पटना : हाइकोर्ट ने पूछा-पूर्व मुख्यमंत्रियों को जिंदगी भर के लिए क्यों मिले बंगला, नोटिस जारी

Updated at : 09 Jan 2019 9:33 AM (IST)
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पटना : हाइकोर्ट ने पूछा-पूर्व मुख्यमंत्रियों को जिंदगी भर के लिए क्यों मिले बंगला, नोटिस जारी

पटना : पटना हाइकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन आवास और उसके रख-रखाव के लिए असीमित खर्च से जुड़े मामले पर नोटिस जारी किया है. अदालत ने 11 फरवरी तक जवाब देने को कहा है. उसी दिन मामले पर सुनवाई भी होगी. अदालत ने सरकार की तरफ से मुख्य सचिव को भी इस बाबत जवाब […]

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पटना : पटना हाइकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन आवास और उसके रख-रखाव के लिए असीमित खर्च से जुड़े मामले पर नोटिस जारी किया है. अदालत ने 11 फरवरी तक जवाब देने को कहा है. उसी दिन मामले पर सुनवाई भी होगी. अदालत ने सरकार की तरफ से मुख्य सचिव को भी इस बाबत जवाब देने का आदेश दिया है कि आजीवन आवास के लिए पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगला मुहैया कराने वाली बिहार विशेष सुरक्षा दल अधिनियम की संबंधित धाराओं को असंवैधानिक क्यों नहीं घोषित की जाये?
मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश ए पी शाही व न्यायमूर्ति अंजना मिश्रा की खंडपीठ ने स्वतः दायर हुए एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए पूछा कि जब पूर्व मुख्यमंत्रियों को उनके पटना स्थित निजी आवास में बिहार राज्य विशेष सुरक्षा कानून के तहत सुरक्षा मुहैया करायी जाये, तब वैसी परिस्थिति में वे सब निजी आवास में क्यों नहीं रह सकते?
सुप्रीम कोर्ट की एक व्यवस्था को बनाया आधार : खंडपीठ ने अपने आदेश का आधार सुप्रीम कोर्ट की एक व्यवस्था को बनाया है. उस मामले में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों को मिलने वाली आजीवन मुफ्त आवासीय बंगलों के आवंटन को सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक करार देते हुए इस फैसले को देश के सभी सूबे में लागू होने का भी निर्देश दिया था
मुख्य न्यायाधीश एपी शाही ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को मुफ्त में बंगला आवंटन को जब सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक करार दिया है, तब पटना कोर्ट भी ऐसे अवैध कानून को नहीं रहने दे सकता है.
सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता ललित किशोर ने कहा कि इस मामले में किसी पूर्व मुख्यमंत्री को अभी नोटिस जारी नहीं किया जाये. इस दौरान मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ से उनकी कई बार जोरदार बहस हुई :-
महाधिवक्ता ( एजी) : सरकार ने कानून के तहत लिया पूर्व मुख्यमंत्रियों को बंगला दिया गया है.हाइकोर्ट : यह पहली नजर में संविधान के खिलाफ है. खासकर जब इसी मुद्दे पर लोक प्रहरी वाले मामले में सुप्रीम कोर्ट ऐसे कानूनी प्रावधान को असंवैधानिक मान चुकी है.
एजी : कानून बिहार विधानमंडल ने बनाया है.
हाइकोर्ट : इस देश में संविधान से ऊपर कुछ नहीं. जिसे खुद इस देश के नागरिकों ने अपनाया है.एजी : अगर कोर्ट को कानूनी प्रावधान अवैध लगता है तो फिर मुख्यमंत्री को नोटिस करने की क्या जरूरत ? उनकी तरफ से 7 सर्कुलर रोड का आवंटित बंगला छोड़ दिया गया है.
हाइकोर्ट : केवल छोड़ने से काम नहीं चलेगा. किसी भी आवंटी ने कहां कहा है कि वे सरकारी बंगले के आजीवन उपभोग को गैरकानूनी समझते हैं. सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को नोटिस देना जरूरी है.
पटना : पटना हाइकोर्ट ने प्राधिकृत टेस्टिंग स्टेशन द्वारा वाहनों के फिटनेस प्रमाणपत्र निर्गत करने के पहले मोटरयान निरीक्षक की ओर से काउंटर साइन किये जाने संबंधी सरकार के आदेश पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार से चार सप्ताह में जवाब तलब किया है. न्यायमूर्ति मोहित कुमार शाह की एकलपीठ ने मुरारी ऑटो की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई के बाद यह निर्देश दिया है.
अदालत ने माना कि केंद्रीय मोटर वाहन नियमावली के नियम 62 (1) के फाॅर्म 38 के अनुसार निरीक्षण प्राधिकारी या अधिकृत परीक्षण स्टेशनों को फिटनेस प्रमाणपत्र देने के लिए प्राधिकृत किया गया है. लेकिन, पटना के मोटर वाहन निरीक्षक ने फिटनेस प्रमाणपत्र में मोटर वाहन निरीक्षक के काउंटर साइन से प्रमाणपत्र जारी करने का आदेश जारी किया है. अदालत ने इस आदेश पर रोकलगा दी है.
1. सतीश प्रसाद सिंह : 33/ए, हार्डिंग रोड
2. डॉ जगन्नाथ मिश्रा : 41, हार्डिंग रोड
3/4. लालू प्रसाद-राबड़ी देवी : 10 सर्कुलर रोड का एक बड़ा बंगला
5. नीतीश कुमार : 7 सर्कुलर रोड
6. जीतन राम मांझी: 12 एम, स्ट्रैंड रोड
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