सचेत होने का वक्त, प्रदूषित हवा फेफड़े को कर रही खराब
Updated at : 27 Dec 2018 7:46 AM (IST)
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राजदेव पांडेय पटना : वर्ष 2018 बीतने को है. संभवत: पूरे साल एक भी दिन ऐसा नहीं रहा,जब पटना में अच्छी हवा बही हो. 2018 लगातार तीसरा ऐसा साल रहा, जब शहर अच्छी हवा के लिए तरस गया. दरअसल 2016 व 2017 में क्रमश: 3 व 2 दिन ही अच्छी हवा बही थी. अगर ऐसा […]
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राजदेव पांडेय
पटना : वर्ष 2018 बीतने को है. संभवत: पूरे साल एक भी दिन ऐसा नहीं रहा,जब पटना में अच्छी हवा बही हो. 2018 लगातार तीसरा ऐसा साल रहा, जब शहर अच्छी हवा के लिए तरस गया. दरअसल 2016 व 2017 में क्रमश: 3 व 2 दिन ही अच्छी हवा बही थी. अगर ऐसा ही रहा तो वह पीढ़ी जो अब आंखें खोल रही है,उसके लिए अच्छी हवा किसी जादूई वस्तु से कम नहीं होगी.
फिलहाल अच्छी हवा का झोंका पटना के लिए ‘दुर्लभ’ विषयवस्तु बन गयी है. यह संकट केवल पटना शहर के लिए ही नहीं है,बल्कि मुजफ्फरपुर और गया के लिए भी है. पटना सहित राज्य के शहरों की हवा के लिए बाल से भी महीन कण पीएम 2़ 5 व पीएम 10 सबसे बड़े सिरदर्द बन गये हैं. पटना में पीएम 2़ 5 की मात्रा सहन योग्य लिमिट से 10 गुनी तक बढ़ जाती है.
प्रदेश के तकरीबन सभी बड़े शहरों में अच्छी हवा के दिनों में लगातार हो रही कमी
शहरों का एयर क्वालिटी इंडेक्स
प्रदेश के मुख्य शहरों मसलन पटना, मुजफ्फरपुर और गया की हवा की गुणवत्ता किस तरह खराब हुई है,जिसे समझने के लिए पिछले चार माह के एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआइ)के आधिकारिक आंकड़े पर्याप्त हैं.
शहर भविष्य का संकट
शहर की हवा की गुणवत्ता खराब करने वाली चुनौती नाइट्रोजन डाइ-ऑक्साइड भी है. इसकी मात्रा अभी तो ज्यादा नहीं है, पर अगले दशक में इसके आंकड़े भयावह हालात पैदा कर सकते हैं.
2006-07 में नाइट्रोजन डाइ-ऑक्साइड की औसत मात्रा 50 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर रही, 2017-18 में 44़ 2 रही. 20 साल पहले न के बराबर मसलन 10 माइक्रो ग्राम पर क्यूबिक मीटर रही थी.
पीएम 10 की मात्रा (माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर में)
2006-07 117 (सहन योग्य लिमिट से दो गुनी)
2017-18 178 (सहन योग्य लिमिट से तीन गुनी)
किसी भी माह में राहत नहीं
अगस्त पटना और गया में एक भी दिन अच्छी हवा नहीं बही.मुजफ्फरपुर में अच्छी हवा केवल 14 दिन बही.
सितंबर पटना और गया में एक भी दिन हवा अच्छी नहीं बही. मुजफ्फरपुर में केवल तीन दिन बही अच्छी हवा.
अक्टूबर तीनों शहरों में एक भी दिन अच्छी हवा नहीं रही.
नवंबर इस माह भी पटना, मुजफ्फरपुर और गया में एक भी दिन अच्छी हवा नहीं बही.
दिसंबर तीनों शहरों में एक भी दिन हवा की गुणवत्ता अच्छी नहीं रही.
नोट: वर्ष 2018 का आंकड़ा अभी आधिकारिक तौर पर जारी नहीं हुआ है.
एक्सपर्ट व्यू
पटना की हवा निश्चित तौर पर खराब हुई है. बेशक पीएम 2़ 5 पटना के सामने ही नहीं, राज्य के दूसरे बड़े शहरों के लिए भी चुनौती बन गया है. इसको पार पाने में प्रभावी प्रयास करने होंगे. शहर की अाबोहवा में गैसीय असंतुलन अभी बिल्कुल नहीं है. इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है. हालांकि हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए आम लोगों से लेकर सरकारी एजेंसियों को मिलकर काम करना होगा.
– डा अशोक कुमार घोष, चैयरमेन, बिहार पॉल्यूशन कंट्राेल बोर्ड
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