पटना : हड़ताल के कारण चरमरायी चिकित्सा व्यवस्था, कई बिना इलाज के लौटे, कई तो अस्पताल ही छोड़ गये
Updated at : 10 Aug 2018 6:38 AM (IST)
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पटना : दानापुर में ऑटो पलटने से गंभीर रूप से घायल 16 साल का मिथलेश कुमार ओपीडी में दर्द से तड़पता रहा. कभी मां की गोद में सर रखकर रोता, तो कभी वह कभी बहन का हाथ पकड़ कर बिलखता. बेटे को दर्द से बिलखता देख पिता इलाज की गुहार लगाते रहे. डॉक्टर एक से […]
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पटना : दानापुर में ऑटो पलटने से गंभीर रूप से घायल 16 साल का मिथलेश कुमार ओपीडी में दर्द से तड़पता रहा. कभी मां की गोद में सर रखकर रोता, तो कभी वह कभी बहन का हाथ पकड़ कर बिलखता. बेटे को दर्द से बिलखता देख पिता इलाज की गुहार लगाते रहे. डॉक्टर एक से दूसरे विभाग में भेजते रहे. यह स्थिति सिर्फ एक मरीज के साथ नहीं बल्कि पीएमसीएच के हजारों मरीजों के साथ हुई.
दरअसल, गुरुवार को पीएमसीएच अस्पताल में जूनियर डॉक्टरों के हड़ताल पर होने से इलाज व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गयी. न मरीज भर्ती किये गये और न ही पूरे ऑपरेशन हो पाये. इतना ही नहीं कई गंभीर मरीज बेड छोड़ दूसरे अस्पताल में पलायन कर गये. इसका पूरा फायदा निजी अस्पतालों ने उठाया. उन्होंने मरीजों से इलाज के नाम पर सामान्य से कई गुना पैसे वसूले.
बिना इलाज लौटे मरीज : ओपीडी में इलाज नहीं होने के कारण 400 मरीज बिना इलाज लौट गये. हड़ताल की वजह से सिर्फ 1780 मरीजों ने रजिस्ट्रेशन कराया.
इनमें 400 मरीजों का इलाज नहीं हो पाया. इतना ही नहीं इमरजेंसी, राजेंद्र सर्जिकल ब्लॉक, बच्चा वार्ड व स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में भर्ती मरीजों को सबसे अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ा. इलाज नहीं मिलने के कारण इन वार्डों में भर्ती करीब 30 प्रतिशत मरीज दूसरे अस्पतालों की ओर पलायन कर गये.
सीनियर डॉक्टरों ने संभाली ओपीडी तो ओटी हुआ बंद : जूनियर डॉक्टरों के काम नहीं करने पर सीनियर डॉक्टर व कंसल्टेंट डॉक्टरों ने ओपीडी संभाली, लेकिन जैसे ही जूनियर डॉक्टरों को इस बात की सूचना मिली वे ओपीडी पहुंच गये और चेंबर में ताला जड़ दिया. नतीजा मरीज ओपीडी खुलने का इंतजार करते रहे.
बावजूद ओपीडी का ताला नहीं खुला और बिना इलाज मरीज वापस लौट गये. इतना ही नहीं सुबह आठ बजे से 10 बजे तक पांच ओटी में 15 ऑपरेशन किये गये. लेकिन ओटी चेंबर में भी जूनियर डॉक्टर पहुंच गये और ओटी में रखे उपकरणों से छेड़छाड़ कर ओटी बंद कर दिया. नतीजा 35 में से सिर्फ 15 ऑपरेशन हुए और 20 टाल दिये गये.
समय पर नहीं पहुंचे 50 डॉक्टर, हालत बिगड़ी : हड़ताल व मरीजों की परेशानी को देखते हुए पीएमसीएच प्रशासन ने बाहर से 50 डॉक्टरों को बुलाने की गुहार सिविल सर्जन व स्वास्थ्य विभाग से लगायी. हालांकि डॉक्टर तो मिल गये लेकिन अस्पताल में समय पर नहीं पहुंच पाये.
दिन के दो बजे तक सिर्फ पांच डॉक्टर ही पीएमसीएच ज्वाइन कर सके. बाकी देर शाम तक डॉक्टर आते चले गये. नतीजा गंभीर मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा और इलाज के अभाव में मरीज कराहते रहे.
एक नजर में
एनएमसीएच में जूनियर डॉक्टरों से मारपीट के विरोध में पीएमसीएच के जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल किया
15 बड़े व छोटे
ऑपरेशन ओटी में हुए, 20 ऑपरेशन टाल दिये गये
पीएमसीएच में महज 1780 मरीज आये ओपीडी में, 400 मरीज बिना इलाज लौटे
2400 मरीज आते हैं ओपीडी में रोजाना इलाज कराने
इमरजेंसी वार्ड में पहुंचे 200 मरीज 50 मरीज कम पहुंचे, 20 गंभीर मरीजों ने इमरजेंसी से किया पलायन
हड़ताल से इलाज व्यवस्था पर असर देखने को मिला है. लेकिन मरीजों को परेशानी न हो, इसलिए 50 डॉक्टर बाहर से आये. इन्होंने इमरजेंसी आदि वार्डों में मरीजों का इलाज किया. रही बात मौत की तो गंभीर मरीज इमरजेंसी में भर्ती होते हैं, हड़ताल से मौत हुई है या नहीं इसे देखा जायेगा.
डॉ राजीव रंजन प्रसाद, अधीक्षक पीएमसीएच
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