पटना : जितना जी चाहे खरीदें पर लौटाना है तो दो फ्यूज बल्ब ही होंगे वापस

Updated at : 03 Sep 2018 6:10 AM (IST)
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पटना : जितना जी चाहे खरीदें पर लौटाना है तो दो फ्यूज बल्ब ही होंगे वापस

वापस लेने वाले फ्यूज बल्ब की संख्या सीमित करने से लोगों में आक्रोश पटना : रियायती बल्बों की वापसी से संबंधित विवाद खत्म नहीं हो पा रहा है. बिजली कंपनी ने इसके लिए विशेष काउंटर लगवा दिये हैं, इसके बावजूद हर दिन बल्ब बिक्री काउंटरों पर ग्राहकों से बेचने वाली एजेंसी के कर्मियों की झड़प […]

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वापस लेने वाले फ्यूज बल्ब की संख्या सीमित करने से लोगों में आक्रोश
पटना : रियायती बल्बों की वापसी से संबंधित विवाद खत्म नहीं हो पा रहा है. बिजली कंपनी ने इसके लिए विशेष काउंटर लगवा दिये हैं, इसके बावजूद हर दिन बल्ब बिक्री काउंटरों पर ग्राहकों से बेचने वाली एजेंसी के कर्मियों की झड़प होती रहती है. वजह एजेंसी की मनमानी है.
नये बल्ब बेचने में उसने कोई सीमा नहीं निर्धारित की है. लोग जितना चाहे बल्ब खरीद सकते हैं पर लौटाना है तो दो फ्यूज बल्ब ही एजेंसी वापस लेगी. इस निर्धारण से लोगों में आक्रोश है.
तीन वर्षों की है वारंटी : उजाला योजना के अंतर्गत बेचे गये सभी बल्बों पर तीन वर्षों की गारंटी है. लोगों द्वारा इन बल्बों को बड़ी संख्या में खरीदे जाने की वजह यह गारंटी ही रही है, क्योंकि सरकारी योजना से जुड़ी एजेंसी की गारंटी का मतलब लोगों ने सरकारी गारंटी की तरह समझा और एक-एक व्यक्ति ने पांच-छह तक बल्ब खरीदे.
लोगों के मन में था कि सामान्य बल्बों की तुलना में इस बल्ब की खरीद पर खर्च होने वाली अतिरिक्त राशि (55 रुपये) एक वर्ष के भीतर ही कम बिजली बिल के रूप में वसूल हो जायेगी जबकि तीन वर्षों तक कम से कम इनके चलने की गारंटी है. लेकिन खराब गुणवत्ता के कारण दो से छह महीने के भीतर ही बल्ब फ्यूज करने लगे, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ी.
बिजली खपत कम करने के लिए शुरू की गयी थी बिक्री
रियायती बल्बों की बिक्री उजाला योजना के अंतर्गत की गयी थी. इसका उद्देश्य बिजली की खपत को कम करना था. सामान्य बल्बों के विपरीत इस योजना के अंतर्गत दी जाने वाली एलईडी बल्ब केवल नौ फीसदी विद्युत ऊर्जा की खपत करती है. सामान्य बल्बों से सात गुना अधिक महंगे होने की वजह से इन बल्बों का इस्तेमाल बहुत सीमित था. लेकिन अनुदान देकर सरकार ने इन बल्बों की कीमत को 100 से 70 रुपये पर लाया. इसके बावजूद सामान्य बल्बों (15 रुपये) की तुलना में ये 55 रुपये महंगे हैं.
स्टॉक की कमी है तो नये बल्ब बेचने की जरूरत क्या
स्टॉक सीमित होने की वजह से यदि लोगों को दो से अधिक बल्ब नहीं लौटाया जा रहा है तो नये ग्राहकों को बल्ब बेचने की क्या जरूरत है. इसकी जगह पुराने ग्राहकों को ही अधिक संख्या में बल्ब लौटाने की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि फ्यूज बल्बों का बैकलॉग समाप्त हो सके.
स्थिति सामान्य होने के बाद ही बल्बों की ही बिक्री शुरू होनी चाहिए. यह भी ध्यान देने लायक है कि लौटाने वाले बल्बों की संख्या दो तक सीमित करने पर भी लोगों ने बल्ब वापस लौटाना नहीं छोड़ा है बल्कि जिनके पास दो से अधिक फ्यूज बल्ब हैं वे अलग-अलग दिन अलग-अलग काउंटर पर खड़े होकर बल्ब बदल ही ले रहे हैं. ऐसे में संख्या सीमित करने से एजेंसी को फायदा नहीं हो रहा है जबकि लोगों की परेशानी बढ़ गयी है .
लग रही लंबी लाइन
पिछले तीन महीने से स्टॉक नहीं होने की वजह से बल्ब बेचने वाले काउंटर बंद थे. शुक्रवार से दुबारा दो काउंटर खुले. एक पेसु मुख्यालय परिसर में जबकि दुसरा विद्युत भवन में. दोनों ही जगह भीड़ के कारण बल्ब खरीदने और वापस लौटाने वाले लोगों की लंबी लाइन लगती है.
कई फ्यूज बल्बों को हाथ में लिए डेढ़-दो घंटे तक लाइन में खड़ा होने के बाद व्यक्ति जब काउंटर तक पहुंचता है और मालूम होता है कि केवल दो फ्यूज बल्ब ही वापस लिया जायेगा तो उसके आक्रोश का ठिकाना नहीं रहता.
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