पटना : सहायक प्राध्यापकों को पांच दिनों में सुझाव भेजने का निर्देश

Updated at : 12 Oct 2018 8:58 AM (IST)
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पटना : सहायक प्राध्यापकों को पांच दिनों में सुझाव भेजने का निर्देश

सहायक प्राध्यापकों की कार्यशाला संपन्न पटना : राज्य में उच्च शिक्षा की स्थिति को सुदृढ़ बनाने के लिए राजभवन के स्तर पर भी व्यापक पहल शुरू कर दी गयी है. इसके अंतर्गत हाल में कॉलेजों में अर्थशास्त्र, अंग्रेजी और साहित्य विषय के नवनियुक्त सहायक प्राध्यापकों की कार्यशाला आयोजित की गयी. इसमें प्रधान सचिव विवेक कुमार […]

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सहायक प्राध्यापकों की कार्यशाला संपन्न
पटना : राज्य में उच्च शिक्षा की स्थिति को सुदृढ़ बनाने के लिए राजभवन के स्तर पर भी व्यापक पहल शुरू कर दी गयी है. इसके अंतर्गत हाल में कॉलेजों में अर्थशास्त्र, अंग्रेजी और साहित्य विषय के नवनियुक्त सहायक प्राध्यापकों की कार्यशाला आयोजित की गयी.
इसमें प्रधान सचिव विवेक कुमार सिंह ने कहा कि कार्यशाला से लौटकर सभी प्रतिभागी प्राध्यापक अपने विचार सारगर्भित रूप में ई-मेल के जरिये कार्यशाला के नोडल पदाधिकारी को पांच दिन के अंदर भेज देंगे. भेजे जाने वाले तमाम सुझाव हर तरह से स्पष्ट, तर्कसंगत, दूरगामी प्रभाव वाले और कार्यान्वयन की दृष्टि से भी व्यावहारिक होने चाहिए.
उन्होंने कहा कि राजभवन विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों और वरीय प्राध्यापकों के अतिरिक्त नवनियुक्त शिक्षकों के साथ विचारों को इसलिए साझा करना चाहता है कि ये युवा शिक्षक देश के विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों से पढ़े हुए हैं और अब बिहार के विश्वविद्यालयों में नियुक्त हुए हैं.
यहां की शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और इसमें व्यापक सुधार करने में इनकी भूमिका अहम साबित हो सकती है. कार्यशाला के दौरान प्राध्यापकों ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिये. इन सभी सुझावों पर अमल करके एक समेकित रिपोर्ट तैयार की जायेगी, जिसके आधार पर शिक्षा प्रणाली में सुधार से संबंधित अहम निर्णय लिये जायेंगे.
ये आये महत्वपूर्ण सुझाव
– शिक्षकों एवं छात्रों के अध्ययन और अध्यापन की गुणवत्ता की वार्षिक स्कोरिंग होनी चाहिए.
– बेहतरीन शिक्षकों को प्रोन्नति में प्राथमिकता मिलनी चाहिए. मेरिट प्रोन्नति की अवधारणा विकसित हो.
– शिक्षकों के लिए नियमित तौर पर गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित होने चाहिए.
– अंतरविश्वविद्यालय स्कॉलर ग्रुप बने. एक प्राध्यापक का दूसरे विश्वविद्यालयों में व्याख्यान हो.
– शिक्षकेत्तर कर्मियों और शिक्षकों का एक निश्चित समय में स्थानांतरण होते रहना चाहिए.
– स्नातक की कॉपियों का मूल्यांकन अंगीभूत कॉलेजों के शिक्षकों से ही कराया जाये.
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