पटना : मुजफ्फरपुर व दरभंगा ट्रेजरी में नहीं हुई वित्तीय अनियमितता : सुशील मोदी
Updated at : 28 Nov 2018 8:11 AM (IST)
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पटना : उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि मुजफ्फरपुर व दरभंगा ट्रेजरी में कोई वित्तीय अनियमितता नहीं हुई है. उन्होंने विपक्ष द्वारा लगाये गये आरोप को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष भ्रम फैलाने का काम कर रहा है. विधान परिषद में अपने कार्यालय कक्ष में मोदी ने कहा कि किसी तरह […]
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पटना : उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि मुजफ्फरपुर व दरभंगा ट्रेजरी में कोई वित्तीय अनियमितता नहीं हुई है. उन्होंने विपक्ष द्वारा लगाये गये आरोप को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष भ्रम फैलाने का काम कर रहा है.
विधान परिषद में अपने कार्यालय कक्ष में मोदी ने कहा कि किसी तरह की कोई वित्तीय अनियमितता नहीं हुई है. केवल तकनीकी व प्रक्रियागत त्रुटि का मामला है. इसे सुधार कर लिया गया है. महालेखाकार द्वारा लगाये गये आपत्तियों का निराकरण कर महालेखाकार को कागजात उपलब्ध करा दिये गये हैं. मामले की जांच विभाग के द्वारा करायी गयी थी.
इस संबंध में दोनों जिलों के डीएम ने रिपोर्ट भेजी है. मुजफ्फरपुर डीएम द्वारा भेजी गयी रिपोर्ट में कहा गया है कि कोई वित्तीय गबन नहीं हुआ है. रिपोर्ट में उठाये गये एक-एक बिंदुओं का जवाब डीएम द्वारा दिया गया है.
इसमें नाजीर रसीद के माध्यम से राशि रोकड़ में जमा करने, झंडा दिवस की राशि सैनिक कल्याण निदेशालय को दिया गया. 32़ 80 लाख डीसी बिल मार्च 2016 को महालेखा कार्यालय को दिया गया. लगभग 966 लाख का लंबित उपयोगिता प्रमाणपत्र आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा विभिन्न अंचलों को आवंटित किया गया.
रोकड़ पंजी अपडेट कर लिया गया. दरभंगा डीएम ने अपने रिपोर्ट में कहा है कि वर्ष 2009 से 2012 तक प्राप्ति व व्यय के 54 करोड़, 2012 से 2015 तक 46 करोड़ व 2015 से 17 के बीच 31 कराेड़ का महालेखाकार कार्यालय द्वारा अंकेक्षण किया गया.
महालेखाकार द्वारा एसी बिल के विरुद्ध डीसी बिल का जमा नहीं किया जाना, बैंक में रखी गयी सूद की राशि, जिला शहरी विकास अभिकरण व अन्य कार्यकारी एजेंसियाें को विकासात्मक कार्यों के लिए की गयी राशि के संदर्भ में है. डीएम ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वित्तीय गबन का मामला नहीं है, बल्कि तकनीकी व प्रक्रियागत त्रुटियों से संबंधित है.
पटना : हंगामे की भेंट चढ़े ध्यानाकर्षण व तारांकित प्रश्न
पटना : विधानसभा में विभिन्न दलों के सदस्यों द्वारा पूछे जाने वाले 10 विभागों के महत्वपूर्ण प्रश्न हंगामे की भेंट चढ़ गये. विपक्ष के हंगामे के कारण न तो अल्पसूचित और नहीं तारांकित प्रश्न पूछे जा सके.
वहीं, सदन स्थगित होने से ध्यानाकर्षण की सूचना और सरकार का जवाब भी नहीं हो सका. प्रश्नकाल के दौरान सदस्यों द्वारा बिहार तकनीकी सेवा आयोग द्वारा तकनीकी पदों पर की जा रही नियुक्तियों में प्रतियोगिता परीक्षा आयोजित किये जाने के संबंध को लेकर सदन में सरकार का जवाब आना था.
इस दौरान राज्य में लगभग 50 घोषित सुखाग्रस्त क्षेत्र के शेष बचे क्षेत्र को भी सुखाग्रस्त घोषित कर किसानों को उचित लाभ देने के संबंध में भी सदस्यों के प्रश्न शामिल किये गये थे. सदन के स्थगित होने के कारण इस प्रकार के प्रश्न को सरकार से पूछने का सदस्यों को मौका ही नहीं मिला.
सदस्यों द्वारा जिन महत्वपूर्ण विभागों से अल्पसूचित और तारांकित प्रश्न पूछने का औपबंधिक कार्यक्रम निर्धारित किया गया था उसमें शिक्षा विभाग, खान एवं भूतत्व विभाग, मद्य निषेध उत्पाद निबंधन विभाग, पर्यावरण एवं वन विभाग, समाज कल्याण विभाग आदि शामिल हैं.
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