मॉनसून की दगाबाजी, 15% से भी कम हुई धान की रोपाई

Updated at : 18 Jul 2018 5:36 AM (IST)
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मॉनसून की दगाबाजी, 15% से भी कम हुई धान की रोपाई

मुजफ्फरपुर : धान पर सूखे की मार, मॉनसून के कमजोर होने से जिला सूखे की चपेट में है. पर्याप्त वर्षा नहीं होने का धान की खेती पर विपरीत असर पड़ा है. गायघाट, मीनापुर, कुढ़नी समेत अन्य प्रखंडों में कई हेक्टेयर में लगा धान का बिचड़ा सूख गया है. किसानों के माथे पर चिंता की लकीर […]

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मुजफ्फरपुर : धान पर सूखे की मार, मॉनसून के कमजोर होने से जिला सूखे की चपेट में है. पर्याप्त वर्षा नहीं होने का धान की खेती पर विपरीत असर पड़ा है. गायघाट, मीनापुर, कुढ़नी समेत अन्य प्रखंडों में कई हेक्टेयर में लगा धान का बिचड़ा सूख गया है.

किसानों के माथे पर चिंता की लकीर खींच गयी है. बिचड़ा व धान रोपनी में भी जिला लक्ष्य से पीछे चल रहा है. जुलाई माह आधा से अधिक बीत चुका है. धान रोपनी में लक्ष्य का 15 प्रतिशत ही धान रोपनी हो पायी है. 14 हजार 600 हेक्टेयर में बिचड़ा लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था. लेकिन, अब तक 12 हजार 423 हेक्टेयर में बिचड़ा लगाया गया है. 1 लाख 46 हजार हेक्टेयर में धान रोपनी का लक्ष्य जिले में निर्धारित है.

समस्तीपुर : मौसम विभाग ने अच्छी बारिश की संभावना जतायी थी

मॉनसून की दगाबाजी से इस वर्ष फिर धान की खेती पर पानी फिरता दिख रहा है़ धान की रोपाई का समय तेजी से बीत रहा ,है लेकिन वर्षा के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं. जिले में इस वर्ष कृषि विभाग ने 65 हजार हेक्टेयर में खेती का लक्ष्य निर्धारित कर रखा है़ शुरू में मौसम विभाग ने इस बार अच्छी बारिश की संभावना जताई थी़ लेकिन धान की खेती की ताक पर वर्षा ने दगा दे दिया़ जून में औसत से 30 से 50 प्रतिशित तक कम वर्षा होने के कारण किसान धान का बिचड़ा तक नहीं तैयार कर सके़

मोतिहारी

धान के नैहर के रूप में चर्चित पूर्वी चंपारण के खेतों में धूल उड़ रही है. अबतक करीब 49800 हेक्टयर में खरीफ की खेती हुई है,जबकि लक्ष्य एक लाख 85 हजार हेक्टेयर का है. 253 राजकीय नलकूप जिले में हैं जिसमें मामूली खराबी के कारण 185 बंद हैं. निजी नलकूप से प्रति कट्ठा 120 रुपये रेट लग रहा है. किसान खेतों में पटवन नहीं कर रहे हैं. डीएओ ओंकारनाथ सिंह ने कहा कि सिंचाई के लिए किसानों का ऑनलाइन आवेदन लिया जा रहा है. भुगतान आरंभ किया जायेगा.

बिहारशरीफ

जुलाई माह में औसतन 252.8 मिली मीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक महज 52 मिलीमीटर बारिश ही हुई है. जिले में इस वर्ष एक लाख 28 हजार हेक्टेयर भूमि में धान की खेती करने का लक्ष्य रखा गया है. पानी की कमी से करीब पौने दो सौ हेक्टेयर भूमि में ही धान की रोपनी हो सकी है. बेगूसराय में पिछले वर्ष के आंकड़े को देखें तो जुलाई में 212 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गयी थी. इस वर्ष आधी जुलाई बीतने बाद 100 मिमी भी नहीं हुई है.

बेतिया

प्रदेश में अच्छे मानसून के पूर्वानुमान के साथ इस साल अच्छी बारिश की भविष्यवाणी मौसम विभाग की तरफ से की गई थी, लेकिन मानसून ने दगा दे दिया है. मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में औसत बरसात 30 प्रतिशत कम हुई है. मौसम विभाग के अनुसार गत वर्ष की तुलना में जून की समाप्ति तक 10000 हेक्टेयर कम जगहों पर ही धान की रोपनी हो पायी है.

छपरा (सदर)

सारण प्रमंडल सूखे की चपेट में आ गया है. जून और जुलाई में सारण प्रमंडल में अनुमानित समान्य वर्षा से 77 फीसदी कम बारिश 17 जुलाई तक मापी गयी है. 17 जून से लेकर 17 जुलाई तक वर्षापात का अनुमान लगाया था. उसके अनुसार पूरे प्रमंडल में 322.9 मिलीमीटर औसत बारिश का अनुमान था, जबकि वर्षापात महज 39.99 फीसदी ही हुआ है.

कोसी क्षेत्र

कोसी व पूर्व बिहार में बारिश के अभाव में खेतों में दरार पड़ने लगे हैं. धान रोपनी के लिए इस मौसम में जितनी वर्षा होनी चाहिए, उससे 20 से 35 प्रतिशत तक वर्षा कम हुई है.

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