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महागठबंधन : सहयोगियों का 31 सीटों पर दावा, कैसे सुलझेगा सीटों के बंटवारे का हिसाब

Updated at : 09 Jan 2019 8:06 AM (IST)
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महागठबंधन : सहयोगियों का 31 सीटों पर दावा, कैसे सुलझेगा सीटों के बंटवारे का हिसाब

पटना : महागठबंधन में सीटों के बंटवारे का गणित सुलझाना कठिन साबित हो रहा है. अब तक कोई फाॅर्मूला नहीं बना सका है, जिसके जरिये इस कठिन सवाल को सुलझाया जा सके. महागठबंधन के सबसे बड़े प्लेयर राजद को इस सवाल का हल ढूंढ़ने में काफी मशक्त करनी होगी. लोकसभा की 40 सीटों में से […]

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पटना : महागठबंधन में सीटों के बंटवारे का गणित सुलझाना कठिन साबित हो रहा है. अब तक कोई फाॅर्मूला नहीं बना सका है, जिसके जरिये इस कठिन सवाल को सुलझाया जा सके. महागठबंधन के सबसे बड़े प्लेयर राजद को इस सवाल का हल ढूंढ़ने में काफी मशक्त करनी होगी.
लोकसभा की 40 सीटों में से 31 पर सहयोगियों ने दावा ठोंक रखा है. हालांकि, गठबंधन में शामिल दलों के नेता कहते हैं कि सोमवार को महागठबंधन की हुई बैठक में सिर्फ रणनीति पर बात हुई कि कैसे 40 सीटों पर जीत दर्ज की जाये. सीट के नंबर पर कोई बात नहीं हुई है.
राज्य की 40 लोकसभा सीटों में से महागठबंधन के पास राजद के पास चार सीटें हैं. लेकिन, मधेपुरा के सांसद पप्पू यादव पहले ही पार्टी से बगावत कर चुके हैं. कांग्रेस का भी दो सीटों पर कब्जा है. एनडीए छोड़ महागठबंधन में शामिल हुई रालोसपा के भी दो सांसद हैं.
महागठबंधन के नेता सोमवार को पहली बार औपचारिक तौर पर मिले थे. हालांकि, बैठक के बाद यह कहा गया कि इसमें सीट शेयरिंग पर कोई बात नहीं हुई. खरमास के बाद पर इस पर चर्चा होगी. बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि कैसे चालीस की चालीस सीटें जीती जाये. जो जहां मजबूत होंगे, वह वहां से चुनाव लड़ेगा.
कैसे सुलझेगा सीटों के बंटवारे का िहसाब
जानकार कहते हैं कि कांग्रेस ने 15 सीटों पर दावा ठोंका है, जबकि रालोसपा और हम ने सात-सात सीटों पर अपनी दावेदारी जतायी है. सन आॅफ मल्लाह ने दो सीटें मांगी हैं. संख्या के अनुसार यह 31 हो जाता है. चर्चाओं पर यकीन करें तो राजद 20 से 22 सीटों पर चुनाव लड़ेगा. दावेदारों की गिनती को सही माना जाये तो राजद के लिए मात्र 9 सीटें बचती हैं. राजद महागठबंधन का सबसे बड़ा प्लेयर है.
वोट बैंक के लिहाज से सबसे अधिक मजबूत भी वही है. राजद सुप्रीमो अभी जेल में हैं, एेसे में सीटों के गणित का फाॅर्मूला कौन निकालेगा, यह बड़ा प्रश्न है. लालू प्रसाद की कमी राजद को खलती है. लालू प्रसाद राजनीति रूपी जहाज के ऐसे कप्तान हैं, जो अपने कंपास के जरिये राजनीतिक भंवर में फंसे जहाज को निकाल सकते हैं.
अभी इस पर कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है. राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी कहते हैं कि सोमवार की बैठक में सीट शेयरिंग पर कोई बात नहीं हुई है. सिर्फ इस पर बात हुई कि कैसे सभी सीटों पर जीत दर्ज हो.
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