पटना : अस्पतालों में रूई, धागा और दवाइयों की है किल्लत, पर अफसरों को चाहिए नयी गाड़ी
Updated at : 20 Dec 2018 9:22 AM (IST)
विज्ञापन

सरकारी अस्पतालों में जरूरी दवाएं नहीं, बाहर से महंगी दरों पर खरीद रहे मरीज आनंद तिवारी पटना : सूबे के सरकारी अस्पतालों में इन दिनों स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गयी है. दवा से लेकर रूई, स्लाइन और टांके लगाने के लिए धागा भी मरीज बाहर से खरीद रहे हैं. दूसरी तरफ सरकारी अस्पतालों […]
विज्ञापन
सरकारी अस्पतालों में जरूरी दवाएं नहीं, बाहर से महंगी दरों पर खरीद रहे मरीज
आनंद तिवारी
पटना : सूबे के सरकारी अस्पतालों में इन दिनों स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गयी है. दवा से लेकर रूई, स्लाइन और टांके लगाने के लिए धागा भी मरीज बाहर से खरीद रहे हैं. दूसरी तरफ सरकारी अस्पतालों में काम करने वाले अफसरों के ठाठ हैं. क्योंकि अफसरों को पुरानी गाड़ी रास नहीं आ रही है. अफसर नयी गाड़ियां खरीदने के लिए स्वास्थ्य विभाग पर दबाव बना रहे हैं. सरकारी अस्पताल के अफसरों ने एक प्रस्ताव बना कर विभाग को दिया है. इसमें नये वाहनों की मांगी की गयी है. हालांकि शासन-प्रशासन स्तर पर अनुमति नहीं मिली है.
अफसरों की मानें, तो वर्तमान में वह सूमो गाड़ी से चलते हैं, जो काफी पुरानी व जर्जर हो गयी है. इसे बदल कर नयी गाड़ी देने की मांग की गयी है. नयी गाड़ियों की मांग अभी हाल ही में रिव्यू मीटिंग व स्वास्थ्य विभाग की एक बैठक में सभी मेडिकल कॉलेज के अफसरों ने उठायी थी.
पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल सहित शहर के सभी छोटे सरकारी अस्पताल व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में इन दिनों दवाओं की भारी किल्लत चल रही है. इतना ही नहीं पीएमसीएच, गर्दनीबाग, राजेंद्र नेत्रालय व राजवंशी नगर हड्डी अस्पताल में रूई, धागा, स्लाइन आदि की भारी किल्लत चल रही है. मरीजों को बाहर से सर्जिकल आइटम खरीदने पड़ रहे हैं. अगर मरीज सर्जिकल आइटम खरीदने में असमर्थ हैं, तो उनका ऑपरेशन भी टाल दिया जाता है.
ग्रामीण अस्पतालों में जर्जर हो चुकी हैं एंबुलेंस
…नतीजा एंबुलेंस पर न तो जीवन रक्षक उपकरण हैं और न ही जरूरी दवाएं. हालत यह है कि कई ऐसे एंबुलेंस व स्ट्रेचर हैं, जिनके गद्दे तक फटे हैं.
क्या कहते हैं अधिकारी
स्वास्थ्य विभाग की बैठक व रिव्यू मीटिंग में कई बार गाड़ियों का मुद्द उठाया जा चुका है. हालांकि जो गाड़ियां बनने लायक हैं, उनको बनाया जा रहा है और जो खराब हो चुकी हैं, उन्हें बंद किया जा रहा है. लेकिन हमारी प्राथमिकता मरीज हैं, उनको सही इलाज, उपचार और सभी दवाएं मिलें, इस दिशा में काम किया जा रहा है. यही वजह है कि 15 जनवरी से रूबैला सहित अन्य तरह के टीका लगाये जा रहे हैं.
-डॉ पीके झा, सिविल सर्जन
जो दवाएं खत्म हुई हैं, उनका प्रस्ताव बना कर हमने स्वास्थ्य विभाग को दे दिया है. विभाग ने बीएमएसआइसीएल को भेज दिया है. खरीदारी की प्रक्रिया चल रही है. जल्द ही दवाएं उपलब्ध होंगी.
डॉ राजीव रंजन प्रसाद, अधीक्षक, पीएमसीएच
गाड़ियों का मुद्दा कई बार उठाया जा चुका है. लेकिन वर्तमान समय में किसी काम से मैं विदेश आया हूं. वहां से वापस आने के बाद बात होगी.
संजय कुमार, प्रधान सचिव, स्वास्थ्य विभाग
पीएमसीएच के जूनियर डॉक्टरों ने किया खुलासा
सरकारी अस्पतालों में रूई, बैंडेज, धागे, दवाएं, स्लाइन, इन्जेक्शन आदि की किल्लत को लेकर जूनियर डॉक्टरों ने मंगलवार को मोर्चा खोल दिया है. अस्पताल में सर्जिकल आइटम खत्म होने से नाराज जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल तक की चेतावनी दे डाली. पीएमसीएच की तर्ज पर एनएमसीएच, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, भागलपुर आदि मेडिकल कॉलेजों के जूनियर डॉक्टरों ने भी इमरजेंसी में दवाएं खत्म होने की बात कही है. जूनियर डॉक्टर आर-पार की लड़ाई में कूद गये हैं.
132 की जगह सिर्फ 52
पीएमसीएच में इन दिनों दवाओं की भारी कमी चल रही है. 60 प्रतिशत दवाएं खत्म हो चुकी हैं. अस्पताल प्रशासन का दावा है कि पीएमसीएच में 132 की जगह सिर्फ 52 प्रकार की दवाएं मरीजों को दी जा रही हैं. अस्पताल सूत्रों की मानें, तो वर्तमान समय में जो दवाएं नहीं मिल रहीं हैं, वे महंगी दवाएं हैं. खत्म हुई दवाओं की लिस्ट बीएमआइसीएल के पास पेडिंग में पड़ी हुई हैं.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Tags
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




