उपस्थिति, आगंतुक और आय-व्यय पंजी समेत सीसीटीवी कैमरे लेकर कर्मी फरार
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 09 Aug 2018 9:00 AM
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पाटलिपुत्र अल्पावास गृह ई-कार्ड मामले में कॉल डिटेल्स से खुलेगा राज पटना : पाटलिपुत्र अल्पावास गृह ई-कार्ड मामले में केस के बाद भी अनुसंधान में पुलिस को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. ई-कार्ड से जुड़े लोग अपने साथ तमाम दस्तावेज मसलन उपस्थिति पंजी, आगंतुकों की पंजी, आय-व्यय की पंजी और सीसीटीवी कैमरे […]
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पाटलिपुत्र अल्पावास गृह ई-कार्ड मामले में कॉल डिटेल्स से खुलेगा राज
पटना : पाटलिपुत्र अल्पावास गृह ई-कार्ड मामले में केस के बाद भी अनुसंधान में पुलिस को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. ई-कार्ड से जुड़े लोग अपने साथ तमाम दस्तावेज मसलन उपस्थिति पंजी, आगंतुकों की पंजी, आय-व्यय की पंजी और सीसीटीवी कैमरे भी अपने साथ लेकर चले गये हैं.
दस्तावेज में संस्था की सारी गतिविधियों की लिखित जानकारी पुलिस को मिल सकती थी. ऐसी भी आशंका है कि उक्त दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा किया गया है. अब संस्था के प्रधान या उनसे जुड़े किसी की गिरफ्तारी होने के बाद ही दस्तावेजों की जानकारी मिल सकती है. वहीं, पुलिस ई-कार्ड के सचिव नरेंद्र सिंह के मोबाइल नंबर का सीडीआर निकालेगा, जिससे जानकारी मिलेगी कि उनकी किन-किन लोगों से बात होती थी. इसके अलावा विश्वजीतके संबंध में भी पुलिस को जानकारी मिली है.
छपरा स्थित ई-कार्ड के कार्यालय का होगा सत्यापन
केस के अनुसंधानकर्ता अर्जुन कुमार बुधवार को पटना समाहरणालय के विकास भवन पहुंचे, जहां उन्होंने जिला परियोजना पदाधिकारी भारती प्रियंवदा से मुलाकात की. साथ ही केस के संबंध में जानकारी ली. अनुसंधानकर्ता ने उनसे अल्पावास गृह में रहनेवाली तमाम महिलाओं की सूची व संचालक के संबंध में जानकारी ली. पुलिस वहां करीब दो घंटे तक रही और अल्पावास से जुड़ी तमाम जानकारियों को हासिल किया. जानकारी मिलने के बाद पुलिस की एक टीम छपरा स्थित ई-कार्ड के कार्यालय का सत्यापन करने जायेगी.
नरेंद्र सिंह का पता किसी के पास नहीं
नरेंद्र सिंह छपरा में या पटना में कहां रहते हैं, इसकी जानकारी किसी के पास नहीं है. पुलिस को एक मोबाइल नंबर भी नरेंद्र सिंह के हाथ लगा है. लेकिन, उक्त मोबाइल नंबर स्विच ऑफ है. हालांकि, पुलिस अब उक्त मोबाइल नंबर का सीडीआर निकालेगा. इससे इस बात की जानकारी मिल जायेगी कि नरेंद्र सिंह की किन-किन लोगों से बात होती थी. दूसरी ओर इस मामले को लेकर जिला परियोजना पदाधिकारी भारती प्रियंवदा से बात करने की कोशिश की गयी, तो उन्होंने कुछ भी जानकारी देने से साफ इन्कार कर दिया गया.
साक्ष्य के लिए गोला रोड के रिमांड होम जायेगी पुलिस
अल्का निवास की मकान मालकिन व किरायेदार ने महिलाओं के साथ मारपीट की पुष्टि की है. हालांकि, पुलिस अब गोला रोड स्थित रिमांड होम जायेगी, जहां महिलाओं को शिफ्ट किया गया है. उनसे पुलिस बयान लेगी. उनका बयान रिकॉर्ड भी किया जायेगा.
गबन का भी अंदेशा
ऐसी भी संभावना जतायी जा रही है कि गायब दस्तावेजों में वहां केवल भरपाई की जाती रही हो और महिलाओं को रहने-सहने के लिए जो पैसा सरकार की ओर से मिलता था, उसका भी गबन किया जाता रहा हो. इसके अलावा संख्या को बढ़ाने के लिए वैसी भी महिलाओं को जबरन रख लिया जाता होगा, जो मिलने के बाद अपने परिजनों की जानकारी दे रही होगी. लेकिन, फिर भी उन्हें रख कर उसके नाम को या दूसरा नाम भेज कर सरकारी खर्च उठाने का गोरखधंधा चलता हो. प्राथमिकी में भी इस तरह की संभावना जतायी गयी है.
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