पटना : रेफर के खेल में पहुंचा रहे प्राइवेट अस्पतालों को फायदा

Updated at : 27 Aug 2018 9:25 AM (IST)
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पटना : रेफर के खेल में पहुंचा रहे प्राइवेट अस्पतालों को फायदा

पटना : बेहतर इलाज के लिए पूरे बिहार से हादसे में घायल या गंभीर रोगियों को पीएमसीएच, आईजीआईएमएस और पटना एम्स जैसे बड़े और नामी अस्पतालों में रेफर किया जाता है. मगर इन अस्पतालों का हाल यह है कि ये अपने यहां पहुंचने वाले मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में रेफर कर देते हैं. वजह बताते […]

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पटना : बेहतर इलाज के लिए पूरे बिहार से हादसे में घायल या गंभीर रोगियों को पीएमसीएच, आईजीआईएमएस और पटना एम्स जैसे बड़े और नामी अस्पतालों में रेफर किया जाता है. मगर इन अस्पतालों का हाल यह है कि ये अपने यहां पहुंचने वाले मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में रेफर कर देते हैं.
वजह बताते हैं कि अस्पताल में वेंटिलेटर, विशेषज्ञ डॉक्टरों और जरूरी उपकरणों की कमी है. रेफर के इस खेल में एक तरफ जहां मरीजों का आर्थिक दोहन हो रहा है, वहीं प्राइवेट अस्पताल मोटी कमाई कर रहे हैं. बताया जाता है कि इन तीनों अस्पतालों से रोजाना 40 से अधिक मरीज प्राइवेट अस्पताल में रेफर किये जाते हैं.
रमेश कुमार के डेढ़ साल के बेटी की तबीयत खराब होने के बाद उसे पीएमसीएच के शिशु रोग विभाग के पीकू वार्ड में भर्ती कराया गया. डॉक्टरों ने कहा कि बच्ची को वेंटिलेटर पर रखना है, मगर यहां वेटिंग है. अस्पताल ने उसे प्राइवेट अस्पताल में रेफर कर दिया.
गोपालगंज के दारोगा महेंद्र राम को पीएमसीएच में भर्ती तो कर लिया गया, लेकिन कलाई की कटी नर्सों की सर्जरी अस्पताल में नहीं हो सकी, क्योंकि यहां वैस्कुलर सर्जन नहीं हैं. वहां के डॉक्टर ने उनको सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल जाने की सलाह दी.
सड़क दुर्घटना में घायल बिहटा निवासी शांति देवी को परिजनों ने आईजीआई एमएस में इलाज कराने के लिए भर्ती किया. इमरजेंसी वार्ड में जब महिला को लाया गया तो वहां के चिकित्सकों ने बेड फुल की बात कहकर उसे रेफर कर दिया.
फ्री के इलाज में लाखों हो जाते हैं खर्च
वेंटिलेटर या फिर बेड के अभाव में जिन मरीजों को रेफर किया जाता है, वह सुविधा पीएमसीएच व गार्डिनर रोड अस्पताल में पूरी तरह से नि:शुल्क है.
हालांकि आईजीआईएमएस में वेंटिलेटर के एक दिन के एक हजार से 1500 रुपये लिए जाते हैं. बेड के लिए 400 से एक हजार रुपये देने पड़ते हैं. वहीं प्राइवेट अस्पतालों में वेंटिलेटर के पांच हजार से छह हजार तक एक दिन के वसूले जाते हैं. प्राइवेट अस्पताल में मरीज वेंटिलेटर पर भर्ती हो जाते हैं, तो जो इलाज पीएमसीएच में नि:शुल्क होता, उस इलाज के लिए मरीजों को दो से तीन लाख रुपये खर्च करने पड़ते हैं. पीएमसीएच एवं आईजीआईएमएस में 1000 से अधिक गंभीर मरीज आते हैं.
इन मरीजों को प्राइवेट अस्पताल में करते हैं रेफर
वेंटिलेटर की वेटिंग
वेंटिलेटर के लिए पीएमसीएच व आईजीआईएमएस में वेटिंग चल रही है. पीएमसीएच के शिशु रोग विभाग में छह में से पांच वेंटिलेटर एक माह से खराब है. इस कारण प्राइवेट अस्पताल में रेफर कर देते हैं.
वैस्कुलर सर्जरी
पीएमसीएच में कटे नसों के लिए वैस्कुलर सर्जरी की सुविधा नहीं है. दस साल पहले यहां एक सर्जन थे, लेकिन अब सर्जरी नहीं होती. नतीजा डॉक्टर अपने सगे संबंधियों के अस्पतालों में रेफर कर देते हैं.
बाईपास सर्जरी
पीएमसीएच और एम्स में कॉर्डियेक थोरेसिक सर्जरी भी नहीं होती है, जिसके कारण बाइपास सर्जरी नहीं हो पाती है. हृदय की बाईपास सर्जरी नहीं होने से मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है.
जटिल सर्जरी
पीएमसीएच व एम्स में ब्रेन की बड़ी और जटिल सर्जरी भी नहीं होती है. यहां न्यूरो सर्जन तो हैं, लेकिन पिछले एक साल में ऐसा कोई ऑपरेशन यहां नहीं हुआ है. इसकी मुख्य वजह संसाधन का अभाव है.
जो सुविधाएं पीएमसीएच में नहीं हैं, उसके लिए स्वास्थ्य विभाग को प्रस्ताव भेजा गया है. पीकू वार्ड में चार वेंटिलेटर खरीदने की प्रक्रिया चल रही है. वहीं किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा देने का प्रयास चल रहा है.
—डॉ राजीव रंजन प्रसाद, अधीक्षक, पीएमसीएच
हाल में एम्स में इमरजेंसी वार्ड की सुविधा बहाल की गयी है. वेंटिलेटर सहित सभी तरह के उपकरणों की खरीदारी की जा रही है. बहुत जल्द बड़ी सर्जरी से लेकर किडनी प्रत्यारोपण, नेत्र प्रत्यारोपण आदि की सुविधा बहाल की जायेगी.
—डॉ पीके सिंह, डायरेक्टर, एम्स
आय छुपाने वालों डॉक्टरों की खंगाली जा रही है कुंडली
पटना सहित सूबे के अलग-अलग शहरों में आयकर में हेरफेर कर अकूत संपत्ति बनानेवाले डॉक्टरों की कमी नहीं है. तमाम निजी अस्पतालों में इलाज के नाम पर लूट मची है. वहीं, जांच के नाम पर भी मरीजों से बेतहाशा पैसा वसूला जाता है.
अगर डॉक्टर दूसरी जगह मरीजों को जांच के लिए भेजते हैं, तो कमीशन मिलने की बात भी सामने आयी है. मरीजों से बेहिसाब पैसा वसूलने वाले डॉक्टरों पर आयकर विभाग की कड़ी नजर है. विभागीय अधिकारी आय छुपाने वाले ऐसे डॉक्टरों के बारे में पूरी जानकारी जुटाने में लगे हैं. फिलहाल इनकी सूची बनायी जा रही है.
टैक्स चुराने के लिए लेते हैं कैश पेमेंट
शायद ही कोई निजी अस्पताल हो, जहां नोट गिनने वाली मशीन न हो. अस्पतालों में खुले मेडिकल स्टोरों की भी कमाई काफी अधिक है. इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि बिहार में चिकित्सा सेवा के नाम पर किस तरह का खेल चल रहा है. शिकायत तो ऐसी भी मिलती है कि अगर कोई अस्पताल का पूरा पैसा कार्ड से पेमेंट करना चाहे, तो निजी अस्पताल लेने से इन्कार कर देते हैं. अगर अस्पताल कार्ड से पेमेंट लेना शुरू कर देंगे, तो इनकी आय दिखने लगेगी.
दिसंबर, 2014 में आयकर विभाग ने बेगूसराय के तीन चर्चित डॉक्टरों के सात ठिकानों पर छापेमारी की थी. हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ नलिनी रंजन सिंह के यहां से 40 लाख, सर्जन डॉ रामाश्रय सिंह के यहां से 57 लाख और डॉ रामयतन सिंह के यहां से 78 लाख रुपये बरामद किये गये थे. डॉक्टरों के ठिकाने से जमीन में निवेश से संबंधित कई दस्तावेज मिले थे.
अगस्त, 2015 में आयकर विभाग ने प्रदेश के छह शहरों के 10 डॉक्टरों के ठिकानों पर छापेमारी की थी. पटना के डॉ राजन चौधरी, डॉ अनुज कुमार सिंह व डॉ अशोक कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर के डॉ रामगोपाल जैन, मोतिहारी के डॉ आशुतोष शरण, सीतामढ़ी के डॉ वरुण, समस्तीपुर के डॉ रती रंजन झा, डॉ एमपी शर्मा व डॉ महेश ठाकुर, सीवान के डॉ मोनतजिउर के क्लिनिक व आवास पर छापे मारे गये थे.
नवंबर, 2017 में पटना के जाने-माने हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ आरएन सिंह के यहां आयकर विभाग ने सर्वे किया था. राजेंद्र नगर स्थित क्लिनिक व आवास पर आयकर की टीम पहुंची थी. चिकित्सक के यहां कागजात की छानबीन की थी. इसके साथ ही उनसे संपत्ति के दस्तावेजों की मांग की गयी थी.
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