पटना : लोस चुनाव में आयोग पर 20% तक पड़ेगा खर्च का अतिरिक्त बोझ

Published at :26 Aug 2018 6:38 AM (IST)
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पटना : लोस चुनाव में आयोग पर 20% तक पड़ेगा खर्च का अतिरिक्त बोझ

सुमित कुमार लोस चुनाव में आयोग पर 20% तक पड़ेगा खर्च का अतिरिक्त बोझ पटना : बिहार में अगले साल प्रस्तावित लोकसभा चुनाव कराने में चुनाव आयोग को पिछले चुनाव के मुकाबले 20% तक अतिरिक्त खर्च का बोझ सहन करना पड़ेगा. अधिकतम 1400 मतदाता पर एक बूथ की अनिवार्यता के चलते सूबे में मतदान केंद्रों […]

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सुमित कुमार
लोस चुनाव में आयोग पर 20% तक पड़ेगा खर्च का अतिरिक्त बोझ
पटना : बिहार में अगले साल प्रस्तावित लोकसभा चुनाव कराने में चुनाव आयोग को पिछले चुनाव के मुकाबले 20% तक अतिरिक्त खर्च का बोझ सहन करना पड़ेगा. अधिकतम 1400 मतदाता पर एक बूथ की अनिवार्यता के चलते सूबे में मतदान केंद्रों (बूथ) की कुल संख्या 62,780 से बढ़ कर 72,722 पहुंच गयी है. बूथ रेशनेलाइजेशन के बाद 9942 बूथों की बढ़ोतरी के प्रस्ताव को केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने मंजूरी दे दी है. सात जिलों में 400 से अधिक बूथ बढ़े हैं जिनमें सबसे अधिक 579 बूथों की बढ़ोतरी मधुबनी जिले में हुई है. हर बूथ पर चार पोलिंग अफसर होते हैं.
इस हिसाब से अगले चुनाव में रिजर्व सहित करीब पौने चार लाख मतदानकर्मियों की आवश्यकता होगी. बूथों पर करीब सवा लाख से अधिक सुरक्षाकर्मी, पौन दो लाख ईवीएम, पंद्रह हजार से अधिक छोटे-बड़े वाहन व बड़ी मात्रा में मतदान सामग्रियों की आवश्यकता होगी. चुनाव संपन्न कराने को काफी संख्या में नियुक्त होनेवाले दंडाधिकारियों केभत्तों पर आयोग का खर्च बढ़ेगा. सिर्फ बूथों की संख्या बढ़ने की वजह से 20% अतिरिक्त व्यय होगा.
ईवीएम, वीवीपैट से लेकर अतिरिक्त मतदान कर्मियों व सुरक्षा कर्मियों की करनी होगी व्यवस्था
1022 नये भवनों में पड़ेंगे वोट
लोस चुनाव में 1022 नये भवनों में बूथ बनाये जायेंगे. इन भवनों में मतदान का इंतजाम कराने को चुनाव आयोग को ईवीएम से लेकर मतदान कर्मियों, सुरक्षा कर्मियों, मतदान सामग्री की अतिरिक्त व्यवस्था करनी होगी. साथ ही हर बूथ पर वीवीपैट भी अधिक रहेगी.
मतगणना में भी आयेगी समस्या
इससे सिर्फ मतदान नहीं, मतगणना में भी समस्या आयेगी. बढ़े बूथों के लिए अतिरिक्त वज्रगृह कमरों के साथ ही अतिरिक्त स्टाफ भी लगाये जायेंगे. अधिक ईवीएम होने से गिनती को अधिक राउंड रखे जायेंगे जिससे परिणाम घोषित होने में भी विलंब होने की संभावना है.
वीवीपैट अनिवार्य होने से बढ़ गये इतने बूथ
दरअसल चुनावों में वीवीपैट अनिवार्य होने से बूथों की संख्या इतनी अधिक बढ़ गयी है. एक वीवीपैट मशीन से अधिकतम 1500 पर्ची ही निकाली जा सकती है. इसमें भी करीब 50 से 100 पर्चियां मॉक पोल आदि में खर्च हो जाती हैं.
अधिकतम 1400 पर्चियों का उपयोग होने की वजह से चुनाव आयोग ने 1400 मतदाता पर ही एक बूथ अनिवार्य किया है. बूथों के रेशनेलाइजेशन में अधिक मतदाताओं वाले बूथों को व्यवस्थित कर अधिकतम 1400 मतदाता पर एक बूथ का निर्धारण किया गया है.
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