पटना : शराब पीने व पकड़े जाने पर मिल सकेगी जमानत, नहीं होंगे जिलाबदर
Updated at : 13 Jul 2018 6:26 AM (IST)
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द्विवेदी सुरेंद्र पटना : राज्य में पूर्ण शराबबंदी जारी रहेगी. इस मामले में सरकार शराब के आरोप में पहली बार पकड़े जानेवालों को अब बड़ी राहत देने जा रही है. इस मॉनसून सत्र में बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद संशोधन विधेयक, 2018 लाया जाना है. शराबबंदी मामले में सबसे बड़ा बदलाव यह होनेवाला है कि […]
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द्विवेदी सुरेंद्र
पटना : राज्य में पूर्ण शराबबंदी जारी रहेगी. इस मामले में सरकार शराब के आरोप में पहली बार पकड़े जानेवालों को अब बड़ी राहत देने जा रही है. इस मॉनसून सत्र में बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद संशोधन विधेयक, 2018 लाया जाना है.
शराबबंदी मामले में सबसे बड़ा बदलाव यह होनेवाला है कि अब किसी भी व्यक्ति को पहली बार शराबबंदी कानून के आरोप में पकड़ा जाता है , तो उसे जेल जाने की नौबत नहीं आयेगी.
इसे जमानतीय अपराध बनाया जा रहा है जिसमें आरोपित को स्थानीय थाने से ही निजी मुचलके पर बेल मिल जायेगी. पहली बार शराब पीने के मामले में पकड़े जाने और आरोप सिद्धि होने पर 50 हजार का जुर्माना देना होगा. जुर्माने की राशि का भुगतान नहीं किये जाने पर उसको तीन महीने तक जेल में रहना पड़ सकता है. पुलिस द्वारा कोर्ट में आरोपित के खिलाफ फास्ट ट्रायल चलाया जायेगा.
कड़े प्रावधानों को शिथिल करने का था सुझाव
बिहार सरकार के महाधिवक्ता ललित किशोर ने प्रभात खबर से बातचीत में बताया कि शराबबंदी कानून के कड़े प्रावधानों को शिथिल करने के लिए राज्य सरकार को कुछ सुझाव उनके द्वारा दिया गया है. उनके कितने प्रस्तावों को कैबिनेट की सहमति मिली है, यह तो बिल पास होने के बाद ही पता चलेगा.
हालांकि कैबिनेट की सहमति मिलने के बाद इस मामले पर सरकार की ओर से किसी तरह की सूचना नहीं दी जा रही है कि कैबिनेट द्वारा शराबबंदी कानून के प्रावधान में किस किस तरह का संशोधन किया गया है. श्री किशोर ने बताया कि शराबबंदी मामले में पकड़े जाने के बाद किसी को जिला बदर नहीं करने का सुझाव दिया गया है. बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद संशोधन विधेयक 2016 में इसके कारोबार और बिक्री व व्यापार में लिप्त व्यक्तियों को 10 वर्ष से लेकर उम्र भर तक की सजा का प्रावधान किया गया था.
अब इसे शिथिल करते हुए पहली बार पकड़े जाने पर न्यूनतम पांच साल और दूसरी बार पकड़े जाने पर न्यूनतम 10 वर्ष की सजा करने का सुझाव दिया गया है.
किसी को फंसाया नहीं जा सकेगा
शराबबंदी कानून के संशोधन में सामूहिक जुर्माना के प्रावधान को शिथिल करने का भी सुझाव दिया गया है. पहले किसी गांव या भवन में शराब के उत्पादन या बिक्री होने पर सामूहिक जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है. नये प्रावधान में किसी व्यक्ति के खेत, घर या वाहन में खाली या भरी शराब की बोतल पकड़े जाने पर पूरे परिवार पर जुर्माना लगाने का जो प्रावधान था अब इसको समाप्त कर दिया जायेगा. इससे लोगों को नाहक ही इस मामले में फंसाया जा सकता था. किसी व्यक्ति पर संदेश के आधार किसी भी व्यक्ति को शराबबंदी मामले में तब तक फंसाया नहीं जायेगा जबतक कि उसके खिलाफ पुख्ता साबूत नहीं मिल जाये.
शराबबंदी मामले में पुलिस पदाधिकारियों द्वारा अगर किसी भी तरह का जांच या जब्ती को लेकर अलग से कुछ बिंदुओं पर दिशा निर्देश का सुझाव दिया गया है ताकि कानूनी प्रावधानों में खामियां रहने के कारण दोषी व्यक्ति को न्यायालय से राहत नहीं मिले. पुलिस पदाधिकारियों को सुझाये गये निर्देशों के अनुसार ही किसी भी व्यक्ति या स्थान की जांच (सर्च) या जब्ती (सीजर) कानूनी प्रवाधानों के तहत हो.
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