आईआरसीटीसी की वेबसाइट हैक कर बुक करता था टिकट फिर...
Updated at : 06 Oct 2018 3:17 AM (IST)
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पटना : रेलवे आरक्षित टिकट वितरण के लिए चाहे कितने भी हाईटेक प्रबंध कर ले, लेकिन दलाल उसकी भी काट निकाल लेते हैं. दलालों की कैटेगरी भी कुछ अलग है. वे हाईटेक हैं. उच्च शिक्षित हैं. जाहिर है कि कंप्यूटर सॉफ्टवेयर की जानकारी लेकर वे इस धंधे में उतरे हैं. राजेंद्र नगर आरपीएफ पोस्ट को […]
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पटना : रेलवे आरक्षित टिकट वितरण के लिए चाहे कितने भी हाईटेक प्रबंध कर ले, लेकिन दलाल उसकी भी काट निकाल लेते हैं. दलालों की कैटेगरी भी कुछ अलग है. वे हाईटेक हैं. उच्च शिक्षित हैं. जाहिर है कि कंप्यूटर सॉफ्टवेयर की जानकारी लेकर वे इस धंधे में उतरे हैं. राजेंद्र नगर आरपीएफ पोस्ट को सूचना मिली कि राजधानी के जक्कनपुर इलाके में ई-रेलवे टिकट का बड़े पैमाने पर कारोबार किया जा रहा है.
इस सूचना के आधार पर आरपीएफ पोस्ट के इंस्पेक्टर आरआर कश्यप के नेतृत्व में गठित टीम ने 11:30 बजे जक्कनपुर स्थित पटना ट्रेवल सर्विस नामक दुकान में छापेमारी की. छापेमारी के दौरान दुकान से 51 ई-टिकट बरामद किये. ये सभी टिकट पर्सनल आईडी से बुक किये गये थे.
ई-टिकट बरामद होते ही दुकान संचालक सतीश कुमार कोगिरफ्तार किया गया. अभियुक्त सतीश कुमार एमकॉम का डिग्री धारक है. गिरफ्तार अभियुक्त पर रेलवे एक्ट की धारा 143 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गयी है. इसके बाद उसे जेल भेज दिया गया.
संचालक ने स्वीकार की हैकिंग की बात
छापेमारी के दौरान दुकान से 51 ई-टिकट, तीन एटीएम, तीन बैंक पासबुक, एक लैपटॉप और 16,470 रुपये के साथ-साथ इल्लीसिट नामक सॉफ्टवेयर बरामद किया गया. दुकान संचालक से पूछताछ की गयी, तो संचालक ने स्वीकार किया कि इल्लीसिट सॉफ्टवेयर से आईआरसीटीसी वेबसाइट हैक कर उससे अनलिमिटेड टिकट बुकिंग करने में आसानी होती थी. इसके साथ ही वेबसाइट पर काम करने की स्पीड भी बढ़ जाती है.
पहले होता था रेड चिली सॉफ्टवेयर का प्रयोग
पूर्व में टिकट दलाल रेड चिली नामक सॉफ्टवेयर से आईआरसीटीसी के वेबसाइट को हैक कर रहा था. इसका खुलासा तब हुआ था, जब जक्कनपुर और पटना जंक्शन के पास ट्रेवल एजेंसी में छापेमारी की गयी थी. अब टिकट दलाल रेड चिली के बदले इल्लीसिट नामक साॅफ्टवेयर का उपयोग करने लगे हैं.
साइट हैक होने के दस सेंकेंड में पहला पीएनआर कर लिया जाता है जेनरेट
पटना : आईआरसीटीसी की वेबसाइट हैक करने वाला इल्लीसिट नाम का खतरनाक साफ्टवेयर ऑनलाइन बिक रहा है. इसलिए कोई भी कंप्यूटर प्रोग्रामर बड़ी आसानी से इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. जानकारों का कहना है कि साइट हैक होने के दस सेकेंड में पहला पीएनआर जेनरेट कर लिया जाता है. उसके बाद चाहे उतने टिकट निकाले जा सकते हैं.
हैक होने के बाद आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर नो रूम दिखाने लगता है. कुल मिला कर ऐसा विजिटर्स की वजह से नहीं होता है. बता दें कि पिछले एक साल में हैक करने के मामले में सबसे ज्यादा इल्लीसिट सॉफ्टवेयर पकड़ा गया है. एक एक्सपर्ट ने बताया कि कोई भी साॅफ्टवेयर तभी किसी वेबसाइट को हैक कर सकता है जब वह आईआरसीटीसी की वेबसाइट डवलपमेंट में सहभागी हो.
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