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पटना हाईकोर्ट के आदेश से माता-पिता के चंगुल से मुक्त हुई जिला जज की बेटी, जानें क्‍या है पूरा मामला

Updated at : 13 Jul 2018 6:16 AM (IST)
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पटना हाईकोर्ट के आदेश से माता-पिता के चंगुल से मुक्त हुई जिला जज की बेटी, जानें क्‍या है पूरा मामला

पटना : रिटायर्ड जिला जज की बेटी के प्रेम प्रसंग के मामले में पटना हाईकोर्ट ने गुरुवार को ऐतिहासिक निर्णय दिया है. इस मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र मेनन और न्यायाधीश राजीव रंजन प्रसाद ने की. उन्होंने पीड़ित प्रेमिका को उसके माता-पिता के चंगुल से मुक्त कराते हुए कहा है कि लड़की […]

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पटना : रिटायर्ड जिला जज की बेटी के प्रेम प्रसंग के मामले में पटना हाईकोर्ट ने गुरुवार को ऐतिहासिक निर्णय दिया है. इस मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र मेनन और न्यायाधीश राजीव रंजन प्रसाद ने की. उन्होंने पीड़ित प्रेमिका को उसके माता-पिता के चंगुल से मुक्त कराते हुए कहा है कि लड़की अपने प्रेमी के साथ जहां चाहे अपनी मर्जी से आ-जा, पढ़-लिख और रह सकती है.
लड़की बालिग है और वह अपने जीवन का निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है. अदालत ने आरोपी माता-पिता को यह निर्देश दिया कि वह लड़की और लड़के को किसी भी तरह से परेशान नहीं करें. अगर इसकी शिकायत मिलेगी तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी.
लड़की के अनुरोध पर अदालत ने पटना के एसएसपी को निर्देश दिया कि वह पीड़िता के शैक्षणिक प्रमाणपत्र हर हाल में उसके माता-पिता या रिश्तेदार से उपलब्ध करवायें. अदालत ने स्पष्ट किया कि पीड़िता का प्रमाण पत्र देने में किसी के द्वारा कोई आनाकानी की जाती है तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाये.
हाईकोर्ट के फैसले से खुश हैं प्रेमी युगल
प्रेमी युगल यशस्विनी और सिद्धार्थ बंसल हाईकोर्ट के फैसले से खुश हैं. न्यायपालिका में उनकी आस्था गहरी हुई है. चाणक्या नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी से स्नातक यशस्विनी कहती हैं कि सिद्धार्थ से उनका परिचय वर्ष 2012 में साकेत कोर्ट में इंटर्नशिप के दौरान हुआ. वे अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं.
उनके अनुसार दोनों में प्रेम संबंध की शुरुअात दिसंबर 2017 में हुई. दोनों ने कुछ वर्षों बाद पारिवारिक सहमति प्राप्त करने के बाद विवाह का निर्णय लिया था. इस प्रेम संबंध के बारे में यशस्विनी ने अपने माता-पिता को पहली बार पांच जून 2018 को जानकारी दी. जानकारी मिलने के बाद से उन्होंने यशस्विनी और सिद्धार्थ को परेशान करना शुरू कर दिया. माता-पिता के रवैये से उन्हें ऑनर किलिंग तक का डर हो गया था.
वहीं सिद्धार्थ बंसल भी कुरुक्षेत्र विवि से एलएलएम कर सुप्रीम कोर्ट में वकालत कर रहे हैं. वे दो भाई हैं और उनके पिता नगर विकास मंत्रालय से रिटायर्ड अधिकारी हैं. अब हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद वे कहते हैं कि उनकी पहली प्राथमिकता यशस्विनी को उनके पैरों पर खड़ा करने में मदद करना है. इसके बाद वे लोग शादी करेंगे.
क्या है पूरा मामला
गौरतलब है कि बेटी के प्रेम संबंध से नाराज होकर खगड़िया के तत्कालीन जिला जज पिता ने उसे घर में कैद कर रखा था. एक वेबसाइट पर यह खबर 22 जून 2018 को प्रकाशित होने के बाद हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए 23 जून को मामले की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया था.
25 जून को पहली सुनवाई हुई. इसमें प्रेमी युवक की ओर से अधिवक्ता राजीव श्रीवास्तव, आदित्य प्रकाश सहाय, जबकि राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ललित किशोर व प्रभुनारायण शर्मा और पीड़िता के पिता की ओर से अधिवक्ता संदीप कुमार ने अपनी-अपनी बातों को अदालत में रखा.
अदालत के निर्देश पर 26 जून को पीड़िता को कोर्ट में पुलिस ने पेश किया. लड़की का पक्ष जानने के बाद अदालत ने उसे पंद्रह दिन के लिए चाणक्या नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (सीएनएलयू) के गेस्ट हाउस में रहने के लिए सुरक्षा के साथ भेज दिया. इसके बाद 12 जुलाई को सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अंतिम निर्णय दिया है.
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