पटना : ऑनलाइन दवाओं की बिक्री पर रोक से केमिस्ट एसो. खुश, जनता निराश
Updated at : 19 Dec 2018 6:25 AM (IST)
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पटना : ऑनलाइन फार्मेसी द्वारा इंटरनेट से दवाओं की बिक्री पर रोक लगाने के दिल्ली व मद्रास हाईकोर्ट के निर्णय से केमिस्ट एसोसिएशन व डॉक्टर खुश हैं, लेकिन जनता का एक वर्ग निराश है. कोर्ट ने गैर कानूनी ढंग से बिक्री से दवाओं के दुरुपयोग की आशंका जताते हुए यह प्रतिबंध लगाया है. इन दिनों […]
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पटना : ऑनलाइन फार्मेसी द्वारा इंटरनेट से दवाओं की बिक्री पर रोक लगाने के दिल्ली व मद्रास हाईकोर्ट के निर्णय से केमिस्ट एसोसिएशन व डॉक्टर खुश हैं, लेकिन जनता का एक वर्ग निराश है. कोर्ट ने गैर कानूनी ढंग से बिक्री से दवाओं के दुरुपयोग की आशंका जताते हुए यह प्रतिबंध लगाया है.
इन दिनों काफी तेजी से चमके ऑनलाइन दवा कारोबार के सबसे बड़े ग्राहक बुजुर्ग बन कर उभरे, जिनको घर बैठे ही सस्ती दवा उपलब्ध हो जा रही थी. शहर के डॉक्टर व दवा एसोसिएशन ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है. डॉक्टर व दवा एसोसिएशन के सदस्यों का कहना है कि ऑनलाइन दवा की खरीदारी भले ही कम कीमत में होती है लेकिन इनका साइड इफेक्ट अधिक है. दवा एसोसिएशन का दावा है कि ऑनलाइन बेची जा रहीं कई ऐसी दवाएं हैं, जो सब स्टैंडर्ड होती हैं. यहां तक कि कई ऐसी दवाएं हैं, जो नकली भी होती हैं और मरीजों को जानकारी तक नहीं मिल पाती. नतीजा इनके सेवन के बाद मरीजों की किडनी, लिवर पर गहरा असर पड़ रहा है.
25 प्रतिशत छूट पर मिलती हैं दवाएं
ऑनलाइन दवाओं की बिक्री पर रोक से समाज का एक तबका नाराज भी दिख रहा है. खास कर बुजुर्ग मरीजों की मानें तो ऑनलाइन दवाएं मार्केट रेट से सस्ती होती हैं. क्योंकि सभी दवाएं प्रिंट रेट से 25 से 30 प्रतिशत छूट पर मिलती हैं. ऐसे में खर्च कम होता है.
इतना ही नहीं शहर में 24 घंटे के अंदर ऑनलाइन दवाएं मिल जाती हैं, जबकि डॉक्टर के लिखे पर्चे पर भी कई ऐसी दवाएं हैं, जो फिक्स दुकान पर ही मिलती हैं. पर्चे पर लिखी बाकी दवाएं मार्केट के दूसरी दवा दुकानों पर नहीं मिलतीं.
क्या कहते हैं मरीज
डॉक्टर द्वारा दवा लिखने के बाद भी अधिकांश दवाएं एक दुकान पर नहीं मिलतीं. ऑनलाइन दवाओं की खरीदारी से घर बैठे दवाएं दो दिन के अंदर पहुंच जाती हैं. रही बात दवाओं के बैन की तो प्रशासन को बीच का रास्ता निकालना चाहिए.
-कृष्णा प्रसाद, बुजुर्ग मरीज
दवा की दुकानेंं गैर प्रशिक्षित लोग दवा देते हैं. इतना ही नहीं पटना में कई बार छापेमारी में नकली दवाएं पकड़ी जा चुकी हैं. ऐसे में ऑनलाइन व दवा दुकान दोनों पर ही भरोसा उठ गया है. ऑनलाइन दवा सही है या नहीं यहां भी सस्पेंस बना हुआ है.
-राजेंद्र कुमार, मरीज
एक नजर में दवा कारोबार
पूरे बिहार में हर साल Rs 9600 करोड़ की दवा का कारोबार किया जाता है
70 प्रतिशत बिक्री पटना में होती है
प्रदेश में 3 हजार करोड़ का है ऑनलाइन दवा का कारोबार
32 हजार खुदरा दुकानें हैं, पूरे बिहार में
8 हजार थोक दवा दुकान पूरे बिहार में
3200 खुदरा दवा दुकान पटना में
1300 थोक दवा दुकान पटना में
क्या कहता है दवा एसोसिएशन
ऑनलाइन दवा के कारोबार के खिलाफ हम लोगों ने पूरे बिहार में दो बार विरोध किया और दवा दुकानें बंद भी रखीं. क्योंकि ऑनलाइन दवा से मरीजों की सेहत को नुकसान हो रहा था. दवाएं कहां और किस स्थिति में रखी गयी होंगी यह कहना मुश्किल था. साथ ही कई ऐसे मरीज सामने आये, जिन्होंने किसी और दवा की डिमांड की़ लेकिन, उन्हें वैकल्पिक दवाएं भेज दी जाती थीं. संतोष कुमार, सचिव, पटना ड्रगिस्ट एवं केमिस्ट एसोसिएशन
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