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पटना : शहर की हवा को जहरीली बना रहे काला धुआं उगलने वाले डीजल वाहन

Updated at : 24 Dec 2018 7:05 AM (IST)
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पटना : शहर की हवा को जहरीली बना रहे काला धुआं उगलने वाले डीजल वाहन

पटना : पटना की सड़कों पर दौड़ने वाले 70 फीसदी डीजल वाहनों (इसमें सार्वजनिक बसें, वाणिज्यिक इस्तेमाल में आ रही टैक्सियां व ऑटो शामिल हैं) के पास पीयूसी (पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल) सर्टिफिकेट नहीं हैं. इसका खुलासा सेंटर फॉर एन्वॉयरमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) की एक स्टडी रिपोर्ट में हुआ. स्टडी रिपोर्ट के मुताबिक जिन वाहनों […]

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पटना : पटना की सड़कों पर दौड़ने वाले 70 फीसदी डीजल वाहनों (इसमें सार्वजनिक बसें, वाणिज्यिक इस्तेमाल में आ रही टैक्सियां व ऑटो शामिल हैं) के पास पीयूसी (पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल) सर्टिफिकेट नहीं हैं.
इसका खुलासा सेंटर फॉर एन्वॉयरमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) की एक स्टडी रिपोर्ट में हुआ. स्टडी रिपोर्ट के मुताबिक जिन वाहनों के पास पीयूसी प्रमाणपत्र मिले भी, उनमें से 83 फीसदी के पास गलत तरीके से जुटाये गये सर्टिफिकेट निकले. यही नहीं, 24 प्रतिशत पेट्रोल से चलने वाले वाहन के पास भी पीयूसी सर्टिफिकेट नहीं मिले.
सीड की तरफ से यह स्टडी जून माह में ही की गयी है. स्टडी रिपोर्ट से जुड़े ये तथ्य सीड की सीनियर प्रोग्राम ऑफिसर अंकिता ज्योति ने रविवार को औपचारिक बातचीत के दौरान साझा की. ज्योति ने बताया कि शहर में पीयूसी बनाने की प्रक्रिया बेहद खराब है. उन्होंने बताया कि सड़क पर बड़ी संख्या में ऐसे वाहन चल रहे हैं, जिनका जीवनकाल समाप्त हो चुका है या समाप्ति की कगार पर है. अंकिता के मुताबिक इसकी वजह से पटना में हवा की गुणवत्ता बदतर होती जा रही है.
ट्रैफिक पुलिस के सहयोग से किया गया पूरा
स्टडी ‘एसेसमेंट ऑफ वेहिकल्स कॉम्पल्यांस विथ द पीयूसी प्रोग्राम इन पटना’ के तहत की गयी. यह रिपोर्ट दो दिन तक किये गये ‘ऑन रोड पीयूसी टेस्ट ड्राइव’ पर आधारित है. सीड का यह अध्ययन पटना ट्रैफिक पुलिस के सहयोग से पूरा किया गया था. संबंधित पीयूसी टेस्ट सर्टिफाइड एजेंसी के साथ मिल कर पटना शहर के प्रमुख चौक-चौराहों व प्रमुख रास्तों पर किये गये. पटना के 70% डीजल वाहन बिना पीयूसी सर्टिफिकेट के रिपोर्ट के मुताबिक 16% वाहन दस साल से अधिक पुराने हैं
शहर की अधिकतर बसों के पास पीयूसी प्रमाणपत्र नहीं थे. यहां तक कि वे ऑन रोड पीयूसी टेस्ट में भी फेल साबित हुई.यही नहीं, टेस्ट की गयीं सभी बसों में से 35% के पास जरूरी उपकरण, जैसे पीयूसी टेस्ट के लिए अल्टेरनेटर आदि नहीं मिलेबिना भौतिक परीक्षण के जारी किये गये पीयूसी सर्टिफिकेट : सीड के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर रमापति कुमार ने बताया कि पटना शहर में पीयूसी टेस्ट के क्रियान्वयन और अनुपालन स्तर से जुड़ी गंभीर चिंताएं सामने आयी हैं. उन्होंने बताया कि अधिकतर वाहनों को बिना समुचित भौतिक परीक्षण व जांच के गलत तरीके अपनाकर पीयूसी सर्टिफिकेट जारी किये गये.
सीड ने गिनायीं ये सिफारिशें
पीयूसी सेंटर का नियमित ऑडिट हो. खामियों को दूर करने के लिए जुर्माना प्रक्रिया सख्ती से प्रभावी की जाये.
ट्रैफिक डिपार्टमेंट की क्षमताओं में इजाफे और प्रदूषण उत्सर्जन पर निगरानी के लिए फ्लाइंग इंस्पेक्टर की नियुक्ति हो.
निर्धारित जीवनकाल से ज्यादा चल रही पुरानी गाड़ियों को तत्काल सड़क से हटाया जाये. पीयूसी डाटा ट्रांसमिशन के लिए एक ऑनलाइन नेटवर्क की स्थापना की जाये.
पीयूसी सेंटर्स की नियमित निगरानी के लिए एक लोक शिकायत केंद्र स्थापित किया जाये, ताकि प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के दिखने पर कोई व्यक्ति, वहां शिकायत दर्ज करा सके.
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