राज्य सरकार से प्रॉपर्टी के रूल ऑफ लॉ का सख्ती से पालन कराने का अनुरोध
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 26 Sep 2018 8:53 AM
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पटना : बिहार रियल इस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) के अध्यक्ष अफजल अमानुल्लाह ने राज्य सरकार से प्रोपर्टी के रूल ऑफ लॉ का सख्ती से पालन कराने का अनुरोध किया है. नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव चैतन्य प्रसाद को लिखे पत्र में उन्होंने सलाह दी है कि वे प्राधिकारों को रूल ऑफ लॉ […]
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पटना : बिहार रियल इस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) के अध्यक्ष अफजल अमानुल्लाह ने राज्य सरकार से प्रोपर्टी के रूल ऑफ लॉ का सख्ती से पालन कराने का अनुरोध किया है.
नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव चैतन्य प्रसाद को लिखे पत्र में उन्होंने सलाह दी है कि वे प्राधिकारों को रूल ऑफ लॉ का पालन कराने के लिए बाध्य करें, ताकि बिल्डरों द्वारा निर्माण में विचलन संबंधित मामलों पर रोक लगायी जा सके. उन्होंने प्रधान सचिव को सरकार की दूसरी एजेंसियों से भी अनुरोध करने को कहा है कि वे तब तक उन रियल इस्टेट प्रोजेक्ट को बिजली, पानी, ड्रेनेज, सीवरेज कनेक्शन न दें, जब तक उनके द्वारा कंपलीशन या ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट पेश न किया जाये.
बढ़े बगैर कंप्लीशन सर्टिफिकेट वाले प्रोजेक्ट : रेरा अध्यक्ष ने कहा कि निबंधन विभाग के साथ हुई बैठक में बिल्डरों ने रेरा अधिकारियों के संज्ञान में मामला लाया है कि संबंधित प्राधिकार कंप्लीशन, ऑक्यूपेंसी व डेवलपमेंट सर्टिफिकेट इश्यू नहीं कर रहे. ग्राहकों की सुरक्षा की दृष्टि से बिल्डिंग बाइलॉज का यह महत्वपूर्ण प्रावधान है.
इसके चलते पिछले कुछ वर्षों में ऐसे रियल इस्टेट प्रोजेक्ट की संख्या बढ़ी है, जिनको कंपलीशन, ऑक्यूपेंसी व डेवलपमेंट सर्टिफिकेट नहीं मिला. इसके चलते पुराने रियल इस्टेट प्रोजेक्ट को रेरा नंबर नहीं मिल पा रहा और उनकी रजिस्ट्री में भी बाधाएं आ रही हैं.
निरीक्षण कर वेरिफाई करे प्राधिकार: पत्र में रेरा अध्यक्ष ने कहा कि कंपलीशन सर्टिफिकेट यह विश्वास दिलाता है कि निर्माण स्वीकृत नक्शे या प्लान के हिसाब से ही हुआ है.
यह ग्राहकों के हित में है. यह प्रावधान बिल्डरों को नक्शे में बदलाव या अवैध निर्माण करने से रोकता है. निकाय के प्राधिकारों को स्थल निरीक्षण कर यह जांच करना चाहिए कि उनके स्वीकृत नक्शे के हिसाब से फ्लोर, बिल्डिंग की ऊंचाई, बाहरी सेटबैक, बिल्डिंग लाइन, पार्किंग स्पेस, वन क्षेत्र, वाटर हार्वेस्टिंग व्यवस्था आदि है या नहीं. अगर गड़बड़ी मिले तो इसकी रिपोर्ट की जाये.
इसके साथ ही बिल्डरों से भी शपथ पत्र लिया जा सकता है कि उन्होंने स्वीकृत नक्शे के हिसाब से ही निर्माण किया है और उनके सारे सरकारी ड्यूज क्लियर हैं. इसके बावजूद गलत जानकारी देने वालों को दंड दें. रेरा अध्यक्ष ने कहा कि मामलों पर कार्रवाई करते हुए उसकी जानकारी उन्हें दें.
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