अपना जनाधार बनाये रखने के लिए राजद को कांग्रेस की जरूरत अधिक है.
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की 3 फरवरी को गांधी मैदान में होने वाली रैली के बाद पार्टी सीट बंटवारे को लेकर अपना रुख साफ करेगी, लेकिन सम्मानजनक सीटें नहीं मिलने की स्थिति में कांग्रेस उत्तर प्रदेश की तर्ज पर अकेले चुनाव लड़ने का फैसला ले सकती है. राज्य के कई नेता भी राजद के साथ चुनाव लड़ने के लेकर इच्छुक नहीं है. इन नेताओं का मानना है कि अपनी अलग पहचान बनाकर पार्टी एक बार फिर बिहार में नंबर एक पार्टी हो सकती है.
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