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पटना : आरटीइ कोटे में सर्वाधिक एडमिशन

Updated at : 03 Jan 2019 9:33 AM (IST)
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पटना : आरटीइ कोटे में सर्वाधिक एडमिशन

बेहतर कदम. 200 से अधिक स्कूलों में हुआ 3337 बच्चों का एडमिशन पटना : शिक्षा का अधिकार (आरटीइ) अधिनियम के तहत पिछले वर्षों के दौरान भले ही कम एडमिशन हुए हों, लेकिन हाल के सत्रों के दौरान कोटे की सीटों पर एडमिशन की संख्या बढ़ी है. वर्ष 2011 में आरटीइ लागू हुआ. तब यहां के […]

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बेहतर कदम. 200 से अधिक स्कूलों में हुआ 3337 बच्चों का एडमिशन
पटना : शिक्षा का अधिकार (आरटीइ) अधिनियम के तहत पिछले वर्षों के दौरान भले ही कम एडमिशन हुए हों, लेकिन हाल के सत्रों के दौरान कोटे की सीटों पर एडमिशन की संख्या बढ़ी है. वर्ष 2011 में आरटीइ लागू हुआ. तब यहां के स्कूलों में एडमिशन की संख्या तीन अंकों में थी, जो मौजूदा सत्र में चार अंकों में और तीन हजार से अधिक पहुंच गयी है.
अभिभावकों की मानें, तो जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग के प्रयास से उनके बच्चों को भी प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन मिल रहा है. लाभुकों में अधिकांशत: रिक्शा चालक, वेंडर, मजदूर व कमजोर तबके के परिवारों के बच्चे शामिल हैं.
साल-दर-साल बढ़ते गये एडमिशन :
आरटीइ के तहत प्राइवेट स्कूलों में कमजोर एवं अभिवंचित वर्ग के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित होती हैं. इन सीटों पर पहले साल (2011) में भले ही एडमिशन सबसे कम रहा, लेकिन साल-दर-साल इसमें वृद्धि होती गयी. तब से अब तक सत्र 2014-14 तथा 2016-17 में एडमिशन में थोड़ी कमी आयी थी. लेकिन उसके बाद पुन: यह संख्या बढ़ी.
शिक्षा का अधिकार (आरटीइ) अधिनियम के तहत कोटे की सीटों पर नामांकित बच्चों के अभिभावकों की मानें, तो यह अधिनियम लागू होने से उनके बच्चों के सपनों को पंख लग गये हैं. बच्चों को बेहतर शिक्षा देने का उनका सपना भी अब साकार होता नजर आ रहा है.
बड़े स्कूलों में पढाई का असर बच्चों पर साफ नजर आता है. रहन-सहन व बोल-चाल में बदलाव को देख कर काफी खुशी मिलती है. उन्होंने बताया कि अभी जिस हाल में परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं, ऐसे में किसी सरकारी स्कूल को छोड़ किसी बड़े स्कूल में अपने बच्चों को पढ़ाने की सोच भी नहीं सकते थे. लेकिन आरटीइ के प्रावधानों ने सबकुछ आसान कर दिया है.
केस-1
शशि कुमार चाय विक्रेता हैं. क्राइस्ट चर्च ड्यूसेशन स्कूल के गेट पर ही उनकी स्टॉल है. वह बताते हैं कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू कर हम गरीबों को बेहतर मौका दिया गया, जिसकी बदौलत वर्ष 2011 में क्राइस्ट चर्च ड्यूसेसन स्कूल में बेटी का एडमिशन हो सका. यह नियम नहीं होता, तो छोटे प्राइवेट स्कूल में भी अपनी बेटी को पढ़ाने की नहीं सोच सकता था. मेरी बेटी सातवीं क्लास में है.
केस-2
राधा देवी एक गृहणी हैं, उनके पति बबलू मजदूरी करते हैं. शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत पिछले साल भारत एकेडमी में उनकी बेटी का एडमिशन हुआ है.
वह बताती हैं कि स्कूल में नि:शुल्क पढ़ाई के अलावा कॉपी, किताब व स्कूल ड्रेस भी उसे उपलब्ध कराया जाता है. उसकी पढ़ाई का खर्च हमें नहीं उठाना पड़ता. उसकी पढ़ाई ठीक से चल रही है. यह अधिनियम लागू होने से हमारा एक बड़ा सपना साकार हुआ है.
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