पटना : आर्सेनिक का भय दिखा पानी का चल रहा काला कारोबार

Updated at : 14 Jan 2019 8:25 AM (IST)
विज्ञापन
पटना : आर्सेनिक का भय दिखा पानी का चल रहा काला कारोबार

राजदेव पांडेय पटना : बिहार के गंगेटिक बेल्ट में इन दिनों आर्सेनिक का भयादोहन कर स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण पानी के नाम पर करोड़ों का काला कारोबार चल रहा है. ये मिनरल वाटर प्लांट बिना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति के चल रहे हैं. बक्सर से भागलपुर के बीच 200 से अधिक मिनरल वाटर के बड़े […]

विज्ञापन
राजदेव पांडेय
पटना : बिहार के गंगेटिक बेल्ट में इन दिनों आर्सेनिक का भयादोहन कर स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण पानी के नाम पर करोड़ों का काला कारोबार चल रहा है. ये मिनरल वाटर प्लांट बिना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति के चल रहे हैं.
बक्सर से भागलपुर के बीच 200 से अधिक मिनरल वाटर के बड़े अवैध प्लांट स्थापित हैं. अब बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इन पर शिकंजा कसने जा रहा है. जानकारी के मुताबिक ये प्लांट पिछले दो से तीन सालों के बीच स्थापित किये गये हैं, जो गंगा नदी के पांच किलोमीटर के दायरे में बसे सैंकड़ों गांवों में पानी आपूर्ति कर रहे हैं.
गंगा के किनारे बसे ये वे गांव हैं, जहां के भू-जल में आर्सेनिक की मात्रा भयावह स्तर पर है. वैज्ञानिक अनुसंधान में यह बात साफ हो चुकी है कि आर्सेनिक युक्त पानी कैंसर और दूसरी बीमारियों की वजह भी है. ऐसे में फर्जी नवनिवेशकों ने मौका ताड़ा और यहां ताबड़तोड़ वाटर प्लांट खड़े किये जाने लगे. यह क्रम अब भी जोरों पर है. अलबत्ता यह बात तय है कि जिंदगी बचाने के लिए भोले-भाले गांव के लोग ऐसा पानी पी रहे हैं, जिसकी गुणवत्ता कभी परखी नहीं गयी.
एक के पास भी नहीं है लाइसेंस
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के विशेष सर्वे में पता चला कि 200 से अधिक मिनरल वाटर प्लांट संचालकों में से एक ने भी लाइसेंस या प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सहमति नहीं ली है. फिलहाल कथित मिनरल वाटर की गुणवत्ता क्या है, अब तक इसका कोई अता-पता नहीं है
पटना में हालात जुदा नहीं
पटना में मिनरल वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की संख्या भी अनिश्चित है. यहां करीब 24 प्लांटों के लाइसेंस दिये गये हैं. हालांकि, बिना लाइसेंस वाले प्लांटों की स्थापना लगातार हो रही है. इस तरह की सूचना के आधार पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बिना लाइसेंस के चल रहे प्लांट के लिए सर्वेक्षण शुरू कर चुका है.
वाटर ट्रीटमेंट के नाम पर लगाये जा रहे 95% प्लांट केवल चिल वाटर बेचते हैं. चूंकि वह गहरे कुएं से लिया जाता है, इसलिए साफ होता है.
पैकेज्ड या केन के जरिये घरों में बांटे जा रहे पानी के लिए आइएसओ और एफएसएसएआइ सर्टिफिकेट जरूरी, एक दो को छोड़ दें तो पटना में ये सर्टिफिकेट संभवत: किसी के पास नहीं हैं
आर्सेनिक प्रभावित गंगेटिक बेल्ट में बक्सर से भागलपुर के बीच दो सौ से अधिक मिनरल वाटर प्लांट चल रहे हैं. इनमें एक के पास भी लाइसेंस नहीं हैं. सीधे तौर पर यह भयादोहन है. अब इन प्लांट संचालकों पर वैधानिक कार्रवाई की जायेगी. उनके प्लांट के पानी की गुणवत्ता भी जांची जायेगी.
-डाॅ अशोक कुमार घोष, चेयरमैन, बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन