पटना : बच्चों को भी अवैध हिरासत में रख रही पुलिस, आयोग ने लगाया जुर्माना

Updated at : 20 Aug 2018 6:48 AM (IST)
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पटना : बच्चों को भी अवैध हिरासत में रख रही पुलिस, आयोग ने लगाया जुर्माना

पटना : पुलिस बच्चों से भी बेरहमी से पेश आ रही है. उनको भी अवैध हिरासत में रखने में संकोच नहीं कर रही है. राज्य के विभिन्न थानों में अवैध रूप से हिरासत में रखने की शिकायतें बिहार मानवाधिकार आयोग के पास लगातार पहुंच रही हैं. सालों पुराने तीन मामलों में न्याय करते हुए आयोग […]

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पटना : पुलिस बच्चों से भी बेरहमी से पेश आ रही है. उनको भी अवैध हिरासत में रखने में संकोच नहीं कर रही है. राज्य के विभिन्न थानों में अवैध रूप से हिरासत में रखने की शिकायतें बिहार मानवाधिकार आयोग के पास लगातार पहुंच रही हैं.
सालों पुराने तीन मामलों में न्याय करते हुए आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष न्यायमूर्ति मांधाता सिंह ने पुलिस पर जुर्माना लगाते हुए पीड़ितों को 1.70 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है. गया जिले के विष्णुपद थाने के गांव घुंघरीटाड निवासी मोहम्मद हाशिम ने मानवाधिकार आयोग में शिकायत (3003/15) दर्ज करायी थी कि विष्णुपद थाने के जूनियर हेड विजय झा ने बिना किसी आरोप के उनके 12 साल के बेटे को पूरी रात हाजत में रखा. याचिकाकर्ता से 10,000 रुपये लेने के बाद बेटे को रिहा किया गया.
इसके बाद 16 जून 2010 को उसी पुलिस अधिकारी ने मोहम्मद हाशिम को हिरासत में रखा. उसके साथ मारपीट और दुर्व्यवहार किया गया. अगले दिन सुबह 10,000 रुपये लेने के बाद छोड़ा गया. इस मामले में आयोग ने गया के सीनियर एसपी से रिपोर्ट मांगी. सात बार अनुस्मारक भेजे गये लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष न्यायमूर्ति मांधाता सिंह ने इस मामले में पुलिस को आदेश दिया है कि वह पीड़ित काे 50 हजार रुपये मुआवजा दे.
वार्ड पार्षद के देवर-ससुर को भी रखा अवैध हिरासत में, पुलिस देगी 70 हजार मुआवजा
मानवाधिकार आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष ने बेगूसराय की वार्ड 17 की पार्षद शबनम देवी की शिकायत पर पुलिस को पीड़ित को 70 हजार रुपये का मुआवजा देने के आदेश दिया है. पुलिस ने याची के देवर और ससुर को अवैध हिरासत में रखा था.
थाना मुफ्फसिल पुलिस एक मामले में शबनम के देवर को 17 नवंबर 2014 को रात साढ़े 11 बजे लेकर आयी लेकिन पुलिस डायरी में यह वाकया 19 नवंबर 2014 को दिन के तीन बजे दर्शाया गया. वहीं, शबनम के ससुर को 28 दिसंबर 14 को शाम सात बजे थाना लाया गया लेकिन पुलिस डायरी में इसका जिक्र नहीं है. शबनम ने मानवाधिकार आयोग में शिकायत कर पुलिस पर देवर और ससुर को अवैध हिरासत में रखने का आरोप लगाया है.
जिस मामले में बेल हो गयी उसी वांरट की आड़ में बैठाये रहे थाने में
पीरबहोर थाने की पुलिस ने तो इंतहा ही कर दी. मानवाधिकार आयोग में शिकायत करने वाली बुलबुल देवी के पति शैलेंद्र के खिलाफ भाई द्वारा दर्ज कराये गये मामले में गैर जमानती वारंट जारी हुआ था. शैलेंद्र ने इस मामले में कोर्ट में सरेंडर किया. छह अक्तूबर 15 को बेल मिल गयी.
इस मामले में पहले जो वारंट इश्यू हुआ था उसी के आधार पर पुलिस सात जनवरी 16 काे शैलेंद्र को थाने ले आयी. उसे आठ जनवरी को छोड़ा गया. पुलिस ने अवैध हिरासत में लेकर शैलेंद्र की पिटाई भी की. पुलिस ने मानवाधिकार आयोग के समक्ष शैलेंद्र की बेल की न तो चर्चा की और नहीं उस वारंट काे प्रस्तुत कर सकी जिसके आधार पर उसे हिरासत में रखा था. न्यायमूर्ति मांधाता सिंह ने इसे पुलिस उत्पीड़न माना और शैलेंद्र को अवैध तरीके से कस्टडी में रखने के लिए 60 हजार रुपये मुआवजा देने के आदेश दिया है.
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